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PIX: गुरुवार को क्या करने, क्या न करने से खुल जाता है भाग्य?

धर्म डेस्क. उज्जैन | Dec 19, 2012, 15:05 PM IST

शास्त्रों के मुताबिक बृहस्पति की उपासना ज्ञान, सौभाग्य व सुख देने वाली मानी गई है। दरअसल, गुरु ज्ञान व विद्या के रास्ते तन, मन व भौतिक दु:खों से दूर जीवन जीने की राह बताते हैं। इस पर चल कोई भी इंसान मनचाहे सुखों को पा सकता है।

हिन्दू धर्म शास्त्रों में कामना विशेष को पूरा करने के लिए खास दिनों पर की जाने वाली गुरु पूजा की परंपरा में गुरुवार को भी देवगुरु बृहस्पति की पूजा की अहमियत बताई गई है। ऐसी पूजा के शुभ, सौभाग्य व मनचाहे फल के लिए गुरुवार को देव पूजा के कुछ खास नियमों का पालन जरूरी बताया गया है।

जानिए सौभाग्य, पारिवारिक सुख-शांति, कार्य कुशलता, मान-सम्मान, विवाह, दाम्पत्य सुख व दरिद्रता को दूर करने की कामना से गुरुवार को देव पूजा में किन खास बातों का ख्याल रखें -

- गुरुवार से गुरुवार व्रत की शुरुआत करें। किसी भी माह के शुक्ल पक्ष में गुरुवार व अनुराधा के योग से शुरू करना चाहिए।
- 1, 3, 5, 7, 9, 11 या 1 से 3 वर्ष या ताउम्र व्रत रखा जा सकता है।
- इस दिन हजामत यानी बाल न कटाएं व दाढ़ी न बनवाएं।
- व्रत नियमों में सूर्योदय से पहले जाग स्नान कर पीले वस्त्र पहनें।
- इस दिन केले के वृक्ष या इष्ट देव के समीप बैठ पूजा करें।
- गुरु बृहस्पति को पीली पूजा सामग्री जैसे पीले फूल, पीला चंदन, चने की दाल, गुड़, सोना, वस्त्र चढ़ाएं। पीली वस्तुओं का दान करें। कथा सुनें।
- भगवान को केले चढ़ाएं, लेकिन खाएं नहीं।
- यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन व दान दें।
- दरिद्रता व संकट टालने ही नहीं, बल्कि सपंन्नता को बनाए रखने के लिए भी यह व्रत करना चाहिए।

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Web Title: ups_know what to do and not do make lucky on Thursday
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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