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आज शनि प्रदोष : शिव पूजा में क्या करें, क्या न करें?

धर्म डेस्क, उज्जैन | Feb 23, 2013, 04:06 AM IST

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हिन्दू धर्म पंचाग के मुताबिक हर महीने की दोनों त्रयोदशी (या द्वादशी व त्रयोदशी के संयोग) भगवान शिव की भक्ति से सभी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए व्रत व शाम को पूजा की जाती है, इसे प्रदोष व्रत कहते हैं। 23 फरवरी को शनिवार का प्रदोष तिथि के साथ संयोग हैं। ऐसी शुभ घड़ी शनि प्रदोष कहलाती है। शनि प्रदोष पर शिव भक्ति सभी इच्छाओं के अलावा खासतौर पर संतान कामना पूरी करती है। इस दिन प्रदोष व्रत के पालन के लिए शास्त्रोक्त विधान इस तरह हैं, जो किसी ब्राह्मण से पूरे कराना भी श्रेष्ठ होता है। जानिए प्रदोष तिथि पर व्रत व पाठ-पूजा के दौरान क्या करें व क्या न करें -
- प्रदोष व्रत में बिना जल ग्रहण कर व्रत रखें। व्रत के दौरान मन की पवित्रता का ध्यान रखें। किसी भी तरह के बुरे विचार मन में न लाएं। इसी तरह बुराई व बुरे काम न करें।
- सुबह स्नान कर भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं। शाम के समय फिर से स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें। शिवजी की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें भगवान शिव की सोलह सामग्रियों से पूजा करें।
- भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं।
- आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। शिव आरती करें। शिव स्तोत्र, मंत्र जप करें ।
- शनिवार होने से शिव भक्त शनि की प्रसन्नता के लिए पूजा व उपाय भी करें। रात्रि में जागरण करें।
इस तरह समस्त मनोरथ पूर्ति और कष्टों से मुक्ति के लिए व्रती को प्रदोष व्रत के धार्मिक विधान का नियम और संयम से पालन करना चाहिए।
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Web Title: know what to do or don't on pradosh tithi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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