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चेहरे की चमक बढ़ाती है ये अमृत जैसी ताकतवर चीज, इसे पीते थे महाभारत के योद्धा

आपस्तम्ब धर्म सूत्र, वराह पुराण और अन्य स्मृतिग्रंथों में अमृत समान पवित्र और चेहरे का तेज बढ़ाने वाले दिव्य पेय के बारे

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 05, 2018, 05:59 PM IST

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    आपस्तम्ब धर्म सूत्र, वराह पुराण और अन्य स्मृतिग्रंथों में अमृत समान पवित्र और चेहरे का तेज बढ़ाने वाले दिव्य पेय के बारे में बताया गया है। जिसे देवी-देवता और ऋषि-मुनि पीते थे। इसके बनाने के लिए गूलर की लकड़ी से बने बर्तन का उपयोग किया जाता था। भगवान को प्रिय इस दिव्य द्रव्य को बनाने में शहद, घी और दही का उपयोग किया जाता था। आजकल कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि शहद के साथ घी का उपयोग नहीं करना चाहिए लेकिन गूलर की लकड़ी से बने बर्तन में इसका उपयोग करने से नुकसान नहीं होता था।

    इसे खाने से चेहरे को तेज बढ़ता था जिसे हम डिवाइन ग्लो भी कहते हैं। इस ताकतवर चीज से पेट संबंधी बीमारियां दूर होती हैं। इसमें मौजुद देशी घी से शरीर को विटामिन ए, डी और कैल्शियम, फॉस्फोरस, मिनरल्स, पोटैशियम जैसे कई पोषक तत्व मिलते हैं। शहद अपने आप में एक एंटीऑक्सीडेंट है। गुलर की लकड़ी के बर्तन में इसे बनाने से इसकी ताकत और ज्यादा बढ़ जाती है। महाभारत के ताकतवर योद्धा भी इसे पीते थे। इसे मधुपर्क कहा जाता है।


    ये चीज है भगवान को बहुत प्रिय -
    वैसे तो भगवान को बहुत सी चीजों का भोग लगाया जाता है, लेकिन मधुपर्क का भोग भगवान को लगाने से मनुष्य की हर इच्छा पूरी हो सकती है। इसका वर्णन वराहपुराण में भी मिलता है। इस ग्रंथ में भगवान वराह ने इसके संबंध में विस्तार पूर्वक बताया है। उनके अनुसार इस अमृत समान दिव्य पेय का भोग भगवान को लगाया जाए तो भगवान जल्दी ही प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।


    ऐसे बनता है मधुपर्क -
    वराह पुराण के अनुसार गूलर की लकड़ी से बने बर्तन में घी, दही और शहद समान मात्रा में लेकर मधुपर्क बनाना चाहिए। शहद न हो तो गुड़ मिलाया जा सकता है। घी के स्थान पर धान के लावे का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मनु स्मृति, आपस्तम्ब धर्मसूत्र आदि ग्रंथों में दही, शहद, पानी, गुड़ व घी से बने मधुपर्क के बारे में भी जानकारी मिलती है।


    ऐसे अर्पित करें भगवान को मधुपर्क -
    वराहपुराण के अनुसार, मधुपर्क हाथ में लेकर यह कहना चाहिए- ऊंकारस्वरूप भगवान। यह मधुपर्क आपको समर्पित है, आप इसे स्वीकार करने की कृपा करें। भक्तिपूर्वक मैंने इसे आपको समर्पित किया है। आपको मेरा बार-बार नमस्कार है। इस तरह भगवान को मधुपर्क अर्पित करने से व्यक्ति की हर समस्या का निदान हो जाता है और उसकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

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