जीवन मंत्र
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  • इन दो चीजों से बढ़ता है जीवन का आनंद
    उज्जैन।भोजन का आनंद दो बातों में है स्वाद और परोसगारी में। स्वाद का संबंध निर्माण से है और परोसगारी का आग्रह से। वही बात हमारे व्यक्तित्व निर्माण से जुड़ी है। बाहरी जगत के व्यक्तित्व निर्माण के अपने तरीके हैं इनसे सुख, सफलता मिलती भी है, लेकिन शांति के मामले में ये बाहरी साधन मौन है। व्यक्तित्व निर्माण की एक भीतरी प्रक्रिया भी है जिसे आध्यात्मिक कहते हैं। यहाँ आदमी केवल विचारों, सिद्धान्तों से तैयार नहीं होता, यहाँ वह ध्यान से गुजरता है। ध्यान के अनुभव को जीने वाले लोग अपने व्यक्तित्व को...
    October 30, 03:18 PM
  • जीवन की हर परीक्षा में आपके साथ ये एक ताकत तो रहेगी ही...
    उज्जैन।शिक्षा के इस युग में परीक्षा का बड़ा महत्व है। परीक्षा पास करने के लिए सभी विद्यार्थी अपने-अपने तरीके से प्रयास करते हैं। जहां मन की एकाग्रता चलनी चाहिए वहां अब धन का खेल भी चलने लगा है। विद्यार्थी जीवन में परीक्षा एक हिस्सा है और इसकी पूर्णता के बाद दूसरा जीवन आरंभ होता है, लेकिन मनुष्य जीवन में परीक्षा किसी नियत तिथि पर नहीं होती, बल्कि प्रतिपल चला करती है। भगवान ने जीवन की परीक्षा में हमारी मदद के लिए खुद को दो तरीके से उतारा है। एक तो उसका अवतार रूप है और दूसरा उसका प्रकृति रूप है।...
    October 29, 01:44 PM
  • आप अपने हर मिलने वाले से ये एक चीज तो ले ही सकते हैं...
    उज्जैन।यूं तो आप अपनी जिंदगी में अनेक लोगों से मिलते होंगे। कुछ ध्यान रह जाते होंगे, कुछ को ध्यान रखना पड़ता होगा। कुछ को जबर्दस्ती भुलाना पड़ता होगा और कुछ अपने आप विस्मृत हो जाते हैं। हम जागरूक ही नहीं रह पाते कि उनकी अच्छाइयों से हमने क्या फायदा उठाया। आपके संपर्क में आने वाले लोगों को तीन खानों में बांटिए। पहले, बहुत प्रगतिशील, स्पष्ट और प्रेरणा दायक। इनसे तो जितना ले सकें, ले लीजिए। पता नहीं ऐसे लोग दोबारा मिलें या न मिलें। दूसरे, जो खुद संघर्ष कर रहे हों, बहुत सफल नहीं होंगे, परेशान भी...
    October 27, 01:51 PM
  • उज्जैन।दाम्पत्य कहते किसे हैं? क्या सिर्फ विवाहित होना या पति-पत्नी का साथ रहना दाम्पत्य कहा जा सकता है। पति-पत्नी के बीच का ऐसा धर्म संबंध जो कर्तव्य और पवित्रता पर आधारित हो। इस संबंध की डोर जितनी कोमल होती है, उतनी ही मजबूत भी। जिंदगी की असल सार्थकता को जानने के लिये धर्म-अध्यात्म के मार्ग पर दो साथी, सहचरों का प्रतिज्ञा बद्ध होकर आगे बढऩा ही दाम्पत्य या वैवाहिक जीवन का मकसद होता है। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तरों पर स्त्री और पुरुष दोनों ही अधूरे होते हैं।...
    October 22, 01:53 PM
  • आपके दिल के लिए क्या है सबसे पहली जरूरत...
    उज्जैन।आजकल लोग मजा बहुत ढूंढ़ते हैं। कोई भी काम करते हैं तो सोचते हैं कि मजा आया कि नहीं आया। किसी भी काम की खुशी उस काम से ज्यादा आपके महसूस करने में है। आज मौज-मस्ती के लिए तरह-तरह के साधन व तरीके खोज लिए गए हैं। फिर भी उदासी के थप्पड़ पड़ते ही रहते हैं।एक बहुत सहज तरीका है मजे उड़ाने का। आप किसी भी उम्र के हों, यदि आपके माता-पिता जीवित हैं तो उनके सामने बच्चे ही बने रहें। एक अलग तरीके का मजा आएगा। उम्र का बैरियर मिटा दें। जब तक वे मौजूद हैं, उनके बच्चे बने रहिए, लेकिन यह बहुत सरल नहीं है। इसमें...
    October 20, 03:42 PM
  • सुंदर गृहस्थी के लिए पति-पत्नी को ये एक काम जरूर करना चाहिए..
    उज्जैन।पानी के लिए कहा जाता है कि यदि उसे शून्य डिग्री मिले तो बर्फ बनना ही है और सौ डिग्री पर भाप होना ही है। हमारे विचार भी पानी की तरह हैं। ये दूसरों के विचारों से संचालित हो जाते हैं। जम भी सकते हैं और उबल भी सकते हैं। इसके सबसे खतरनाक परिणाम पति-पत्नी का रिश्ता भुगतता है। ऊपरी तौर पर तो यह विवाह आधारित है, लेकिन गहराई से देखें तो यह स्नेह-प्रधान रिश्ता है। देखने में आता है कि शादी और स्नेह का अनिवार्य संबंध नहीं है। कहते हैं बगैर प्रेम के विवाह नहीं होना चाहिए। जरूरी नहीं कि जहां प्रेम हो,...
    October 18, 03:23 PM
  • लोकप्रिय बनना चाहते हैं तो अपनाएं ये 3  तरीके
    उज्जैन।हमारेयहां शब्दों को भी शस्त्र माना गया है। कुछ शब्द तो जीवनभर के घाव दे जाते हैं। कहते हैं मनुष्य के शरीर में जुबान एक ऐसा अंग है जिस पर चोट लग जाए तो सबसे जल्दी ठीक होती है और शरीर के इस अंग से यदि किसी को चोट पहुंचाई जाए तो जीवनभर उसके ठीक होने की संभावना नहीं होती। कहते हैं लात का तोड़ होता है, बात का नहीं। सुंदरकांड में समापन के नजदीक पहुंचकर समुद्र ने श्रीराम से एक ऐसी पंक्ति बोल दी, जिसे लेकर श्रीरामचरित मानस के शोधकर्ता खूब शोर मचाते हैं। यह चौपाई है - ढोल गंवार सूद्र पसु नारी। सकल...
    October 16, 05:30 PM
  • जीवन में सफलता पाना हो तो न भूलें धर्म ग्रंथों के ये 4 सूत्र
    उज्जैन।दूसरे आपको पसंद करें इसकी तैयारी आपको ही करनी होगी। यदि आप बहुत अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं, अनुभवी भी नहीं हैं तो आपको कोई क्यों पसंद करेगा। किसी सिस्टम में आपसे अधिक एजुकेटेड, टैलेंटेड लोग हों तो आप पीछे रह जाएंगे। अतिरिक्त परिश्रम आज के समय में वह पूंजी है जिससे आप सफलता का ताला खोल सकते हैं। हर बॉस आपकी इस योग्यता का कायल होगा। उसे भरोसा रहेगा कि भले ही आपके पास ऊंची शिक्षा नहीं है, लेकिन अतिरिक्त परिश्रम आपकी खूबी है। अतिरिक्त परिश्रम का मतलब जरूरत से ज्यादा काम करना नहीं होता। इसका...
    October 15, 04:30 PM
  • पढ़ाई से बच्चों को लगता है डर तो ये काम करें....
    उज्जैन। बच्चों को पढ़ाई से डर क्यों लगता है? जिन्हें डर नहीं लगता उन्हें अरुचि होती है। कम बच्चे होते हैं जो स्वेच्छा से, समझ से, स्वयं पढ़ाई कर लेते हैं। माता-पिता दबाव बनाते हैं तब कोई बच्चा पढ़ाई करता है। शिक्षा को जब तक बाहरी दृष्टि से देखा जाएगा, ऐसा ही होगा। बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से जोडऩे के लिए माता-पिता जितनी भी तकनीकें अपनाते हैं वे सब सांसारिक हैं। कॅरिअर ओरिएंटेड है, लाइफ ओरिएंटेड नहीं। चूंकि विद्यार्थी शिक्षा से अधूरे ढंग से जुड़ा है, इसलिए उसमें अरुचि और भय जाग जाता है। विद्यार्थी को...
    October 14, 01:58 PM
  • शादी करके हमेशा खुश रहने के लिए ये चीज जरुरी है...
    उज्जैन।शादियां जुए के खेल में दांव की तरह हैं। कोई सफल हो गया, कोई हार गया। जो लोग पति-पत्नी के रिश्ते निभा रहे हैं, जरूरी नहीं कि वे सफल हो गए हैं। हर पति-पत्नी के बीच अपने वैवाहिक रिश्ते को लेकर एक उदासी और असंतोष बना ही रहता है। पहले इसे समझौते के लेपन से दबा दिया जाता था और आजकल के जोड़े ज्यादा बर्दाश्त नहीं करते। इसलिए आजकल इसका समापन अदालतों में ज्यादा होने लगा है। इसलिए तनावग्रस्त जोड़ों को सत्संग का प्रयोग करते रहना चाहिए। सत्संग का अर्थ है किसी के साथ ऐसा संग करना जहां हृदय की प्रधानता...
    October 12, 07:48 AM
  • जीवन की मस्ती तो बस सिर्फ इस एक बात में है...
    उज्जैन।दूसरे हमारी ओर ध्यान दें, हमारी उपस्थिति को महत्व दिया जाए, हम हाशिये पर न पटक दिए जाएं, इसके लिए इन दिनों बड़े दाव-पेंच चले जाते हैं। सभी अपनी पर्सनलिटी का प्रोजेक्शन चाहते हैं। व्यक्तित्व में विविधता आ जाए, इसके लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। कई लोग तो अपने आपको स्थापित करने के लिए जरूरत से ज्यादा बोलते हैं। कुछ हरकतें करके अपनी मौजूदगी स्थापित करते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर जगह आपकी मौजूदगी को ही महत्व दिया जाए। ये सब अहंकार की अंगड़ाइयां हैं। कुछ समय अपने आपको दृश्य से हटाना...
    October 11, 02:52 PM
  • हमेशा सुखी रहने के 3 आसान तरीके
    उज्जैन।जब कभी हमारे साथअनहोनी होती है, हम पहला पत्थर भगवान की ओर उछालते हैं। उन्हें दोष देने लगते हैं। खासतौर पर जब घर में किसी सदस्य की असमय मृत्यु हो जाती है तब हमारे मन में यह सवाल उठता ही है कि हमने कभी किसी का बुरा नहीं किया फिर भगवान ने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? चूंकि भगवान तो उत्तर देने आ नहीं सकते इसलिए कई लोगों के सवाल अनुत्तरित ही रह जाते हैं। यह रोष धीरे-धीरे उदासी में और उदासी फिर डिप्रेशन में बदल जाती है। इसलिए बिना उत्तर प्राप्त किए जीवन को बोझ बनाकर न जीएं। ईश्वर अवतार लेता ही...
    October 9, 05:11 PM
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