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ब्रह्मा-विष्णु-महेश की पूजा भी चली जाती है बेकार, अगर न किया जाएं ये 1 काम

अगर नहीं किया ये एक काम को ब्रह्मा और शिव की भक्ति भी हो जाएगी बेकार

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Dec 29, 2017, 05:00 PM IST

    • कई धर्म ग्रंथों में गुरु के महत्व और उनसे जुड़ी कुछ खास बातों का वर्णन मिलता है। जो भी मनुष्य उन बातों का ध्यान रखता है और उनका पालन करता है, वह जीवन में हर सफलता बड़ी ही आसानी से हासिल कर सकता है। आज हम आपको बताएंगे अलग-अलग ग्रंथों में लिखी गुरु से जुड़ी कुछ खास बातें...

      1. रामचरितमानस के अनुसार,

      गुरु बिनु भवनिधि तरइ न कोई।

      जो बिरंचि संकर सम होई।।

      अर्थ-

      इस संसाग रूपी सागर को कोई भी बिना गुरु के रास्ता बताए अपने आप पार नहीं कर सकता। चाहे कोई मनुष्य संसार के रचनाकार ब्रह्मा या संहारक भगवान शिव की भी कितनी ही भक्ति क्यों न कर लें बिना गुरु के सफलता नहीं पा सकता।

      2. श्रीमद्भागवद् गीता के अनुसार,

      देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जनम्।

      ब्रह्मचर्यमहिंसा च शरीरं तप उच्यते।।

      अर्थ-

      देव, ब्रह्मण, गुरु और विद्वान की पूजा, पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अंहिसा ही सबसे बड़ा तप होता है। जो इंसान मनुष्य को ज्ञान का मार्ग दिखाए और उसे ब्रह्म की ओर लेकर जाए वहीं सच्चा गुरु कहलाता है।

      3. वाल्मीकि रामायण के अनुसार,

      स्वार्गा धनं वा धान्य वा विद्या पुत्रा: सुखानि च।

      गुरु वृत्तयनुरोधेन न किंचिदपि दुर्लभम्।।

      अर्थ-

      गुरुजनों की सेवा करसे धन-संपति, विद्या, पुत्र, सुख और स्वर्ग आदि सभी कुछ आसानी से पाया जा सकता है। गुरु की कृपा से और उनके बताए गए मार्ग पर चलकर कुछ भी पाना असंभव नहीं।

      4. भगवान शिव देवी पार्वती से कहते हैं-

      गुरु भक्ति विहीनस्य तपो विद्या व्रंत कुलम् ।

      निष्फल हि महेशानि, केवल लो द रंजनं।।

      अर्थ-

      भगवान शिव कहते हैं कि कोई भी मनुष्य बहुत बड़ा तपस्वी, विद्वान, संपन्न ही क्यों न हो, लेकिन अगर वह गुरु का सम्मान न करता हो तो ये सारी चीजें भी व्यर्थ है। बिना गुरु सेवा के ये सारी चीजें कोई स्थाई फल प्रदान नहीं करती।

      5. आपस्तम्ब गृह्मसूत्र के अनुसार-

      स हि विद्या: तं जनयति श्रेष्ठं जन्म।

      माता पितरौ तु शरीरमेव जनयत: ।।

      अर्थ-

      माता- पिता शरीर को जन्म अवश्य देते हैं , लेकिन किसी भी व्यक्ति की असली जन्मदाता गुरु होता है। गुरु से ज्ञान पाकर ही मनुष्य जो कुछ भी गुण सिखता है, उसी को मनुष्य का श्रेष्ठ जन्म माना जाता है।

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    Web Title: Importance Of Guru In Indian Culture
    (News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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