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आज भी यूज होते हैं महाभारत काल के ये 8 हथियार, पलभर में बचा देते हैं तबाही

शास्त्रों में वर्णित अस्त्र-शस्त्र, जो की आज के हथियीरों से काफि मिलते-जुलते हैं

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 26, 2018, 05:00 PM IST

  • आज भी यूज होते हैं महाभारत काल के ये 8 हथियार, पलभर में बचा देते हैं तबाही
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    रामायण और महाभारत दोनों ही महान ग्रंथों की कहानियां महायुद्ध पर आधारित है। रामायण में श्रीराम और रावण के बीच और महाभारत में पांडवों और कौरवों के बीच भीषण युद्ध हुआ। ये दोनों ही युद्ध कोई साधारण युद्ध नहीं थे। दोनों ही युद्धों में कई विनाशकारी अस्त्रों और शस्त्रों का प्रयोग किया गया था।

    हिन्दू धर्म में जिन शस्त्रों का जिक्र किया गया है, उनसे मिलते-जुलते शस्त्रों का प्रयोग आज भी यानि कलियुग में भी किया जाता है। शस्त्रों को आकार आदि जरूर बदल गए होंगे, लेकिन उनका काम लगभग वैसा ही है। यानि आज के समय में जो भी हथियार प्रयोग किए जाते हैं, उनका आविष्कार हजारों साल पहले हो चुका है।

    जानिए कलयुग के उन हथियारों के बारे में, जिनका वर्णन हमारे पुराणों में भी पाया जाता है-


    1.शिव के तीन बाण

    महाभारत में भीम के पौत्र बर्बरीक को भगवान शिव ने तीन बाण दिए थे, जिसने उसे महाभारत के युद्ध का सबसे ताकतवर योद्धा बना दिया। वे बाण उन्ही जगह पर वार करते थे, वहां के लिए उनका निशाना साधा जाता था। ये कभी अपना निशाना नहीं चूकते थे।

    कलियुग में समानता- टॉरपीडो


    2.पशुपातास्त्र

    यह शस्त्र भगवान शिव की आराधना से प्राप्त किया जाता था। यह लक्ष्य को पूरी तरह से तबाह कर देता है। लक्ष्य चाहे कैसा भी हो, यह उसका अस्तित्व समाप्त करने की क्षमता रखता है।

    कलियुग में समानता है– हाइड्रोजन बम


    3.इंद्रास्त्र

    देवों के राजा भगवान इंद्र के इस अस्त्र से एक साथ कई लोगों को मारा जा सकता है। यह एक साथ अनेकों बाणों की वर्षा कर सकता है।

    कलियुग में समानता- मशीन गन


    4.अग्नेयस्त्र

    अग्नि देव के इस अस्त्र से ऐसी ज्वालाएं और आग निकलती थी, जिसे बुझाया नहीं जा सकता। ये आग की ऐसी लपटें फेंकता था, जिससे दुश्मन का सब-कुछ तबाह किया जा सकता था।

    कलियुग में समानता- फ्लेम थ्रोअर्स

    5.सुदर्शन चक्र

    यह भगवान विष्णु का अस्त्र था और केवल उन्हीं की आज्ञा पर वार करता था। इसमें अपने लक्ष्य को पूरी तरह तबाह करने की क्षमता मौजूद थी।

    कलियुग में समानता- मिसाइल

    6.पुष्पक विमान

    रावण ने देवी सीता का हरण करने के लिए इस हवाई विमान का प्रयोग किया था। यह बहुत ही तेज गति से हवा में उड़ने की क्षमता रखता था।

    कलियुग में समानता- लड़ाकू विमान

    7. वज्र

    ये भी भगवान इंद्र का ही एक अस्त्र था। महर्षि दधिचि की हड्डियों से बने इस शस्त्र से बिजली निकलती है।

    कलियुग में समानता– लेजर


    8.ब्रह्मास्त्र

    भगवान ब्रह्मा के इस शस्त्र का प्रयोग महाभारत और रामायण दोनों में ही देखा गया। इससे एक समय पर कई तरह का विनाश किया जा सकता था

    कलियुग में समानता– परमाणु बम

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