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​परंपराः कौन थे सांता क्लॉज, क्यों सजाया जाता है क्रिसमस ट्री?

ईसाई समुदाय द्वारा यह त्योहार 25 दिसंबर को यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है।

जीवन मंत्र डेस्क | Last Modified - Dec 23, 2017, 05:00 PM IST

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    खुशी और उत्साह का प्रतीक क्रिसमस ईसाई समुदाय का सबसे बड़ा त्योहार है। ईसाई समुदाय द्वारा यह त्योहार 25 दिसंबर को यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। क्रिसमस से जुड़ी अनेक परंपराएं व रोचक बाते हैं, जैसे क्रिसमस ट्री सजाना, संता का गिफ्ट बांटना व कार्ड भेजना। ये परंपराएं क्यों है व कब से इनकी शुरुआत हुई आइए जानते हैं इन परंपराओं के बारे में खास बातें-

    सांता क्लॉज
    मान्यता है कि सांता का घर उत्तरी ध्रुव पर है और वे उड़ने वाले रेनडियर्स की गाड़ी पर चलते हैं। सांता का यह आधुनिक रूप 19 वीं सदी से अस्तित्व में आया। उसके पहले ये ऐसे नहीं थे। आज से डेढ़ हजार साल पहले जन्मे संत निकोलस को असली सांता और सांता का जनक माना जाता है, हालांकि संत निकोलस और जीसस के जन्म का सीधा संबंध नहीं रहा है फिर भी आज के समय में सांता क्लॉज क्रिसमस का अहम हिस्सा हैं। उनके बिना क्रिसमस अधूरा सा लगता है।

    कौन थे संत निकोलस?
    संत निकोलस का जन्म तीसरी सदी में जीसस की मौत के 280 साल बाद मायरा में हुआ। वे एक रईस परिवार से थे। वे जब छोटे थे तभी उनके माता-पिता का देहांत हो गया। बचपन से ही उनकी प्रभु यीशु में बहुत आस्था थी। वे बड़े होकर ईसाई धर्म के पादरी (पुजारी) और बाद में बिशप बने। उन्हें जरूरतमंदों और बच्चों को गिफ्ट्स देना बहुत अच्छा लगता था। वे अक्सर जरूरतमंदों और बच्चों को गिफ्ट्स देते थे। संत निकोलस अपने उपहार आधी रात को ही देते थे, क्योंकि उन्हें उपहार देते हुए नजर आना पसंद नहीं था।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़िए क्रिसमस से जुड़ी कुछ और परंपराओं के बारे में-

    तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

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    क्रिसमस ट्री
    कहा जाता है जब महापुरुष ईसा का जन्म हुआ तो देवता उनके माता-पिता को बधाई देने आए। देवताओं ने एक सदाबहार फर को सितारों से सजाया। मान्यता है कि उसी दिन से हर साल सदाबहार फर के पेड़ को क्रिसमस ट्री प्रतीक के रूप में सजाया जाता है। इसे सजाने की परंपरा जर्मनी में दसवीं शताब्दी के बीच शुरू हुई और इसकी शुरुआत करने वाला पहला व्यक्ति बोनिफेंस टुयो नामक एक अंग्रेज धर्मप्रचारक था।
    इंग्लैंड में 1841 में राजकुमार पिंटो एलबर्ट ने विंजर कासल में क्रिसमस ट्री को सजावाया था। उसने पेड़ के ऊपर एक देवता की दोनों भुजाएं फैलाए हुए मूर्ति भी लगवाई, जिसे काफी सराहा गया। क्रिसमस ट्री पर प्रतिमा लगाने की शुरुआत तभी से हुई। पिंटो एलबर्ट के बाद क्रिसमस ट्री को घर-घर पहुंचाने में मार्टिन लूथर का भी काफी हाथ रहा। क्रिसमस के दिन लूथर ने अपने घर वापस आते हुए आसमान को गौर से देखा तो पाया कि वृक्षों के ऊपर टिमटिमाते हुए तारे बड़े मनमोहक लग रहे हैं।
    मार्टिन लूथर को तारों का वह दृश्य ऐसा भाया कि उस दृश्य को साकार करने के लिए वह पेड़ की डाल तोड़ कर घर ले आया। घर ले जाकर उसने उस डाल को रंगबिरंगी पन्नियों, कांच एवं अन्य धातु के टुकड़ों, मोमबत्तियों आदि से खूब सजा कर घर के सदस्यों से तारों और वृक्षों के लुभावने प्राकृतिक दृश्य का वर्णन किया। वह सजा हुआ वृक्ष घर सदस्यों को इतना पसंद आया कि घर में हर क्रिसमस पर वृक्ष सजाने की परंपरा चल पड़ी।

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    क्रिसमस कार्ड की परंपरा
    सबसे पहले क्रिसमस कार्ड विलियम एंगले द्वारा सन् 1842 में भेजा गया था, क्योंकि वह क्रिसमस का मौका था। इसलिए इसे पहला क्रिसमस कार्ड माना जाता है। कहते हैं कि इस कार्ड में एक शाही परिवार की तस्वीर थी। लोग अपने मित्रों के स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए दिखाए गए थे और उस पर लिखा था विलियम एंगले के दोस्तों को क्रिसमस शुभ हो।
    उस जमाने में चूंकि यह नई बात थी, इसलिए यह कार्ड महारानी विक्टोरिया को दिखाया गया। इससे खुश होकर उन्होंने अपने चित्रकार डोबसन को बुलाकर शाही क्रिसमस कार्ड बनवाने के लिए कहा और तब से क्रिसमस कार्डों की शुरुआत हुई।

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Web Title: Know About Christmas Tradition.
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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