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चाणक्य नीति: ऐसी अवस्था में पुरुष के लिए जहर समान हो जाती है सुंदर स्त्री

चाणक्य नीति: किस अवस्था में कौन-सी वस्तु हो जाती है विष समान

जीवन मंत्र डेस्क | Last Modified - Dec 13, 2017, 01:17 PM IST

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    आचार्य चाणक्य एक महान नीतिकार थे। उन्होंने ऐसी कई नीतियां बताई है, जो मनुष्य के लिए बहुत ही काम की साबित होती है। आज हम आपको आचार्य चाणक्य की एक ऐसी ही नीति के बारे में बताएंगे। चाणक्य ने अपने एक श्लोक में बताया है कि कौन-सी वस्तु किस अवस्था में जहर के समान बन जाती है।

    चाणक्य कहते हैं-

    अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे भोजनं विषम्।

    दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृद्धस्य तरुणी विषम्।।

    1. वृद्ध पुरुष के लिए नव यौवन विष समान होता है। अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए पति-पत्नी का एक-दूसरे से मानसिक और शारीरिक रूप से संतुष्ट होना आवश्यक है। अगर वृद्ध का विवाह जवान स्त्री से हो जाएं और वे एक-दूसरे से संतुष्ट न हो तो पत्नी पथ भष्ट हो सकती है। जिसके कारण पति को समाज में अपमान का सामना करना पड़ता है।

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    2. किसी व्यक्ति के लिए अभ्यास के बिना शास्त्रों का ज्ञान जहर के समान होता है। जो व्यक्ति शास्त्रों का बिना अभ्यास किए स्वयं को शास्त्रों का ज्ञाता बताता है, उसे भविष्य में सामाज के सामने अपमान का सामना करना पड़ता है।

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    3. जिस व्यक्ति का पेट खराब होता है, उसके लिए भोजन विष के समान होता है। जिसका पेट खराब हो, उसके सामने रखे छप्पन भोग भी विष के समान ही प्रतीत होते हैं। ऐसे में जब तक व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ न हो जाए उसे स्वादिष्ट भोजन से दूर ही रहना चाहिए।

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    4. किसी गरीब व्यक्ति के लिए कोई समारोह जहर के समान माना जाता है। किसी भी समारोह में हर कोई अच्छे कपड़े पहनकर जाता है ऐसे में गरीब व्यक्ति का जाना उसे अपमान का अहसास दिलाता है। इसलिए स्वाभिमानी गरीब व्यक्ति के लिए समारोह में जाना विषपान के समान होता है।

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Web Title: Chanakya Niti In Hindi, Quotes Of Chanakya
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