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स्त्री-पुरुषों से अलग किन्नरों की होली भी होती है खास, जानिए कैसे मनाते हैं रंगों का त्योहार

1 मार्च को होलिका दहन होगा और 2 मार्च को होली खेली जाएगी।

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Mar 01, 2018, 08:04 PM IST

    • होली सब मनाते हैं, लेकिन किन्नर समुदाय में होली मनाने का भी कुछ खास तरीका है। इनका अपना प्रोटोकॉल होता है। होली केवल रंग-गुलाल से नहीं, वरिष्ठ किन्नरों का सम्मान करके होली की शुरुआत की जाती है। इनकी जीवनशैली की तरह ही इनकी होली भी रहस्यमयी होती है। ये आम लोगों में नहीं, बल्कि सिर्फ अपने समुदाय में ही होली मनाते हैं।

      उज्जैन सिंहस्थ 2016 में किन्नर अखाड़ा का गठन करने वाले ऋषि अजय दास के अनुसार होली के गीत, ढोलक की थाप और डांस के साथ होली खेली जाती है। होली से कई दिन पहले से ही इनकी तैयारी शुरू हो जाती है। अपने-अपने क्षेत्र में ये कई दिनों पहले से होली का नेग लेने निकलते हैं। होली के दो दिन पहले तक नेग लेना, होली गीत गाना और नाचना। इसके बाद होली के दिन ये सिर्फ अपने समुदाय के बीच रहते हैं।

      किन्नरों को ग्रंथों में देवगण माना गया है। इसलिए ये खुद को संन्यासी मानते हैं। दो साल पहले ही संतों के अखाड़ों के साथ ही किन्नरों ने अपना भी एक अखाड़ा स्थापित किया है। हालांकि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अभी इस अखाड़े को कोई मान्यता नहीं दी है, लेकिन किन्नरों ने अपने अखाड़े के नियम और प्रोटोकॉल दोनों तय कर लिए हैं।

      ऋषि अजय दास के अनुसार किन्नरों की होली भी आम लोगों की तरह ही होती है। बस ये लोग अपने समाज के साथ ही होली मनाते हैं। यहां जानिए किन्नरों की होली से जुड़ी खास बातें…

      होली से पहले लोगों से लेते हैं नेग

      होली आने से कुछ दिन पहले से ही किन्नर अपने-अपने क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से नेग लेते हैं। लोग अपनी खुशी से इन्हें धन का दान करते हैं और किन्नर उनके घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहे, इसकी कामना करते हैं। आमतौर पर अधिकतर किन्नरों का जीवन यापन इसी प्रकार के नेग से होता है।

      होली मनाते हैं अपनी बिरादरी के साथ

      आम लोगों से अलग किन्नरों का अपना अलग समाज होता है, जहां ये सभी मिलजुल कर हर त्योहार मनाते हैं। होली पर अपने-अपने क्षेत्रों में किसी खास जगह सभी किन्नर एकत्र होते हैं और वहीं धूमधाम से होली मनाते हैं।

      ढोलक की थाप और गानों पर थिरकते हैं किन्नर

      होली पर सभी किन्नर खूब नाचते हैं, गाते हैं। किन्नरों की खुशी में उनका ढोलक हमेशा साथ रहता है। ढोलक थाप और गानों के साथ किन्नर होली मनाते हैं। कई जगहों पर तो किन्नर साउंड सिस्टम पर फिल्मी गानों के साथ होली खेलते हैं, एक-दूसरे को रंग लगाते हैं।

      देश और समाज की तरक्की के लिए करते है कामना

      होली पर किन्नर एक साथ मिलकर देश और समाज की तरक्की के लिए कामना करते हैं। सभी किन्नर चाहते हैं कि भारत की तरक्की हो और समाज में सभी लोग खुश रहें।

      किन्नरों का करते हैं सम्मान

      जब सभी किन्नर एक जगह एकत्रित होतेे हैं तो अपनी बिरादरी के खास किन्नरों का सम्मान करते हैं। ऐसे किन्नर जो समाज में सभी किन्नरों को समानता का अधिकार दिलाने के लिए काम कर रहे हैं, उनका विशेष सम्मान किया जाता है।

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