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खाने के आयुर्वेदिक फंडे, इन्हें याद रखे लेंगे तो पेट की प्रॉब्लम्स होंगी ही नहीं

धर्मडेस्क. उज्जैन | Jul 20, 2013, 15:18 PM IST

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जिन लोगों का पेट हमेशा भारी रहता है, भूख नहीं लगती है तो इसका मुख्य कारण पेट साफ न रहना है। ये सभी समस्याएं भोजन के न पचने के कारण होता है। आयुर्वेेद में कहा गया है, भूख न लगी हो फिर भी भोजन करने से रोगों की संख्या बढ़ती जाती है। इसीलिए जब भोजन करें तो इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है....

- उड़द, चना से बने पदार्थ भारी होते हैं, जिन्हें कम मात्रा में लेना ही उपयुक्त रहता है।

- खाने से पहले अदरक और सेंधा नमक का सेवन सदा हितकारी होता है।

-भोजन गरम होना चाहिए। गरम भोजन स्वादिष्ट लगता है, पाचकाग्नि को तेज करता है और शीघ्र पच जाता है।

- ऐसा भोजन अतिरिक्त वायु और कफ को निकाल देता है। ठंडा या सूखा भोजन देर से पचता है।

- एक बार खाना खाने के बाद जब तक पूरी तरह पच न जाय एवं खुलकर भूख न लगे तब तक दुबारा भोजन नहीं करना चाहिए। एक बार भोजन करने के बाद दूसरी बार भोजन करने के बीच कम-से-कम छ: घंटों का अंतर अवश्य रखना चाहिए ।


- रात्रि में आहार के पाचन के समय अधिक लगता है इसीलिए रात्रि के समय प्रथम पहर में ही भोजन कर लेना चाहिए। शीत ऋतु में रातें लम्बी होने के कारण सुबह जल्दी भोजन कर लेना चाहिए और गर्मियों में दिन लम्बे होने के कारण सायंकाल का भोजन जल्दी कर लेना उचित है।

- अपनी प्रकृति के अनुसार उचित मात्रा में भोजन करना चाहिए।

- खाने की मात्रा व्यक्ति की पाचकाग्नि और शारीरिक बल के अनुसार निर्धारित होती है।

- हल्के पदार्थ जैसे कि चावल, मूंग, दूध अधिक मात्रा में ग्रहण कर सकते हैं।

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Web Title: yoga: Ayurvedic food, they will remember not only the stomach will Problems
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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