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सिर्फ एक कौरव ने किया था द्रौपदी के चिरहरण का विरोध, जानें रोचक किस्सा

पांडवों ने ही नहीं, एक कौरव ने भी किया था सभा में द्रौपदी के अपमान का विरोध

यूटीनिटी डेस्क | Last Modified - Dec 20, 2017, 05:00 PM IST

    • महाभारत के सभापर्व के अनुसार, युधिष्ठिर ने जूए में अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया था। जिसमें उसकी पत्नी द्रौपदी भी शामिल थी। द्रौपदी पर जीत हासिक करने के बाद कौरव भरी सभा में उसका अपमान करना चाहते हैं, जिसका विरोध पांडवों के अलावा और कोई नहीं कर रहा था। ऐसे में सिर्फ एक कौरव ने इसके विरुद्ध आवाज उठाई थी। जानिए कौन था वो एक कौरव...

      महाभारत के सभापर्व के अनुसार, युधिष्ठिर ने जूए में अपना सब कुछ दाव पर लगा दिया था। धन-संपत्ति के साथ-साथ वह अपने परिवार और अपनी पत्नी द्रौपदी तक को जूए में हार गया था। जिससे द्रौपदी पर दुर्योधन का अधिकार हो गया। भरी सभा में द्रौपदी का अपमान किया गया, लेकिन भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणार्चाय किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया। धृतराष्ट्र और गांधारी के सभी पुत्र अधर्मी और पापी थे। लेकिन विकर्ण नाम का एक कौरव धर्म को जानता था। उसने भरी सभा में हो रहे द्रौपदी के अपमान का विरोध किया। वह बार-बार दुर्योधन, दुःशासन सहित सभी कौरवों को यह अधर्म करने से रोक रहा था, परंतु किसी ने उसकी बात नहीं मानी। आगे चलकर यहीं अपमान कौरवों के विनाश का कारण बना।

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