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आपकी भी हो गई है किसी से दुश्मनी तो जरूर जान लें ग्रंथों में बताई ये 1 बात

ग्रंथों में बताई दुश्मन से जुड़ी 1 बात, ध्यान रखने पर नहीं होता कोई नुकसान

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 09, 2018, 05:15 PM IST

  • आपकी भी हो गई है किसी से दुश्मनी तो जरूर जान लें ग्रंथों में बताई ये 1 बात

    हमारे शास्त्र और ग्रंथ ज्ञान का खजाना हैं। धर्म ग्रंथों में कई ज्ञान की बातें समझाई गई हैं। जिन बातों को समझ कर अपने जीवन में अपना लेने से जीवन सुखी हो सकता है।

    हर मनुष्य के जीवन में कोई न कोई ऐसा जरूर होता है, जो उसे और उसके स्वभाव को नहीं समझ पाता। आपसी ताल-मेल न बनने की वजह से दो लोगों में दुश्मनी हो जाती है। वो चाहे अकेला ही हो, लेकिन उसे कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। अकेला शत्रु भी मनुष्य का सब कुछ बरबाद कर सकता है। इस बात को रामचरित मानस में दिए गए एक दोहे से अच्छी तरह समझा जा सकता है-

    रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु।
    अजहुं देत दुख रबि ससिहि सिर अवसेषित राहु।।

    अर्थात- तेजस्वी शत्रु अकेला भी हो तो उसे छोटा नहीं समझना चाहिए। जिस राहु का मात्र सिर बचा था, वह राहु आज तक सूर्य और चन्द्रमा को दुःख देता है।

    अकेले थे भगवान हनुमान, फिर भी कर दिया था लंका का विनाश

    हनुमान को लंका भेजने का उद्देश्य माता सीता की खोज करना था। हनुमान समुद्र को पार करके लंका पहुंच गए। वहां उन्होंने अशोकवाटिका में माता सीता को देखा। सीता की स्थिति देख कर हनुमान बहुत दुःखी हुए। जब राक्षसों ने हनुमान को देखा, तब वे उन्हें पकड़ कर अपने राजा रावण के पास लेकर गए। रावण ने अपने हनुमान को अकेला समझ कर उनकी वध करना चाहा, लेकिन हनुमान ने अकेले ही पूरी लंका को जला कर उसका नाश कर दिया।

    अकेले अश्वत्थामा ने कर दिया था द्रौपद्री के पाचों पुत्रों का वध

    महाभारत के सौप्तिकपर्व के अनुसार, कौरवों के सभी वीरों का नाश हो गया था। दुर्योधन भी घायल होकर धरती पर पड़ा हुआ था। कौरव पक्ष से केवल अश्वत्थामा और कृपाचार्य ही जीवित बचे थे। अपने शत्रु पक्ष के लगभग सभी वीरों का नाश करने पर पांडव युद्ध में अपनी विजय समझने लगे थे। अश्वत्थामा को अकेला जान कर पांडवों ने उसके विषय में विचार तक नहीं किया, लेकिन उसके मन में पांडवों के लिए बहुत अधिक नफरत थी। अकेले होने पर भी उसने रात के समय में धोखे से द्रौपदी के पांचों पुत्रों को मार दिया था।

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Web Title: Lesson From Granth Regarding Enemies
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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