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ऐसे करें पितरों को तर्पण?

धर्म डेस्क. उज्जैन | Sep 23, 2010, 14:38 PM IST

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tarpan_310श्राद्धपक्ष में पितरों की तृप्ति की मुख्य धार्मिक क्रियाओं में तर्पण बहुत महत्व रखता है। यह पितरों की संतुष्टि, आनंद और शांति के लिए आसान और सरल उपाय माना जाता है। तर्पण श्रद्धा, भाव के साथ पितरों की तृप्ति और मुक्ति के लिए किया जाना चाहिए। क्योंकि श्राद्धपक्ष में पितर देवता के रुप में पूजित होते हैं और देवता भी जिस तरह भक्त की भावना से प्रसन्न होते हैं, ठीक उसी तरह से पूर्वज अपने वंशजों की भावनाओं से प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
तर्पण का कर्म किसी योग्य विद्वान से कराया जाना श्रेष्ठ होता है। यहां जानते हैं तर्पण की सरल विधी -
- तर्पण जल खडें होकर ही करना चाहिए। इसके विपरीत करने से निरर्थक होता है।
- साधारण नित्य तर्पण दोनों हाथों से करना चाहिए, किंतु श्राद्ध केवल दाहिने हाथ से करना चाहिए।
- स्नान-तर्पण, ग्रहण, महालय, तीर्थ-विशेष में तो तिल से तर्पण का कोई निषेध नहीं है, लेकिन तर्पण के लिए शुक्रवार, रविवार, संक्रांति में तिल का तर्पण निषेध है।
- तिल-तर्पण खुले हाथ से देना चाहिए। तिलों को रोओं में या हाथ में लगे नहीं रहना चाहिए।





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Web Title: procedure for offering tarpan?
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