Home » Jeevan Mantra »Jeene Ki Rah »Dharm Granth » Why Arjuna Was Better Than Everybody Else,Best Qualities Of Arjun

इन 7 कारणों की वजह से सभी में महान थे अर्जुन, कोई नहीं कर पाया उनसे मुकाबला

महाभारत के किसी योद्धा में नहीं थी ये 7 बातें, जो अर्जुन में मौजूद थी

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 01, 2018, 06:00 PM IST

  • इन 7 कारणों की वजह से सभी में महान थे अर्जुन, कोई नहीं कर पाया उनसे मुकाबला
    +2और स्लाइड देखें

    अर्जुन महाभारत के मुख्य पात्रों में से एक था। वह बहुत ही ताकतवर और बुद्धिमान होने के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय भी था। समय-समय पर भगवान श्रीकृष्ण ने ही अर्जुन को ज्ञान दिया और सही-गलत में अंतर करने में मदद की।

    महाभारत के उद्योग पर्व में भगवान श्रीकृष्ण ने 7 ऐसे गुणों का वर्णन किया हैं, जो अर्जुन के अलावा महाभारत के किसी और पात्र में नहीं थे। ये 7 गुण ही अर्जुन की जीत के कारण भी थे।

    श्लोक-

    बलं वीर्यं च तेचश्र्च शीघ्रता लघुहस्तता।
    अविषादश्र्च धैर्यं च पार्थान्नान्यत्र विद्यते।।

    1. हाथों की स्फूर्ति

    अर्जुन के समान श्रेष्ठ धर्नुधारी और कोई नहीं था। जिनकी स्फूर्ति से अर्जुन के धनुष से बाण चलाते थे, उनकी स्फूर्ति और किसी के हाथों में नहीं थी। अर्जुन का यहीं गुण उन्हें सर्वश्रेष्ठ धर्नुधारी बनाता था।

    2. बल

    महाभारत की पूरी कथा में ऐसे कई किस्से हैं, जो अर्जुन के बल और बुद्धि को दर्शाते हैं। अर्जुन में शारीरिक बल के साथ-साथ मानसिक बल भी था। जिसकी वजह से वे चतुर नीतियां बना कर, शत्रुओं का नाश कर देते थे।

    3. शीघ्रकारिता

    कहा जाता है कि हर काम करने का एक सही समय होता है, अगर हम किसी बात का निर्णय लेने में देर कर देते हैं तो उसका कोई मतलब नहीं बचता। इस बात का महत्व अर्जुन बहुत अच्छी तरह से जानते थे। वे किसी भी काम को करने में इतनी देर नहीं लगाते थे कि इसका महत्व ही खत्म हो जाए। श्रीकृष्ण अपनी नीतियां सभी पांडवों को बातते थे, लेकिन उनको समझ कर, सबसे पहले अमल अर्जुन ही करते थे। इसी कारण से श्रीकृष्ण को अर्जुन में यह गुण दिखाई देता था।

  • इन 7 कारणों की वजह से सभी में महान थे अर्जुन, कोई नहीं कर पाया उनसे मुकाबला
    +2और स्लाइड देखें

    4. विषादहीनता

    श्रीकृष्ण ने स्वयं गीता उपदेश में अर्जुन को मोह-माया छोड़कर अपने कर्म को महत्व देने की बात सिखाई थी। जिसके बाद अर्जुन के अंदर विषादहीनता यानि किसी भी बाद से दुखी न होने का गुण आ गया था। युद्ध में चाहे अर्जुन को किसी भी परिस्थिति का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उनका मन एक पल के लिए भी विचलित नहीं हुआ। वे अपना कर्म करते रहे।

    5. धैर्य

    धैर्य एक ऐसे गुण है, जो हर किसी में नहीं पाया जाता। भगवान कृष्ण के अनुसार, जिस मनुष्य में धैर्य होता है, वह अपने आप ही महान बन जाता है। अर्जुन बुद्धिमान, ताकतवर होने के साथ-साथ धैर्यवान भी थे। उनका यही गुण उन्हें सभी से अलग और महान बनाता है।

  • इन 7 कारणों की वजह से सभी में महान थे अर्जुन, कोई नहीं कर पाया उनसे मुकाबला
    +2और स्लाइड देखें

    6. पराक्रम

    पराक्रम यानि हर काम को करने की क्षमता। महाभारत के सभी पात्रों में से केवल अर्जुन ही एकमात्र ऐसे योद्धा थे, जो कि किसी भी चुनौती या परेशानी का सामना करने में समर्थ थे। अर्जुन के सामने चाहे जो भी परिस्थिति आई, उन्होंने अपने पराक्रम से उसका सामना बड़ी ही आसानी से किया।

    7. तेज

    अर्जुन अपने पराक्रम और बुद्धिमानी के साथ-साथ अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए भी प्रसिद्ध थे। उनके व्यक्तित्व में एक ऐसा तेज था, जिसे देखकर हर कोई उनसे आकर्षित हो जाता था। भगवान कृष्ण के अनुसार, जिनका तेज और प्रभाव अर्जुन के व्यक्तित्व में था, उतना और किसी में नहीं था और यही गुण अर्जुन को दुसरों से अलग और खास बनाता था।

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

Trending

Top
×