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इन लोगों को पैसों के मामलों में आती हैं परेशानियां

धर्म डेस्क. उज्जैन | Jan 05, 2013, 13:21 PM IST

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जानिए यदि किसी व्यक्ति की कुंडली तुला लग्न की हो और उसके प्रथम या द्वितीय भाव में केतु स्थित हो तो उसके जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ते हैं...
तुला लग्न की कुंडली के प्रथम भाव में केतु हो तो...
कुंडली का पहला भाव शरीर का कारक स्थान होता है और तुला लग्न की कुंडली में इस स्थान तुला राशि का स्वामी शुक्र है। शुक्र की इस राशि में केतु होने पर व्यक्ति धैर्य एवं चतुरता के बल पर उन्नति करता है। ऐसे लोगों को जीवन में समाज एवं घर-परिवार में मान-सम्मान प्राप्त होता है। जीवन में कभी-कभी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
तुला लग्न की कुंडली के द्वितीय भाव में केतु हो तो...
तुला लग्न की कुंडली के द्वितीय भाव वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। कुंडली का दूसरा स्थान घर-परिवार और धन का कारक स्थान होता है। यहां केतु होने पर व्यक्ति को धन संचय में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनके जीवन में समस्याएं अधिक होती हैं और सुख कम। ये लोग गुप्त योजनाओं के बल पर सफलता प्राप्त करते हैं।
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Web Title: jyts effects of ketu in tula lagna's kundli 1-2 house
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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