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अनसुना किस्सा: क्यों अपने ही भाई युधिष्ठिर का वध करना चाहते थे अर्जुन

अगर श्रीकृष्ण नहीं रोकते तो अर्जुन कर बैठते अपने ही बड़े भाई युधिष्ठिर का वध

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 22, 2018, 12:32 AM IST

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    महाभारत हिंदू धर्म के सबसे बड़े और महान ग्रंथों में से एक है। महाभारत में ऐसी अनेक कथाएं और प्रसंग है, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। इन्हें न तो कभी दिखाया गया और न ही बताया गया है। आज हम आपको महाभारत का एक ऐसा ही अनसुना प्रसंग बता रहे हैं।

    ये बात सभी जानते हैं कि अर्जुन अपने बड़े भाई युधिष्ठिर को बहुत ही मान- सम्मान देते थे। लेकिन यह बात बहुत कम जानते हैं कि एक बार अर्जुन ने युधिष्ठिर का वध करने के लिए तलवार उठा ली थी। तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युधिष्ठिर का वध करने से रोका था।

    विस्तार में जानिए श्रीकृष्ण, अर्जुन और युधिष्ठिर से जुड़ा ये रोचक किस्सा..

    कर्ण से पराजित हो गए थे युधिष्ठिर

    महाभारत के कर्ण पर्व के अनुसार, गुरु द्रोणाचार्य की मृत्यु के बाद कर्ण को कौरव सेना का सेनापति बनाया गया। सेनापति बनते ही कर्ण ने पांडवों की सेना में खलबली मचा दी। कर्ण द्वारा अपनी सेना का सफाया होते देख युधिष्ठिर को भी क्रोध आ गया और वे कौरवों की सेना का नाश करने लगे। तब दुर्योधन ने कर्ण को कहा कि वह युधिष्ठिर को बंदी बना ले।


    कर्ण और युधिष्ठिर के बीच भीषण युद्ध हुआ। कर्ण ने अपने तीखे बाणों से युधिष्ठिर को घायल कर दिया। युधिष्ठिर को घायल देख सारथी उन्हें युद्ध से दूर ले गया। कर्ण से पराजित होकर युधिष्ठिर को बड़ी लज्जा आ रही थी।

    घायल युधिष्ठिर को नकुल-सहदेव छावनी लेकर आए और उपचार करने लगे। कर्ण द्वारा युधिष्ठिर की पराजय के बारे में जब अर्जुन को पता लगा, तो उन्हें बहुत दु:ख हुआ और वे श्रीकृष्ण के साथ अपने बड़े भाई युधिष्ठिर को देखने उनकी छावनी में पहुंचे। अर्जुन और श्रीकृष्ण को एक साथ देखकर धर्मराज युधिष्ठिर ने समझा कि अर्जुन ने कर्ण का वध कर मेरी पराजय का बदला ले लिया है।


    यह सोचकर वे बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने अर्जुन को गले लगा लिया, लेकिन बाद में जब युधिष्ठिर का पता चला कि अर्जुन ने कर्ण का वध नहीं किया है तो उन्हें अर्जुन पर बहुत क्रोध आया और उन्होंने अर्जुन को खूब खरी-खोटी सुनाई। युधिष्ठिर ने अर्जुन को अपने शस्त्र दूसरे को देने के लिए कह दिया। यह सुनते ही अर्जुन को बहुत क्रोध आया और उन्होंने युधिष्ठिर को मारने के लिए तलवार उठा ली।

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    अर्जुन का क्रोध देखकर श्रीकृष्ण ने किया ये काम-

    अर्जुन ने जैसे ही युधिष्ठिर को मारने के लिए तलवार उठाई तो श्रीकृष्ण ने अर्जुन को रोक दिया। तब अर्जुन ने श्रीकृष्ण को बताया कि- मैंने गुप्त रूप से यह प्रतिज्ञा की थी कि जो कोई मुझसे ऐसा कहेगा कि तुम अपना गांडीव दूसरे को दे दो, मैं उसका सिर काट दूंगा। इसलिए मैं अपनी कसम के चलते धर्मराज का वध करने के लिए मजबूर हूँ। अर्जुन की बात सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने उसे धर्म-अधर्म का ज्ञान दिया।


    तब अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा कि कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरी प्रतिज्ञा भी पूरी हो जाए और मैं भाई की हत्या के अपराध से भी बच जाऊं। तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि सम्माननीय पुरुष जब तक सम्मान पाता है, तब तक ही उसका जीवित रहना माना जाता है। जिस दिन उसका बहुत बड़ा अपमान हो जाए, उस समय वह जीते-जी मरा समझा जाता है। तुमने सदा ही धर्मराज युधिष्ठिर का सम्मान किया है। आज तुम उनका थोड़ा अपमान कर दो।

    भगवान श्रीकृष्ण की बात सुनकर अर्जुन ने युधिष्ठिर को कटुवचन कहे, उनका बहुत अपमान किया। इस तरह अर्जुन की प्रतीज्ञा भी पूरी हो गई और वे अपने भाई का वध करने के पाप से भी बच गए।

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Web Title: Untold Story Of Mahabharat In Hindi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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