Home » Jeevan Mantra »Jeene Ki Rah »Chankaya Neeti » Chanakya Niti, Chanakya Niti In Hindi For Success, Chanakya Neeti,

चाणक्य नीति: किसी भी पुरुष के लिए ये तीन स्थितियां हैं दुर्भाग्य की बात

यहां जानिए चाणक्य की कुछ ऐसी नीतियां, जिन्हें ध्यान रखने पर हर काम में सफलता मिल सकती है।

जीवन मंत्र डेस्क | Last Modified - Nov 16, 2017, 12:02 PM IST

  • चाणक्य नीति: किसी भी पुरुष के लिए ये तीन स्थितियां हैं दुर्भाग्य की बात

    भाग्य और अभाग्य की बात अक्सर होती रहती है। भाग्य यानी सुख-समृद्धि और श्रेष्ठ जीवन। अभाग्य यानी दुख और परेशानियों से भरा जीवन। किसी व्यक्ति को भाग्य का साथ मिल रहा है या नहीं ये परिस्थितियों को देखकर भलीभांति समझा जा सकता है। आचार्य चाणक्य ने तीन परिस्थितियां ऐसी बताई हैं जो किसी भी पुरुष के दुर्भाग्य की ओर इशारा करती हैं। यहां जानिए ये तीन परिस्थितियां कौन-कौन सी हैं...

    आचार्य कहते हैं कि-

    वृद्धकाले मृता भार्या बन्धुहस्ते गतं धनम्।

    भोजनं च पराधीनं त्रय: पुंसां विडम्बना:।।

    इस श्लोक का अर्थ यह है कि यदि किसी वृद्ध पुरुष की पत्नी मृत्यु को प्राप्त हो जाती है तो उस पुरुष के लिए यह दुर्भाग्य की बात है। यदि यौवनावस्था में जीवन साथी का साथ छुटता है तो पुरुष दूसरा विवाह भी कर सकता है, लेकिन बुढ़ापे यह सभी के लिए संभव नहीं हो पाता है। वृद्धावस्था में पति और पत्नी दोनों के लिए जीवन साथी का साथ बहुत महत्वपूर्ण होता है, उस समय का अकेलापन निराशाजनक और मानसिक तनाव बढ़ाने वाला होता है।

    शत्रु के हाथ में गया हुआ धन

    आचार्य कहते हैं कि यदि किसी पुरुष का धन किसी शत्रु या बुरे स्वभाव वाले भाई के हाथों में चले जाए तो यह दुर्भाग्य की बात है। व्यक्ति का खुद का कमाया हुआ धन शत्रु के हाथ में चले जाएगा तो दोहरी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पहली बात तो ये कि धन हानि के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा और दूसरी बात ये कि शत्रु के हाथ में गए हुए धन का उपयोग हमारे विरुद्ध ही किया जा सकता है।

    पराए घर में रहना या गुलाम रहते हुए जीवन यापन करना

    किसी भी पुरुष के लिए यह दुर्भाग्य की बात है कि उसे पराए घर में रहना पड़े। पराए घर में रहते हुए व्यक्ति को खुद की इच्छा से कोई भी काम करने के लिए दूसरों की अनुमति का इंतजार करना पड़ता है। गुलाम या पराए घर में रहने वाले पुरुष की स्वतंत्रता पूरी तरह छीन जाती है। गुलामी का जीवन भयंकर कष्ट देता है। ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति तन और मन से दुखी रहता है।
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

Trending

Top
×