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गीता के इस उपाय से काबू में रखें वासना..आबरू व नजरों में प्रेम भी रहेगा कायम

धर्म डेस्क, उज्जैन | Jan 03, 2013, 15:54 PM IST

गीता के इस उपाय से काबू में रखें वासना..आबरू व नजरों में प्रेम भी रहेगा कायम

अक्सर धार्मिक या आध्यात्मिक होने का अर्थ धार्मिक क्षेत्र, ज्ञान या विषयों से जुड़े किसी खास इंसान से जोड़ा जाता है। जबकि शास्त्रों के मुताबिक सांसारिक जीवन में जब कोई व्यक्ति अध्यात्म की ओर बढ़ता है, तब उसे किसी ऊपरी दिखावे या बनावटी बातों की जरूरत नहीं होती क्योंकि अध्यात्म का संबंध आत्मा से होता है। इसलिए वह भलाई, भद्रता और विनम्रता के रूप में बाहर झलकता है। जरूरी नहीं कि ऐसा इंसान धार्मिक कर्मकांड या पाठ-पूजा में रमा हो।
सरल शब्दों में समझें तो व्यावहारिक तौर पर अध्यात्म ऐसा रास्ता है जो आदर, मान और नजरों में प्रेम बरकरार रखने का नायाब तरीका है। कैसे अध्यात्म जीवन में सुखद बदलाव लाता है,
श्रीमद्भगवद्गीता में उजागर सूत्रों से बेहतर ढंग से समझा जा सकता है -

श्रीमद्भगवद्गीता में भी अर्जुन के पूछने पर अध्यात्म के बारे में पूछने पर श्रीकृष्ण ने कहा है कि -
स्वभावोध्यात्ममुच्यते यानी अपना स्वरूप अर्थात् जीवात्मा ही अध्यात्म है। इसलिए जरूरी है कि आत्मा से नाता जोडऩे या खुद से पहचान के लिए शरीर, मन व कर्म शुद्धि पर भी दृष्टि जरूरी है।
यहां जानिए उन लक्षणों को, जो अध्यात्म से जुड़े हुए व्यक्तित्व की पहचान होते हैं। जिसे सही मायनों में उदारता और सांसारिक जीवन के नजरिए से ऐसाइंसानजिंदादिल भी कहा जाता है -

- व्यक्ति किसी भी तरह की हानि या नुकसान होने पर भी आवेश, बदले की भावना से दूर होता है और उल्टे ऐसी हालात में स्नेह और क्षमा को महत्व देता है।
- दु:ख हो या सुख उसका व्यवहार और विचार संतुलित होते हैं। वह विपरीत हालात में घबराता नहीं है और नहीं सुख में अति उत्साहित होता है।
- वह दूसरों की गलतियां देखने, बुराई या ओछे विचारों से दूर रहता है और केवल गुणों और अच्छाईयों को ढूंढता और अपनाने की कोशिश करता है।
- व्यक्ति इतना सरल, सहज और निस्वार्थ हो जाता है कि वह अधिकारों के स्थान पर सिर्फ कर्तव्यों को याद रखता है।
- वह निर्भय होता है। वह मानसिक रुप से इतना जुझारू होता है कि इच्छाशक्ति से अपने लक्ष्य को पा लेता है।
- ऐसा व्यक्ति बहुत ही धैर्य और संयम रखने वाला होता है, जिसकी वजह से वह बुरी लतों और गलत कामों से स्वयं को भटकाता नहीं है।
- कर्तव्यों की ही सोच होने से वह हर तरह की इच्छाओं यानी वासनाओं पर काबू कर लेता है। इससे वह अपनी मानसिक शक्तियों का उपयोग भजन, संगीत, रचनात्मक कामों जैसे चित्रकारी, लेखन, साहित्य के पठन-पाठन में लगाता है।

अगर आपकी या किसी नजदीकी व्यक्ति की जिंदगी में कुछ ऐसे ही बदलाव नजर आ रहे है तो समझे ऐसे कदम वास्तविक सुख और शांति की ओर बढ़ रहे हैं।

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Web Title: gita rahasya: keep respect, dignity and love by take step according to gita
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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