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शाम के वक्त ही शादी करना क्यों माना जाता है शुभ, जानिए इसकी वजह

हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण विवाह संस्कार को पूर्ण करने के लिए विशेष मुहूर्त और काल को चुना जाता है

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 24, 2018, 08:00 AM IST

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    हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण विवाह संस्कार को पूर्ण करने के लिए विशेष मुहूर्त और काल को चुना जाता है। विवाह संस्कार अगर शुभ मुहूर्त में हो तो जीवनभर सुख और समृद्धि रहती है। शुभ मुहूर्त में होने वाले इस संस्कार का असर निजी जीवन के साथ ही पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी होता है। जानिए विवाह संस्कार को पूर्ण करने के लिए शाम का ही समय क्यों चुना जाता है?

    गोधूलि बेला में हुए फेरे माने जाते हैं श्रेष्ठ

    विवाह में सबसे मुख्य रस्म होती है फेरों की। सात फेरे, सात वचनों के बिना हिंदू धर्म में शादी को पूरा नहीं माना जाता। धार्मिक और ज्योतिषिय ग्रंथों के अनुसार गोधूलि बेला में फेरे होना सबसे उत्तम माना जाता है। पं प्रफुल्ल भट्‌ट के अनुसार इस वक्त फेरे होने से शादी में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है।

    क्या होती है गोधूलि बेला?

    विवाह मुहूर्त में क्रूर ग्रह, युति, वेध, मृत्युवाण जैसे दोषों की शुद्धि होने पर भी यदि विवाह का शुद्ध लग्न न निकलता हो तो गोधूलि लग्न में विवाह संस्कार किया जा सकता है। मुहूर्तचिंतामणि ग्रंथ के विवाहविचाराध्याय में ये बात लिखी हुई है।

    जब सूर्यास्त न हुआ हो यानि सूर्यास्त होने वाला हो तब गायें अपने घर को लौट रही हों और उनके खुरों उड़कर धूल आकाश में छा रही हो तो उस समय को ज्योतिष मुहूर्तकारों ने गोधूलि काल कहा है।

    आचार्य नारद के अनुसार स्थानिय सूर्योदय से सप्तम लग्न गोधूलि लग्न कहलाता है। पीयूषधारा ग्रंथ के अनुसार सूर्य के आधे अस्त होने से 48 मिनट का समय गोधूलि कहलाता है।

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    संध्या काल को माना गया है श्रेष्ठ-


    संध्या काल को विवाह के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है। ये समय दिन और रात के बीच का होने से महत्वपूर्ण माना गया है। इस समय भगवान की पूजा करने का विधान है। ज्योतिषाचार्य पं प्रफुल्ल भट्‌ट के अनुसार इस समय लक्ष्मी जी की पूजा करने से घर में समृद्धि आती है लक्ष्मी पूजा के लिए इस समय को श्रेष्ठ माना गया है इसलिए इस समय गृहलक्ष्मी को लाने के लिए विवाह संस्कार किया जाता है।

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    शाम की शादी के पीछे हैं ये धार्मिक मान्यताएं -

    ऐसा कहा जाता है कि जिस तरह संध्या के वक्त होने वाला सूर्य और चंद्रमा का मिलन अमर है। उसी तरह इस वक्त अगर दूल्हा-दुल्हन की शादी कराई जाए तो वो भी अमर हो जाती है। ऐसी मान्यता है कि अगर संध्या काल में फेरे हो जाएँ तो वो जोड़ा हमेशा साथ-साथ रहता है। उनकी ज़िदंगी में खुशियां और प्यार की कभी कमी नहीं होती है।

    सामन्य वजह ये भी है -

    पूरे दिन में शाम के वक्त का मौसम सबसे अधिक खुशनुमा होता है। इसलिए शाम के वक्त शादी होती है। सभी कामों से फ्री होकर लोग,शादी-विवाह के कार्यक्रमों में शाम के वक्त अधिक समय दे पाते हैं।

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