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मंदिर जाएं तो ये 5 काम जरूर करें, इनसे मिलेेंगे सुख-समृद्धि

कोई त्योहार हो या छुट्टी का दिन, सनातन परंपरा मंदिर जाने की रही है। ज्यादातर लोग देव-दर्शन के साथ छुट्टी का मजा लेते हैं

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 29, 2018, 06:07 PM IST

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    कोई त्योहार हो या छुट्टी का दिन, सनातन परंपरा मंदिर जाने की रही है। ज्यादातर लोग देव-दर्शन के साथ छुट्टी का मजा लेते हैं। लेकिन, मंदिर जाकर दर्शन कर लेने भर से फायदा नहीं होता। मंदिर में दर्शन के साथ अगर इन पांच बातों को ध्यान रखें तो आप मंदिर से कई दिनों की पॉजीटिव एनर्जी अपने साथ लेकर आ सकते हैं।

    वास्तव में, सारा मामला ही हमारे एनर्जी लेवल का है। ऐसे मंदिर जहां रोजाना नियम से पूजा-पाठ होते हैं, मंत्रों का उच्चारण होता है, वो मंदिर एनर्जी से भरे होते हैं। वहां थोड़ी देर रहने और कुछ बातों का ध्यान रखने भर से आप अपने भीतर उन सकारात्मक तरंगों को महसूस कर सकते हैं। मंदिर आम जगहों से अलग, शांत और सकारात्मक तरंगों से भरे हुए ही इस लिए होते हैं क्योंकि वहां शंख, घंटाल, मंत्र आदि की ध्वनियां वातावरण में होती हैं, हवन आदि के धुएं से नकारात्मक तरंगें उस क्षेत्र से बाहर निकल चुकी होती हैं, यही कारण है कि मंदिर जाने से, भगवान के दर्शन करने से हमारे भीतर एक शक्ति का अनुभव होता है। अब जब भी मंदिर जाएं तो ये पांच बातें और इनसे होने वाले पांच फायदे याद रखेः-

    मंदिर की पहली सीढ़ी पर सिर झुकाएं

    आपने देखा भी होगा कि कई लोग मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही पहली सीढ़ी पर सिर नवाते हैं। ये परमात्मा के प्रति हमारी आस्था तो है ही, साथ ही हम मंदिर की पहली सीढ़ी पर सिर झुकाकर अपने साथ बाहर से लाई सभी नकारात्मक तरंगों को वहीं विसर्जित कर देते हैं। बिना किसी नकारात्मकता के मंदिर में प्रवेश करते हैं।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें - मंदिर में दर्शन के समय और क्या-क्या करना चाहिए...

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    घंटी जरूर बजाएं

    मंदिर में प्रवेश करने के बाद ही छतों पर कई सारी घंटियां टंगी होती हैं। कुछ लोग इन्हें बजाते हैं, कुछ ऐसे ही निकल जाते हैं। वास्तु में माना जाता है, पीतल से बनी घंटियां, फेंगशुई में आने वाली विंडचाइम, शंख, बांसुरी, डमरू जैसे वाद्यों की ध्वनि से आसपास फैली नकारात्मकता और नुकसानदायक बैक्टिरिया का नाश होता है। जब आप घंटी के नीचे खड़े होकर उसे बजाते हैं तो उससे निकलने वाली ध्वनि आपके आसपास मौजूद सारी नकारात्मकता को मिटा देती है।

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    प्रसाद लें

    मंदिर में रखा प्रसाद मंत्रों से अभिमंत्रित होता है क्योंकि पहले वो भगवान को चढ़ाया जाता है, फिर लोगों में बांटा जाता है। उसमें मंत्रों की शक्ति भी होती है, और भक्ति का भाव भी। आस्था के साथ लिया गया थोड़ा सा चरणामृत और प्रसाद आपमें शक्ति का संचार करता है।

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    परिक्रमा करें

    मंदिर या भगवान की प्रतिमा की परिक्रमा जरूर करें। एक, तीन या पांच परिक्रमा करने का विधान है। ये परिक्रमा इसलिए आवश्यक है कि मंदिर के आसपास जो सकारात्मक तरंगें हैं वो हम ले सकें।

    थोड़ी देर परिसर में बैठें, मंत्र जाप करें

    मंदिर परिसर में थोड़ी देर बैठें। दर्शन के बाद जाने की जल्दबाजी ना करें। 5-10 मिनट मंदिर में बैठकर किसी मंत्र का जाप करें। जैसे शिव मंत्र, गणेश मंत्र या कोई गुरु मंत्र। इससे हमारे शरीर के सप्तचक्र जागृत होते हैं। अगर मंत्र जाप नहीं कर सकते हैं तो आंखें मूंद कर थोड़ी देर ध्यान में बैठें। ये पांच काम आपको पूरे सप्ताह के लिए सकारात्मक शक्ति से भर देंगे।

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Web Title: Temple Visiting Rules According Mythology
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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