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इस बार कुछ ऐसे करें नए साल का स्वागत...

पं. विजयशंकर मेहता | Dec 31, 2012, 15:20 PM IST

इस बार कुछ ऐसे करें नए साल का स्वागत...
समय जब बदलता है तो वह अपने साथ हमें एक घटना से दूसरी घटना में ले चलता है। हम पिछली और बदली घटनाओं में इतने रम जाते हैं कि समय को भूल ही जाते हैं। हम जीवन में जो पाना चाहते हैं उसमें स्वयं की और दूसरों की भूमिका पर ही ध्यान देते हैं। जबकि वक्त भी इसमें अपना पूरा दखल रखता है।
भारत की संस्कृति ने समय को परमात्मा से जोड़कर बड़ा मान दिया है। समय को यदि किसी ने पार किया है तो वह है मनुष्य का मन। इसकी गति समय से ज्यादा तेज है। यदि हम इसको रोकने की कला सीख जाएं तो समय में से जीवन को समझ पाएंगे और जीवन को जी भी लेंगे। अंग्रेजी कैलेण्डर के मुताबिक आज की शाम वह संधि काल है, जहां से विदाई और स्वागत का समय गुजरेगा।
विदाई में भारीपन न हो और स्वागत में उथलापन न रहे। स्वागत में सात्विकता उसका गहना है। पर कहीं-कहीं तो भारत में लगता है कि नया वर्ष शराब की नालियों में ही बहकर आएगा। मनुष्य के शरीर के भद्दे नाच-गानों से धक्का खाकर ही पुराना साल जाएगा और नया आएगा, क्या यह पूरी तरह से ठीक है?
होना यह चाहिए कि बीता साल असफलताओं की सीख हो और नए साल में सफलता की खोज की तैयारी रहे। हनुमान सफलता का प्रतीक हैं। उनका सुंदरकांड, नए समय के स्वागत का सही संदेश है। इसीलिए मुंबई, कल्याण में सद्भावना मंच नामक संस्था शाम साढ़े छ: से रात आठ बजे तक एक अभिनव प्रयोग कर रही है। आस्था चैनल पर इस अनुष्ठान को देखा जा सकेगा।
यह संधि काल में कुछ समय अपने अंतरमन में रुकने के प्रयोग का समय रहेगा। अपनी ही गहराई में डुबकी लगाने के बाद नव वर्ष के लिए हम तरो ताज़ा होंगे। यह पूरी सात्विकता लिए एक शाम स्वागत के नाम होगी, जो अब मनुष्य के जीवन के लिए जरूरी है।
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Web Title: This time to welcome the new year some ...
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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