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कम ही लोग जानते हैं महाभारत की ये बातें, समझ लेंगे तो आप भी बन जाएंगे बॉस

अगर आप भी अच्छे बॉस बनना चाहते हैं तो महाभारत की इन बातों का ध्यान हमेशा रखें।

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 23, 2018, 05:00 PM IST

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    महाभारत ग्रंथ को पांचवां वेद कहा जाता है। इसकी रचना वेद व्यास ने की थी और इसे लिखा था भगवान श्रीगणेश ने। ये ग्रंथ कौरव और पांडव यानी धर्म और अधर्म के बीच हुए युद्ध पर आधारित है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों की मदद की और उन्हें युद्ध जीत दिलवाई। श्रीकृष्ण ने महाभारत में कुछ ऐसी नीतियां अपनाई थीं, जिनका ध्यान रखने पर कोई भी हर काम सही ढंग कर सकते हैं और सफल हो सकते हैं। इसमें कुछ बातें ऐसी हैं, जिनसे कोई भी व्यक्ति अच्छा बॉस बन सकता है। यहां जानिए ये बातें कौन-कौन सी हैं...

    किस काम के लिए कौन है योग्य

    एक अच्छा लीडर ये जानता है कि उसकी टीम में कौन व्यक्ति किस काम के लिए योग्य है। महाभारत में श्रीकृष्ण ने इस बात का खास ध्यान रखा था। श्रीकृष्ण ने भीष्म पितामह को रोकने के लिए शिखंडी को अर्जुन की ढाल बनाया, द्रोणाचार्य वध के लिए धृष्टदुम्य की मदद ली और अभिमन्यु से चक्रव्यूह तोड़ने का काम करवाया।

    टीम के हर सदस्य को दें जिम्मेदारी और निर्णय लेने की आजादी

    महाभारत युद्ध में दो टीम थीं। एक कौरव की और एक पांडव की। कौरवों के साथ 11 अक्षौहिणी सेना थी। जिसका नेतृत्व भीष्म, द्रोणाचार्य, कर्ण और शल्यराज ने किया था। कौरवों की ओर से इन्हीं महारथियों को निर्णय लेने की आजादी थी। जबकि पांडवों के पास 7 अक्षौहिणी सेना थी और इन सातों सेनाओं के अलग-अलग सेनापति थे। पांडवों ने अर्जुन के नेतृत्व में युद्ध लड़ा, लेकिन सभी सेनापतियों को निर्णय लेने की आजादी थी। इस कारण कौरवों की बड़ी सेना के सामने पांडवों की छोटी सेना भी भारी पड़ गई। हमें भी टीम के सभी सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारी के साथ निर्णय लेने की आजादी देनी चाहिए।

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    टीम के हर सदस्य की योग्यता जानिए

    हर व्यक्ति की अलग योग्यता होती है, सभी की क्षमताएं अलग-अलग होती हैं। इस बात का ध्यान हमेशा रखना चाहिए। महाभारत में युद्ध से पहले जब अर्जुन और दुर्योधन श्रीकृष्ण से मदद मांगने पहुंचे तो दुर्योधन ने श्रीकृष्ण की विशाल 11 अक्षौहिणी सेना मांग ली, जबकि अर्जुन ने श्रीकृष्ण को इस शर्त के साथ अपनी ओर कर लिया कि वे युद्ध में शस्त्र नहीं उठाएंगे। अर्जुन ये जानते थे कि श्रीकृष्ण अपनी नीतियों से ही युद्ध जीत सकते हैं।

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    टीम और कंपनी का होना एक ही लक्ष्य

    किसी भी टीम में हर मेंबर को अपना लक्ष्य वही तय करना चाहिए जो कंपनी का है। कंपनी और टीम मेंबर के लक्ष्य अलग-अलग होंगे तो सफलता नहीं मिल पाएगी। महाभारत में कौरवों की सेना में अहंकार के कारण सभी महारथियों के लक्ष्य अलग-अलग थे। जबकि पांडवों की सेना में सभी का एकमात्र लक्ष्य था कौरवों पर जीत हासिल करना। इसीलिए पांडवों ने कौरवों को हरा भी दिया।

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