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मृत्यु के देवता यमराज हैं शनि के भाई, जानिए शनिदेव से जुड़ीं ये रोचक बातें

जानिए शनिदेव से जुड़ीं कुछ खास व रोचक बातें, जिनसे कई लोग अनजान हैं।

धर्म डेस्क | Last Modified - Jul 12, 2018, 03:40 PM IST

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    उज्जैन।हिन्दू धर्म के पौराणिक प्रसंगों पर गौर करें तो शनिदेव का चरित्र मात्र क्रूर या पीड़ादायी ही नहीं, बल्कि मुकद्दर संवारने वाले देवता के रूप भी प्रकट होता है। यही नहीं, शास्त्रों में बताए शनिदेव के परिवार के अन्य सदस्य भी हमारे सुख-दु:ख को नियत करते हैं। शास्त्रों में हिन्दू देव पूजा परंपराओं में जहां शनिवार, शनि भक्ति का शुभ दिन बताया गया है, वहीं पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक शनिदेव का जन्म अमावस्या तिथि पर हुआ था।

    हिन्दू पंचांग के हर माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि भी इसी वजह से शनि भक्ति बड़ी ही संकटमोचक होती है। खासतौर पर उन लोगों के लिए, जो शनि ढैय्या, साढ़े साती, महादशा या कुण्डली में बने शनि के बुरे असर दु:ख, दारिद्र, कष्ट, संताप, संकट से जूझ रहे हों, शनिवार व अमावस्या शनि दोष शांति के लिए मंगलकारी सिद्ध होते हैं।

    शिव या उनके अंशों जैसे हनुमानजी, भैरव या गणेशजी की भक्ति भी शनिदेव को न केवल प्रसन्न करती हैं, बल्कि शनि के अशुभ प्रभाव भी दूर कर देती है। आज शनिवार के शनि भक्ति के शुभ काल में जानिए, शनि चरित्र और उनके कुटुंब से जुड़ीं ऐसी ही हिन्दू धर्मशास्त्र व पुराणों में उजागर कुछ खास बातें, जिसकी जानकारी कई धर्मावलंबियों को भी नहीं है -
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    - शनिदेव के पिता प्रत्यक्ष देवता सूर्यदेव और माता छाया हैं।
    - शनि के भाई-बहन यमराज, यमुना और भद्रा है। शनि के छोटे भाई यमराज मृत्युदेव, यमुना नदी को पवित्र व पापनाशिनी और भद्रा क्रूर स्वभाव की होकर विशेष काल और अवसरों पर अशुभ फल देने वाली बताई गई है।
    - शनि का रंग नीली आभा से भरा कृष्ण या श्याम वर्ण सरल शब्दों में काला माना गया है।
    - शनि के मंगलकारी स्वरूप व देव शक्तियों से संबंध इस पौराणिक शनि ध्यान मंत्र में भी उजागर होता है -

    नीलाञ्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
    छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

    अगली स्लाइड्स पर जानिए शनिदेव के बारे में कुछ ओर खास बातें -
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    - शनि का जन्म क्षेत्र - सौराष्ट क्षेत्र में शिंगणापुर माना गया है।

    - शनि ने शिव को अपना गुरु बनाया और घोर तप द्वारा शिव को प्रसन्न कर न्यायाधीश होने की शक्तियां पाईं।
    - शनि का स्वभाव क्रूर, किंतु गंभीर, तपस्वी, महात्यागी बताया गया है।
    - शनिदेव विलक्षण स्वरूप व शक्तियों की वजह से कोणस्थ, पिप्पलाश्रय, सौरि, शनैश्चर, कृष्ण, रौद्रान्तक, मंद, पिंगल व बभ्रु नामों से भी जाने जाते हैं।
    - शनि के जिन ग्रहों और देवताओं से मित्रता है, उनमें श्रीहनुमान, भैरवनाथ, बुध और राहु प्रमुख है।
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    - शनि को भू-लोक का दण्डाधिकारी व रात का स्वामी भी माना गया है।
    - शनि का शुभ प्रभाव अध्यात्म, राजनीति और कानून संबंधी विषयों में दक्ष बनाता है।
    - शनि की प्रसन्नता के लिए काले रंग की वस्तुएं जैसे काला कपड़ा, तिल, उड़द, लोहे का दान या चढ़ावा शुभ होता है। वहीं गुड़, खट्टे पदार्थ या तेल भी शनि को प्रसन्न करता है।
    - शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है। शनि को अनुकूल करने के लिये नीलम रत्न धारण करना प्रभावी माना गया है।
    - शनि के बुरे प्रभाव से डायबिटिज, गुर्दा रोग, त्वचा रोग, मानसिक रोग, कैंसर और वात रोग होते हैं। जिनसे राहत का उपाय शनि की वस्तुओं का दान है।
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