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ये हैं दुर्भाग्य की निशानियां, बार-बार होना पड़ता है अपमानित

अगर आप जीवन में सफल होना चाहते हैं तो चाणक्य नीति का पालन करने से लाभ मिल सकता है।

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 17, 2018, 05:00 PM IST

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    आचार्य चाणक्य ने एक नीति में दुर्भाग्य की निशानियां बताई हैं। जब ये बातें किसी के साथ होती हैं तो उसके जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।


    चाणक्य नीति में लिखा है कि-
    कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम्।
    कष्टात् कष्टतरं चैव परगेहे निवासनम्।।
    1.
    चाणक्य के अनुसार किसी भी व्यक्ति के लिए सबसे बड़े दुर्भाग्य की बात है मूर्ख या अज्ञानी होना। यदि कोई व्यक्ति मूर्ख है तो वह जीवन में कभी भी सुख प्राप्त नहीं कर सकता। उसे जीवन में हर कदम दुख और अपमान ही झेलना पड़ता है।
    2.दुर्भाग्य की दूसरी बात है पराए घर में रहना। यदि कोई व्यक्ति किसी पराए घर में रहता है तो उसके जीवन में कई प्रकार की मुश्किलें सदैव बनी रहती हैं। स्वतंत्रता खत्म हो जाती है। अत: हमें पराए घर में रहने से बचना चाहिए।
    3.दुर्भाग्य की तीसरी बात है जवानी में धैर्य न होना। धैर्य के बिना जवानी भी दुखदायी हो सकती है, क्योंकि जवानी में बहुत ज्यादा जोश और क्रोध होता है। यदि जोश और क्रोध के साथ धैर्य न हो तो सब कुछ बर्बाद हो सकता है।
    कौन थे आचार्य चाणक्य
    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों से एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को अखंड भारत का सम्राट बनाया था। चाणक्य तक्षशिला में अर्थशास्त्र के आचार्य थे, उनकी राजनीति में भी गहरी पकड़ थी। आचार्य ने चाणक्य नीति नामक ग्रंथ की रचना की थी। इस ग्रंथ में जीवन में सुख रहने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सूत्र बताए गए हैं। जो व्यक्ति इन सूत्रों को अपना लेता है, वह अपने निर्धारित लक्ष्य तक पहुंच जाता है।
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