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सिर्फ कौरव ही नहीं सभी पांडव भी मारे जाते अगर ये योद्धा आ जाता मैदान में

जीवन मंत्र डेस्क | Jan 13, 2017, 09:29 IST

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यह खासियत थी बर्बरीक के बाणों की-

श्रीकृष्ण युद्ध में कमजोर पक्ष का साथ देने वाली बर्बरीक की प्रतिज्ञा के बारे में जानते थे। इसलिए, वह बर्बरीक की योग्यता की परीक्षा लेना चाहते थे। उन्होंने बर्बरीक को अपने तीनों बाणों का महत्व बताने को कहा। तब बर्बरीक ने अपने पहले बाण की योग्यता बताते हुए कहा कि यह बाण उन सभी वस्तुओं पर निशान लगा देता है, जिन्हें में खत्म करना चाहता हूं। दूसरा बाण उन सभी वस्तुओं को निशान लगा देता है, जिन्हें में बचाना चाहता हूं। अंतिम बाण पहले बाण से निशान लगाई सभी वस्तुओं का विनाश कर देता है। अंत में तीनों बाण पुनः मेरे के पास लौट आएंगे।
युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने सभी योद्धाओं से एक सवाल किया था कि वह योद्धा अकेले इस युद्ध को कितने दिनों में खत्म कर सकता है। श्रीकृष्ण के इस सवाल पर सभी योद्धाओं ने अपनी-अपनी योग्यताओं के अनुसार इसका उत्तर दिया। भीष्म ने बीस दिन, द्रोणार्चाय ने पच्चीस, कर्ण ने चौबीस और अर्जुन ने अट्ठाईस दिनों में युद्ध को अकेले समाप्त करने की बात कही थी। यही सवाल जब श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से पूछा, तब उसने एक ही क्षण में युद्ध खत्म करने की बात कही थी। बर्बरीक की यह बात सुनकर श्रीकृष्ण को उसकी योग्याता पर विश्वास हो गया था।
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Web Title: Great Warrior Barbarik of Mahabharat
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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