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बहुत ही खास लोगों को मिलते हैं ये 4 लाभ, जानें आपको मिलेंगे या नहीं?

सच बोलने से मिलती है लम्बी उम्र और कई फायदे, जानें क्या हैं वो

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 27, 2018, 05:00 PM IST

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    सच बोलना केवल मनुष्य की एक अच्छाई नहीं है बल्कि जीवन में बड़ी से बड़ी सफलता, मान-सम्मान सभी कुछ हासिल करने का एक आसान रास्ता भी है। जो मनुष्य हमेशा सच बोलता,सच का साथ देता है और गुस्से से दूर रहता है, वह कई सुख पाता है। जिस किसी भी मनुष्य में ये गुण होते हैं, महाभारत में उन्हें बेहद खास कहा गया है। महाभारत के अनुसार, ऐसे लोगों को 4 खास लाभ मिलते हैं।

    महाभारत के इस श्लोक से जाने सच बोलने और क्रोध न करने के कौन-कौन से फायदे हैं –

    श्लोक-

    सत्यावादी लभेतायुरनायासमथार्जवम्।
    अक्रोधधनोनसूयश्च निर्वृतिं लभते पराम्।।

    1. लम्बी आयु

    महाभारत में मनुष्य के कई गुणों के बारे में बताया गया है। जिसमें उसकी आयु बढ़ने और घटने के कारणों के बारे में भी बताया गया है। जो मनुष्य हमेशा सच बोलता है और किसी भी परिस्थिति में झूठ की तरफ आकर्षित नहीं होता, वह निश्चित ही ज्यादा समय तक जीता है। ऐसे मनुष्य को न तो किसी बात का भय होता है न ही लालच। उस पर हमेशा भगवान की कृपा बनी रहती है और वह उसे लम्बी आयु प्राप्त होती है।

    2. क्लेशरहित यानी सुखी जीवन

    कई ग्रंथों में कहा गया है कि सच, सुख और शांति का कारण बनता है और झूठ दुःखों और परेशानियों का। झूठ बोलने की आदत, बात-बात पर छल-कपट करने की आदत जीवन में दुःखों का कारण बनती है। जो मनुष्य हमेशा ही सच का साथ देता है, इसका जीवन सुख से भरा होता है। ऐसे मनुष्य के जीवन में परेशानियां और क्लेश के लिए कोई जगह नहीं होती।

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    3. सरलता

    जो मनुष्य झूठ नहीं बोलता, छल-कपट नहीं करता, जिसके मन में लालच-जलन जैसी भावनाएं नहीं होती वह सरल स्वभाव वाला होता है। सरल व्यक्ति अपनी सारी परेशानियों का हल बिना कोई छल किए आसानी से पा लेता है। ऐसा मनुष्य जीवन में सुख के साथ-साथ मान-सम्मान भी पाता है। इसलिए हर किसी को सच बोलने की आदत को अपनाना चाहिए।

    4. क्रोध न करने वाला हमेशा रहता है मन से शांत

    श्लोक की दूसरी लाइन में कहा गया है कि जो व्यक्ति क्रोध से दूर रहता है, वह बहुत ही भाग्यवान होता है। क्योंकि क्रोध एक जाल है, जिसमें फंसने के बाद मनुष्य को अपने-पराए, अच्छे-बुरे किसी का ख्याल नहीं रहता। क्रोध करने वाला मनुष्य अपने दोस्तों और रिश्तेदारों तक के लिए कई मुसीबतों का कारण बन सकता है और जो अपने गुस्से पर नियंत्रण करना जानता है, उसके जीवन में हमेशा शांति बनी रहती है। इसलिए हर किसी को गुस्से को त्याग कर शांति और संतुष्टि के भाव को अपनाना चाहिए।

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