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PICS: इस नदी का नाम लेने से ही दूर रहते हैं सांप!

धर्म डेस्क, उज्जैन | Feb 19, 2013, 20:05 PM IST

सनातन धर्म में प्रकृति पूजा का बड़ा ही महत्व है। पेड़-पौधों से लेकर प्राणी तक देव रूप में पूजनीय है। पंचदेवों में एक भगवान शिव तो प्रकृति स्वरूप ही माने गए हैं। उनकी पूजा-पाठ में चढ़ाए जाने वाले कई तरह के फूल-पत्ते शिव को बड़े ही प्यारे माने जाते हैं। इसी तरह शिव को प्रिय प्राणियों में एक नाग यानी सांप भी हिन्दू धर्म परंपराओं में देव प्राणी के रूप में पूजनीय है।

पौराणिक मान्यता है कि शिव नागों को गहनों की तरह पहनते हैं। इससे जुड़ा दूसरा दर्शन यह भी है कि चूंकि जहरीले नाग काल रूप माना जाता है और यह काल महाकाल यानी शिव के वश में होता है। व्यावहारिक तौर पर भी सांप तब ज्यादा सक्रिय होते हैं, जो शिव भक्ति का विशेष काल होता है यानी सावन माह।

सालभर में खासतौर पर इसी वक्त बारिश के पानी से सांपों के कुदरती आवास खत्म होने और अन्य दिनों में भी किसी वजहों से बाहर निकलने पर उनका सामना इंसान व अन्य जीवों के साथ होता है। इस दौरान होने वाले टकराव में संकोची और संवेदनशील मानी जाने वाली नाग का आत्मरक्षा के लिए आक्रामक होकर डंसना मनुष्य और अन्य जीवों के लिए प्राणघातक होता है।

शास्त्रों में इस विशेष काल के अलावा अन्य दिनों में भी सांपों के काटने से बचने के लिए अहम सावधानियां और उपचार बताए गए हैं। किंतु कुछ ऐसे धार्मिक उपाय भी उजागर किए गए हैं जो आसान होने के साथ सर्प और उसके भय से छुटकारा देने में असरदार भी हैं। माना जाता है कि इनको अपनाने से सांप आस-पास भी नहीं फटकते। अगली तस्वीर पर क्लिक कर जानिए ऐसा ही चमत्कारी उपाय -

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Web Title: Effect of chant name of this river keep away snake!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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