Home» Jeevan Mantra »Dharm »Darshan » Alha Udal

यहां आज भी दिखते हैं आल्हा-ऊदल

धर्म डेस्क. उज्जैन | Sep 11, 2010, 16:42 PM IST

यहां आज भी दिखते हैं आल्हा-ऊदल
mahoba_310भूत-प्रेत की कहानियां सभी ने अपने बचपन में सुनी होंगी पर शायद तब उन्हें सिर्फ कहानी समझ कर भुला दिया जाता था। अगर सचमुच कोई मरा व्यक्ति हमारी आंखों के सामने आ जाए तो हम उस हालात का सामना नहीं कर पाएंगें। पर महोबा एक ऐसा स्थान है जहां मरे व्यक्ति को भगवान का दर्जा दिया जाता है और वह अब भी कभी-कभार दिख जाते हैं, वे हैं वीर आल्हा-ऊदल।
महोबा अत्यन्त प्रसिद्ध वीर आल्हा-ऊदल की राजधानी थी। ये दोनों ही चंदेल नरेश के सामन्त थे। कहते हैं कि इनमें आल्हा योग-साधना से अमर हो गये हैं और अब भी कभी-कभार दिख जाते हैं। यह भी कहा जाता है कि मैहर की शारदा देवी उनकी आराध्या हैं और हर रोज सुबह देवी के गले में ताजे फूलों की माला मिलती है। जाहिर है यह माला आल्हा द्वारा ही चढ़ाई जाती है।
मदनसागर सरोवर के किनारे आल्हाकी कीली नामक दीपस्तम्भ है।
अन्य दर्शनीय स्थल- मदनसागर सरोवर के मध्य में दो टापू हैं जिनमें से एक पर खखरा मठ नामक शिव मंदिर है। इस सरोवर के अत्निकोण पर कण्ठेश्वर शिव और बड़ी चण्डिका देवी के स्थान हैं। बड़ी चण्डिका देवी की मूर्ति 12 फुट ऊंची और अष्टादश भुजा है। यहां दूर-दूर से शक्ति के उपासक अनुष्ठानादि के लिए आते हैं।
कैसे पहुचें- मानिकपुर-झांसी लाइन में ही मानिकपुर से 150 किलोमीटर और बदौसा से 100 किलोमीटर दूर महोबा स्टेशन है।
चित्रकूट, झांसी, कानपुर, इलाहाबाद आदि शहरों से महोबा के लिए सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं।
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! डाउनलोड कीजिए Dainik Bhaskar का मोबाइल ऐप
Web Title: alha udal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

Stories You May be Interested in

    Comment Now

    Most Commented

        Trending Now

        Top