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वसंत पंचमी: कल ऐसे करें मां सरस्वती की खास पूजा

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 22 जनवरी, सोमवार को है।

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 20, 2018, 05:18 PM IST

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    माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व पर विशेष रूप से ज्ञान की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है। इस बार यह पर्व 22 जनवरी, सोमवार को है। इस पर्व को मनाने के पीछे कई धार्मिक किवंदतियां हैं, उनमें से एक इस प्रकार है-

    मान्यता के अनुसार, जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो विशेषकर मनुष्यों की रचना के बाद उन्हें लगा कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया हुआ है। तब उन्होंने एक चतुर्भुजी स्त्री की रचना की, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थीं। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया।
    जैसे ही देवी ने वीणा का मधुर नाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में जैसे चेतना आ गई। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। पुराणों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी पर तुम्हारी आराधना की जाएगी। वसंत पंचमी को मां सरस्वती का जन्मदिन माना जाता है। इसीलिए इस दिन उनकी आराधना की जाती है।

    सरस्वती को भगवती, शारदा, वीणावादिनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन किया गया है। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है।

    आगे पढ़ें पूरी पूजा विधि और आरती -

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    पूजन विधि

    वसंत पंचमी पर यदि विधि-विधान से देवी सरस्वती की पूजा की जाए तो विद्या व बुद्धि के साथ सफलता भी निश्चित मिलती है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा इस प्रकार करें-
    सुबह स्नान कर पवित्र आचरण, वाणी के संकल्प के साथ माता सरस्वती की पूजा करें। पूजा में गंध, अक्षत (चावल) के साथ खासतौर पर सफेद और पीले फूल, सफेद चंदन तथा सफेद वस्त्र देवी सरस्वती को चढ़ाएं। प्रसाद में पीले चावल, खीर, दूध, दही, मक्खन, सफेद तिल के लड्डू, घी, नारियल, शक्कर व मौसमी फल चढ़ाएं। इसके बाद माता सरस्वती से बुद्धि और कामयाबी की कामना कर, घी के दीप जलाकर आरती करें।

    मूल मंत्र से करें देवी सरस्वती की पूजा

    प्रत्येक देवी व देवताओं का एक मूल मंत्र होता है, जिससे उनका आवाहन किया जाता है। यह मंत्र विशेष रूप से देवी-देवताओं के आवाहन के लिए बने होते हैं। यह मंत्र विशेष सिद्ध होते हैं। वेदों के अनुसार, अष्टाक्षर मंत्र देवी सरस्वती का मूल मंत्र है- श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा।जब भी आप देवी सरस्वती की पूजा करें तथा भोग अर्पित करें तो इस मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। सरस्वती पूजन के समय निम्नलिखित श्लोकों से भगवती सरस्वती का ध्यान करें-
    सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
    कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
    वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
    रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
    सुपूजितां सुरगणैब्र्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।
    वन्दे भक्तया वन्दिता च मुनीन्द्रमनुमानवै:।
    (देवी भागवत 9/4/45-48)

    इस स्तुति से करें मां सरस्वती की उपासना

    जिन विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में नहीं लगता है, वे यदि मां सरस्वती का नित्य पूजन करें तो उन्हें अतिशीघ्र लाभ होता है। विद्यार्थी यदि नीचे लिखी स्तुति का पाठ मां सरस्वती के सामने करे तो उसकी स्मरण शक्ति बढ़ती है तथा सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

    सरस्वती स्तुति

    या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
    या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
    या ब्रह्माच्युतशंंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता,
    सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।1।।
    शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमाद्यां जगद्व्यापिनीं
    वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।
    हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
    वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।
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    देवी सरस्वती की आरती -

    जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
    सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता।। जय सरस्वती...।।
    चंद्रवदनि पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी।
    सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी।। जय सरस्वती...।।
    बाएँ कर में वीणा, दाएं कर माला।
    शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला।। जय सरस्वती...।।
    देवि शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
    पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया।। जय सरस्वती...।।
    विद्या ज्ञान प्रदायिनि ज्ञान प्रकाश भरो।
    मोह, अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो।। जय सरस्वती...।।
    धूप दीप फल मेवा, मां स्वीकार करो।
    ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो।।।। जय सरस्वती...।।
    मां सरस्वती जी की आरती, जो कोई नर गावे।
    हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे।। जय सरस्वती...।।
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