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अगर आप शादीशुदा हैं तो ध्यान रखें ये एक बात, वरना बर्बाद हो सकता है सबकुछ

वैवाहिक जीवन को सुखी बनाए रखने के लिए श्रीरामचरित मानस में कई सूत्र बताए गए हैं।

यूटीलिटी डेस्क | Last Modified - Jan 24, 2018, 05:00 PM IST

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    जब पति-पत्नी का एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते हैं तो वैवाहिक जीवन में अशांति होना तय है। भरोसा न हो तो वाद-विवाद होते रहते हैं, इसका बुरा असर दूसरे कामों पर भी होता है। इसीलिए पति-पत्नी को प्रयास करना चाहिए कि उनके बीच अविश्वास जैसी स्थिति न बने। अविश्वास होगा तो वैवाहिक रिश्ता टूट भी सकता है। इस बात को समझने के लिए श्रीरामचरित मानस में शिव-सती का एक प्रसंग बताया गया है।
    जब सती ने नहीं किया शिवजी के बात पर विश्वास
    श्रीरामचरित मानस के बालकांड में शिव और सती का एक प्रसंग है। शिव और सती, अगस्त ऋषि के आश्रम में रामकथा सुनने गए। सती को यह थोड़ा अजीब लगा कि श्रीराम शिव के आराध्य देव हैं। सती का ध्यान कथा में नहीं रहा और पूरा समय सोचने में बिता दिया कि शिव जो तीनों लोकों के स्वामी हैं, वे श्रीराम की कथा सुनने के लिए आए हैं।
    कथा समाप्त हुई और शिव-सती लौटने लगे। उस समय रावण ने सीता का हरण किया था और श्रीराम, सीता के वियोग में दु:खी थे, जंगलों में घूम रहे थे।
    सती को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि शिव जिसे अपना आराध्य देव कहते हैं, वह एक स्त्री के वियोग में साधारण इंसान की तरह रो रहा है। सती ने शिवजी के सामने ये बात कही तो शिव ने समझाया कि यह सब श्रीराम की लीला है। भ्रम में मत पड़ो, लेकिन सती नहीं मानी और शिवजी की बात पर विश्वास नहीं किया।

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    सती ने श्रीराम की परीक्षा लेने की बात कही तो शिवजी ने रोका, लेकिन सती पर शिवजी की बात का कोई असर नहीं हुआ। सती सीता का रूप धारण करके श्रीराम के सामने पहुंच गईं।
    श्रीराम ने सीता के रूप में सती को पहचान लिया और पूछा कि हे माता, आप अकेली इस घने जंगल में क्या कर रही हैं? शिवजी कहां हैं?
    जब श्रीराम ने सती को पहचान लिया तो वे डर गईं और चुपचाप शिव के पास लौट आईं। शिव ने पूछा तो वे कुछ जवाब ना दे सकीं, लेकिन शिव ने सब समझ लिया था कि सती ने सीता का रूप बनाया था। जिन श्रीराम को वे अपना आराध्य देव मानते हैं, उनकी पत्नी का रूप सती ने बना लिया था और श्रीराम की परीक्षा लेकर उनका अनादर भी किया था। इस कारण शिवजी ने मन ही मन सती का त्याग कर दिया।
    सती भी ये बात समझ गईं और दक्ष के यज्ञ में जाकर आत्मदाह कर लिया।

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    ये प्रसंग बताता है कि पति-पत्नी में अगर थोड़ा भी अविश्वास हो तो रिश्ता खत्म होने की कगार पर भी पहुंच जाता है। कई बार पत्नियां पति की और पति पत्नी की बात पर विश्वास नहीं करते। इसका नतीजा यह होता है कि रिश्ते में बिखराव आ जाता है।
    गृहस्थी को सुख से चलाना है तो पति-पत्नी को एक-दूसरे की आस्था और निष्ठा पर भरोसा करना चाहिए। अविश्वास तनाव पैदा करता है, तनाव से दूरी बढ़ती है। अपने रिश्तों को टूटने से बचाना है तो एक-दूसरे पर भरोसा करें।

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