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चमत्कारी शिव ध्यान उपाय: तनाव व परेशानियां हो जाएंगी छूमंतर

धर्म डेस्क, उज्जैन | Jan 06, 2013, 01:00 AM IST

भगवान शिव की जगतपालक विष्णु भक्ति और भगवान विष्णु की शिव भक्ति के हिन्दू धर्मग्रंथों में कई प्रसंग उजागर हैं। मसलन, रुद्र अवतार श्रीहनुमान द्वारा विष्णु अवतार श्रीराम की सेवाभक्ति और श्रीराम द्वारा शिव भक्ति कर अधर्म के नाश के लिये लंका प्रस्थान से पहले शिवलिंग पूजा। असल में दोनों देवशक्तियों की एकरुपता का प्रमाण हैं।
इसी कड़ी में सांसारिक जीवन में सफलता के सूत्रों से भरा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित महान धर्मग्रंथ रामचरितमानस में भी भगवान शंकर के अद्भुत स्वरूप का स्मरण मिलता है। यह शिव की प्रेरणा से ही रचित और प्रमाणित ग्रंथ माना गया है।
इस ग्रंथ के अयोध्याकाण्ड की शुरुआत में आया शिव के दिव्य स्वरूप का नियमित पाठ सभी सांसारिक कष्टों का तुरंत नाश करने वाला माना गया है।
खासतौर पर सोमवार की सुबह शिव की आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, सफेद चंदन, अक्षत समर्पित कर इस श्लोक का स्मरण करें यह शिव भक्ति का बेहद आसान उपाय भी है। जानिए यह शिव ध्यान श्लोक व इसके अर्थ में बताया शिव का अद्भुत स्वरूप -
यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवपगा मस्तके
भाले बालविधुर्गे च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।
सोयं भूमिविभूषण: सुरवर: सर्वाधिप: सर्वदा।
शर्व: सर्वगत: शिव: शशिनिभ: श्रीशङ्कर पातु माम्।।
सरल शब्दों में अर्थ है कि जिनकी गोद मे हिमालय की पुत्री पार्वती, मस्तक पर गंगाजी, ललाट पर दितीया यानी दूज का चांद, कण्ठ में भयंकर विष, वक्षस्थल पर नागराज शेष सुशोभित हैं। भस्म से रमे, देवताओं में भी श्रेष्ठ, भक्तों के पापों के संहारक, सर्वव्यापी यानी हर जगह मौजूद, कल्याणकारी, चन्द्रमा की तरह उजली आभा वाले भगवान शंकर मेरी रक्षा करे।

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Web Title: miraculous steps of shiv dhyan : keep away tension and problems
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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