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महाशिवरात्रिः क्या है शिव के अघोर होने का मतलब, कौन सी 2 बातें पसंद हैं शिव को, कैसे करें सरल तरीके से पूजा

यूटिलिटी डेस्क | Last Modified - Feb 12, 2018, 05:00 PM IST

शिव को संन्यासी, अघोरी, औघड़ कई नामों से जाना जाता है। औघड़ शब्द अघोरी से ही निकला है।
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    महाशिवरात्रि का पर्व 13 और 14 फरवरी को मनाया जाएगा। सालों बाद ऐसा संयोग बना है कि दो दिन शिव की भक्ति का महापर्व मनेगा। ये पंचांग भेद के कारण है, कहीं 13 तो कहीं 14 फरवरी को मनेगी। शिव को पशुपतिनाथ भी कहा जाता है, ऐसा इसलिए कि वो सृष्टि के सारे जीवों के स्वामी हैं। शिव को संन्यासी, अघोरी, औघड़ कई नामों से जाना जाता है। औघड़ शब्द अघोरी से ही निकला है। शिव शमशानवासी माने गए हैं। मृत्यु के देवता हैं। शिव को अघोर क्यों कहा जाता है इसका बहुत गहरा अर्थ है।

    शास्त्रों में शिव को तंत्र का देवता भी कहा है। वे पराविद्या के पहले साधक और स्वामी है। सारी पराविद्याएं उनमें समाहित हैं। जानिए शिव को अघोर क्यों कहा जाता है। अघोर का अर्थ क्या है….

    शिव अघोर हैं...इसका मतलब क्या है?

    अघोर का अर्थ हम लगाते हैं डरावनी चीजों से। हाथ में नर कपाल लिए किसी तांत्रिक की छवि सामने आती है। लेकिन, शिव अघोर हैं। घोर का अर्थ होता है, डरावना या बहुत भयंकर। शिव सहज हैं, शमशान में भी रह लेते हैं, शिवालय में भी। कैलाश पर भी वास है, काशी भी धाम। सब जगह समान। शिव को पंचमेवा भी प्रिय हैं, घतुरे के कांटेदार फल भी। दोनों के स्वाद, तासीर और रंग-रुप में विपरीत गुण हैं लेकिन दोनों को समान भाव से स्वीकार करते हैं। शिव घोर नहीं है, सहज हैं, इसलिए अघोर हैं। वैराग्य की साक्षात मूर्ति हैं। किसी से मोह नहीं, हर माया से परे, हर भेद से परे, हर बंधन से अलग जो है, वो ही अघोर है। शिव आदि अघोर हैं।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें...कौन सी दो बातें हैं शिव को पसंद...

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    शिव को प्रसन्न करने के लिए ये दो बातें अपने जीवन में उतारें

    प्रकृति के निकट जाएंः- कोशिश करें दो-चार दिन प्रकृति के निकट बीतें। कम से कम एक पौधा लगाएं। शिव को प्रकृति के देवता हैं। एक पौधा लगाना, शिव के जलाभिषेक से कम नहीं है। पौधा लगाकर उसको पेड़ बनने तक सेवा करें।

    मदद करना सीखेंः - अगर कोई आपसे मदद मांग रहा है तो छोटा है या बड़ा, अमीर या गरीब, इन सब का विचार किए बिना मदद करें। सबके लिए समान भाव रखें। शिव समान भाव रखने वाले हैं। वे भेद बुद्धि से परे हैं। ना खुद किसी में भेद करते हैं, ना किसी ऐसे इंसान को पसंद करते हैं जो भेदभाव करता हो। अपना नजरिया बदलें। हर वर्ग के लिए समान भाव लाएं। जो अपने-पराए का भेद जानता है, वो शिव से दूर है।

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    महाशिवरात्रि पर ऐसे हो पूजा

    महाशिवरात्रि पर पूजा करने के कई विधान हैं। लोग तरह-तरह से शिव की आराधना करते हैं। अगर आपके पास ये सब नियम, व्रत, उपवास का समय ना भी हो तो अपनी ये 5 काम कर लें। संभव हो तो हर सोमवार या हर दिन ये नियम बनाएं।

    1. ब्रह्ममुहूर्त में जागें। स्नान करें।
    2. स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं।
    3. किसी शिवालय में शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
    4. संभव हो तो थोड़े बिल्व पत्र और फूल भी।
    5. कम से कम 10 मिनट शिवालय में बैठकर ऊँ नमः शिवाय का जाप करें।
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Web Title: Why Lord Shiva Is Called Aghori Very Simple Method Of Shiv Puja Mahashivratri 2018
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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