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महाभारत के 4 रहस्य: क्यों विवाहित होने के बाद भी ब्रह्मचारी बन गए थे पांडु

जानें महाभारत की 4 अनजानी बातें

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 09, 2018, 05:00 PM IST

  • महाभारत के 4 रहस्य: क्यों विवाहित होने के बाद भी ब्रह्मचारी बन गए थे पांडु
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    महाभारत की कहानी तो ज्यादातर लोग जानते हैं, लेकिन इसकी सभी बातें हर किसी को नहीं पता है। महाभारत काल में कई ऐसी घटनाएं और कहानियां घटी थी, जिनके बारे में आज भी कम ही लोग जानते होंगे। महाभारत के किस्सों और कहानियों को लेकर लोगों में आज भी काफी रूची है, जिसके चलते वे इस ग्रंथ से जुड़ी हर जानकारी जानना चाहते हैं। इस स्टोरी में हम आपको महाभारत की कुछ ऐसी ही अनजानी बातों के बारे में बताएंगे।

    विवाहित होने के बाद भी क्यों पांडु को बनना पड़ा था ब्रह्मचारी-

    एक बार राजा पांडु जंगल में शिकार के लिए गए थे। वहीं उन्होंने एक हिरन और उसकी पत्नी को सहवास करते हुए देखा और शिकार के लिए पांच बाण उन पर चला दिए। जिससे वे घायल होकर धरती पर गिर पड़े और हिरन का रूप छोड़कर मनुष्य रूप में आ गए। घायल होने पर क्रोधित होकर वह ऋषि बोले- ‘मैं किन्दम नाम का तपस्वी हूं। मनुष्य रहकर यह काम करने में मुझे शर्म महसूस होने के कारण मैंने हिरन का रूप धारण किया था। तुमने एक ऋषि को बिना किसी अपराध के मारा है। इसलिए, मैं तुम्हे श्राप देता हूं यदि कभी तुम अपनी पत्नी के साथ सहवास करोगे तो उसी समय तुम्हारी भी मृत्यु हो जाएगी’। इसी श्राप की वजह से पांडु को विवाहित होने के बाद भी ब्रह्मचारी बनना पड़ा था।

    आगे जानें 3 ऐसे ही रहस्यों के बारे में...

    तस्वीरों का प्रयोग प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

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    अर्जुन के वार से युद्ध का मैदान छोड़कर चले गए थे भीष्म-

    महाभारत के विराटपर्व के अनुसार, पांडवों और द्रौपदी ने अपना अज्ञातवास विराट नगर में रह कर बिताया था। कौरवों को इस बात की शंका हो गई थी। इसलिए, उन्होंने विराट नगर पर हमला कर दिया। उस समय तक पांडव अपना अज्ञातवास पूरा कर चुके थे। विराट नगर में एक वर्ष बिताने की वजह से वहां की रक्षा करना पांडवों का धर्म था। विराट नगर में कौरवों और पांडवों के बीच भयंकर युद्ध हुआ। उस युद्ध में अर्जुन ने कर्ण, विकर्ण, अश्वत्थामा जैसे कई योद्धाओं को हरा दिया। अर्जुन का सामना पितामह भीष्म से हुआ। उनके बीच कई दिव्य अस्त्रों और शस्त्रों से युद्ध हुआ। अर्जुन ने अपने वार से भीष्म को घायल कर दिया और वे बेहोश होकर रथ में गिर पड़े। तब भीष्म की रक्षा करने के लिए उनका सारथी उन्हें युद्ध के मैदान से बाहर ले गया था।

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    महाभारत में केवल भीम ने किए थे भगवान हनुमान के दिव्य रूप के दर्शन-

    महाभारत के वनपर्व के अनुसार, एक बार वन में घूमते हुए द्रौपदी ने एक बहुत सुंदर कमल देखा। द्रौपदी ऐसा ही कमल युधिष्ठिर को भेंट करना चाहती थी। उसने भीम से ऐसे कई फूल लाने की विनती की। भीम कमल लाने के लिए सौगन्धिक वन की ओर जाने लगे। भीम के आने की बात जान कर भगवान हनुमान एक बीमार वानर का रूप धारण करके उनके के रास्ते में लेट गए। भीम ने उन्हें मार्ग से हटाने की कोशिश की। अपनी पूरी शक्ति लगाने पर भी वह उन्हें हटा नहीं सके। भीम द्वारा वानर का परिचय पूछने पर उन्होंने अपना नाम हनुमान बताया। अपने बड़े भाई से मिलकर भीम बहुत खुश हुए। वह भगवान हनुमान का वही दिव्य रूप दिखना चाहते थे, जिस रूप में उन्होंने समुद्र पास किया था। भीम के बार-बार कहने पर भगवान ने उसे अपने दिव्य रूप के दर्शन दिए थे। इस प्रकार महाभारत के सभी लोगों में से केवल भीम ने ही भगवान हनुमान के दिव्य रूप के दर्शन किए थे।

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    क्यों सुदर्शन चक्र से भीष्म का वध करना चाहते थे श्रीकृष्ण-

    महाभारत के भीष्म पर्व के अनुसार, कौरवों और पांडवों के युद्ध का तीसरा दिन चल रहा था। युद्ध में पांडवों की सेना का पराक्रम देखकर दुर्योधन ने भीष्म को शत्रु सेना का विनाश करने को कहा। दुर्योधन की बात सुनकर भीष्म बहुत क्रोधित हो गए। उन्होंने पांडवों की सेना का नाश करने की प्रतिज्ञा कर ली। भीष्म अपना महान पराक्रम दिखाते हुए शत्रु सेना पर प्रहार करने लगे। कोई भी योद्धा उनके आगे नहीं टिक पा रहा था। अर्जुन भी भीष्म का सामना नहीं कर पा रहे थे। यह देखकर श्रीकृष्ण को गुस्सा आ गया। वह भीष्म का वध करने के लिए हाथ में सुदर्शन चक्र लेकर भीष्म की ओर जाने लगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को ऐसा करने से रोका। श्रीकृष्ण को उनकी युद्ध में शस्त्र ना उठाने की प्रतिज्ञा याद दिलाई और स्वयं ही पूरी ईमानदारी से युद्ध करके विजयी होने का प्रण लिया।

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Web Title: Secrets Of Mahabharat In Hindi, Shocking Secrets From Mahabharata
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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