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भीष्म पितामह ने बताई थी स्त्रियों से जुड़ी ये गुप्त बातें

महाभारत में जब भीष्म पितामह मृत्यु की शैया पर लेटे थे। तब उन्होंने महिलाओं के बारे में कुछ खास बातें बताई थी।

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 23, 2018, 05:00 PM IST

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    महाभारत में जब भीष्म पितामह मृत्यु की शैया पर लेटे थे। तब उन्होंने महिलाओं के बारे में कुछ खास बातें बताई थी। जो हर पुरुष को जानना चाहिए। भीष्म पितामह ने स्त्री के सुख से जुड़ी जो महत्वपूर्ण बातें बताई थीं वो भीष्माष्टमी ( 25 जनवरी, गुरुवार ) पर हम आपको बता रहे हैं। जानिए वो खास बातें जो भीष्म पितामह ने स्त्रियों को ध्यान में रखकर कही थी।

    सनातन काल से जब-जब किसी ने स्त्री का अपमान किया है, उसका निश्चित ही विनाश हुआ है। जब द्रौपदी का चीरहरण हुआ तो सभा में मौजूद सभी लोग उनका अपमान होते हुए देखते रहे लेकिन किसी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। तब द्रौपदी ने क्रोधित होकर कौरवों को श्राप दिया और आखिर में कौरवों का अंत हो गया। इसलिए प्राचीन काल से महिलाओं का सम्मान करने के लिए कहा गया है।

    अंतिम समय में भीष्म ने युधिष्ठिर को अपने पास बुलाया और जीवन-नीति से जुड़ी कुछ बातें बताई। उन्होंने युधिष्ठिर को महिलाओं से जुड़े कुछ रहस्य भी बताए जो एक उत्तम पुरुष को जानना चाहिए।

    आगे पढ़ें स्त्रियों की वो गुप्त बातें जो भीष्म पितामह ने बताई थी -

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    स्त्री का सुख -

    भीष्म पितामह ने बताया कि, स्त्री का पहला सुख उसका सम्मान ही है। उसी घर में लक्ष्मी का वास रहता है, जहां स्त्री प्रसन्न रहती है। जिस घर में स्त्री का सम्मान न हो और उसे कई प्रकार के दुःख दिए जाते हो, उस घर से लक्ष्मी सहित अन्य देवी-देवता भी चले जाते हैं।

    बेटी और बहू का सम्मान-

    भीष्म ने बताया कि, जिस परिवार में बेटी और बहू का सम्मान नहीं होता है। उसे दुःख दिए जाते हैं। वो परिवार कभी दुःख से पार नहीं पा सकता। उस घर में रहने वाले लोगों का पतन धीरे-धीरे हो जाता है।

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    माँ का अपमान -

    जिस घर में माता का अपमान होता है वहां लक्ष्मी का निवास नहीं रहता। उस घर की कुलदेवी और कुल के भैरव सहित पितृ भी नाराज हो जाते हैं। ऐसे घर में रहने वाले लोगों के साथ उस घर में जाने वालों का भी पतन हो जाता है। ऐसे लोग महापापी होते हैं।

    स्त्रियों का श्राप -

    भीष्म ने बताया कि, मनुष्य को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जो उसे स्त्रियों से श्राप मिले। ऐसी चीजों से बचकर रहना चाहिए। दुखी स्त्री के ह्द्य से निकला श्राप हजारों पुण्य को तुरंत भस्म कर देता है। उस घर का और पूरे कुल का नाश होने लगता है। स्त्री के एक श्राप को आने वाली पीढ़ियां भी भोगती है। पितामह ने कहा कि बालिकाओं, असहाय, प्यासे, भूखे, गर्भवती महिलाओं, तपस्वी और मरणासन्न यानी जिसकी स्थिति मरने जैसी हो ऐसे लोगों को नहीं सताना चाहिए। यदि कोई ऐसा करता है तो उसका अंत निश्चित है।

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