जीवन मंत्र
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  • खुशहाल गृहस्थ जीवन के लिए याद रखें ग्रंथों की ये छोटी सी बात...
    उज्जैन। गृहस्थी कौन सी सबसे ज्यादा सुखी मानी जाती है। इस बात को लेकर लंबी बहस हो सकती है लेकिन सच तो यही है कि गृहस्थी वो ही सबसे ज्यादा सुखी है जहां प्रेम, त्याग, समर्पण, संतुष्टि और संस्कार ये पांच तत्व मौजूद हों। इनके बिना दाम्पत्य या गृहस्थी का अस्तित्व ही संभव नहीं है। यदि इन पांच तत्वों में से कोई एक भी अगर नहीं हो तो रिश्ता फिर रिश्ता नहीं रह जाता, महज एक समझौता बन जाता है। गृहस्थी कोई समझौता नहीं हो सकती। इसमें मानवीय भावों की उपस्थिति अनिवार्य है। आइए, भागवत में चलते हैं, देखिए महान राजा...
    November 18, 04:33 PM
  • शास्त्रों को समझने के लिए इस नजरिए को अपनाएं....
    उज्जैन।नई पीढ़ी के बच्चे जब भी कोई ऐसा काम करते हैं, जो पुराने लोग नहीं कर चुके हों या जिन्हें वे पसंद न करते हों ये बुजुर्ग उन्हें समझाने पर तुल जाते हैं। मैंने देखा है कि इसके लिए कई बार पुराने लोग शास्त्रों का सहारा लेते हैं। कहते हैं कि रामायण में यह लिखा है, बाइबल यह कहती है और कुरान में ऐसे समझाया है। ये प्रमाण इन बच्चों को प्रभावित कर दें, जरूरी नहीं है। यह सही है कि ग्रंथ में लिखी बातों के प्रति इस धरती पर असीम श्रद्धा है। लिखने वाले महापुरुषों ने इस देश, काल, परिस्थिति में जो देखा, समझा और...
    November 17, 03:29 PM
  • संघर्ष कर रहे हैं तो याद रखें सफल होने के लिए ये सूत्र
    उज्जैन।इस दौर में बिना संघर्ष के कम ही लोगों को उपलब्धियां मिलेंगी और जिन्हें मिल जाएंगी वे उसे बहुत दिनों तक पचा नहीं सकेंगे। समस्या, परेशानी, संघर्ष को सहजता से लीजिए। अब इस स्तंभ में हम चर्चा कर रहे हैं श्रीरामचरित मानस के चौथे सोपान किष्किंधा कांड की। यह संघर्ष की कथा है। यहां न सिर्फ श्रीराम संघर्ष कर रहे हैं, बल्कि जितने पात्र आएंगे सब कहीं न कहीं किसी न किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं। श्रीराम व हनुमान बताते हैं कि संघर्ष एक जीवनशैली है। इसे बोझ, प्रतिकूलता, तनाव और परेशानी का कारण न...
    November 15, 03:50 PM
  • अपनी आदतों पर सब लोगों को ध्यान देना चाहिए, क्योंकि...
    उज्जैन।एक होता है हमारा स्वभाव और दूसरी होती है आदत। इन दोनों से मिलकर हमारे व्यक्तित्व का वह महत्वपूर्ण हिस्सा तैयार होता है, जिससे हम अपना सांसारिक जीवन चलाते हैं। स्वभाव तैयार करने के लिए भीतरी प्रयास करने पड़ते हैं। थोड़ा एकांत साधना पड़ता है। अपने भीतर उतरकर मन, हृदय व मस्तिष्क को टटोलना पड़ता है। भक्ति करने वालों के लिए भीतर उतरना थोड़ा आसान रहता है। कर्मकांड में उलझे लोगों को बाहर सुविधा रहती है। बाहर का सारा काम आदत से चलता है। इसलिए आदत पर टिके लोग बड़े कर्मकांडी बन जाते हैं। आदत...
    November 14, 01:57 PM
  • गुस्से पर काबू पाना हो तो कभी न भूलें ये दो बातें
    उज्जैन।क्या आपको गुस्सा बहुत आता है? ज्यादातर लोगों का जवाब रहता है, हां। आजकल किसी को कम गुस्सा आता ही नहीं है। जब भी आता है जमकर आता है। हां, प्रदर्शन में उसकी तीव्रता कम-ज्यादा हो सकती है। लोग क्रोध कम करने के लिए अनेक प्रयास करते हैं। सबसे सरल तरीका है योग। प्राणायाम द्वारा क्रोध नियंत्रित होता है, लेकिन फिर समय की दिक्कत है। अगर ऐसा है तो एक बात का अभ्यास बढ़ा दीजिए। हमारी बहुत सी आदतों की तरह क्रोध भी आदत ही है। चलिए, आदत से आदत को मारें। अपने भीतर क्षमा करने की आदत विकसित करें। क्षमा...
    November 11, 01:33 PM
  • पढ़ाई से बच्चों को लगता है डर तो ये काम करें....
    उज्जैन।बच्चों को पढ़ाई से डर क्यों लगता है? जिन्हें डर नहीं लगता उन्हें अरुचि होती है। कम बच्चे होते हैं जो स्वेच्छा से, समझ से, स्वयं पढ़ाई कर लेते हैं। माता-पिता दबाव बनाते हैं तब कोई बच्चा पढ़ाई करता है। शिक्षा को जब तक बाहरी दृष्टि से देखा जाएगा, ऐसा ही होगा। बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से जोडऩे के लिए माता-पिता जितनी भी तकनीकें अपनाते हैं वे सब सांसारिक हैं। कॅरिअर ओरिएंटेड है, लाइफ ओरिएंटेड नहीं। चूंकि विद्यार्थी शिक्षा से अधूरे ढंग से जुड़ा है, इसलिए उसमें अरुचि और भय जाग जाता है। विद्यार्थी...
    November 10, 12:55 PM
  • मन में हमेशा अशांति रहती हो तो दूर करने के लिए अपनाएं ये तरीके
    उज्जैन।जब हम बाजार जाते हैं तो हमारी कोशिश रहती है अच्छी से अच्छी चीज ढूंढ़ी जाए। इसीलिए खरीदते समय खूबियों पर बहुत ध्यान देते हैं। खूबियों के चक्कर में आदमी कभी-कभी अपनी औकात से बाहर जाकर खर्च कर देता है। फिर यह तो क्वालिटी का युग है। लोग नारे की तरह यह घोषणा करते हैं कि दो पैसे भले ही ज्यादा लग जाएं, पर क्वालिटी चाहिए। क्वालिटी खोजने की इस आदत को खुद पर लागू करें। थोड़ा शांति से बैठकर अपने भीतर की खूबियों का विश्लेषण करें। जब ऊपर वाले ने हमें इस संसार में भेजा तो अपनी इच्छा से भेजा। इसी तरह...
    November 8, 02:46 PM
  • विचारों में आते हैं ऐसे परिवर्तन तो मिलती है सफलता
    उज्जैन।आज व्यावसायिक दृष्टिकोण से मनुष्य को यदि लाभ हुआ है तो एक बड़ी हानि भी हुई है। लाभ यह कि मनुष्य ने अपना, अपने से जुड़े लोगों का, क्षेत्र का विकास किया और नुकसान यह है कि भावनात्मक रूप से दूसरों के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता। जैसे ही दृष्टिकोण व्यावसायिक होता है, मनुष्य सबको वस्तु समझने लगता है। भावनात्मक संबंध बनते हैं अस्तित्व से। व्यावसायिक विकास रुकना नहीं चाहिए। हम खूब प्रगति करें, लेकिन केवल यही दृष्टि हो तो मनुष्य का भावनात्मक संतुलन बिगड़ जाता है। उसके भीतर एक अजीब सा असंतोष...
    November 7, 01:36 PM
  • पानी पीते समय हर एक को ध्यान रखनी चाहिए ये छोटी-छोटी बातें
    उज्जैन।जब कोई भी छोटा होता है तो घर के बड़े उसे खाने पीने से जुड़ी छोटी-छोटी हिदायते दिया करते हैं। ऐसी हिदायते बचपन में जरूर आपको भी मिली होंगी।आज हम भी आपको कुछ ऐसी ही हिदायत देने जा रहे हैंजो आपको शायद ही दी गई होगी।क्या आप जानते हैं कि हमने जीवन में सब पीना सीख लिया लेकिन एक चीज पीना हम नहीं सीख पा रहे, वह है आनंद को पीना। चाहते हुए भी इसका रसपान हम नहीं कर पाते हैं। आते हुए आनंद को भी हम छिटक देते हैं। मंगल भवन अमंगलहारी जैसी चौपाइयों को रटने वाले हम लोग अपने दुख से कम दुखी बल्कि दूसरों के सुख...
    November 5, 11:59 AM
  • ये तीन बातें जो लोग याद रखते हैं, उन्हे नहीं होता दुख...
    उज्जैन।कहा जाता है विपरीत परिस्थितियों में अपना आत्मविश्वास न छोड़ें। मदद दूसरे लोग भी करेंगे, लेकिन खुद पर किए विश्वास में बड़ी ताकत होती है। किसी ने कहा है आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है। चलिए, आज इस पर विचार करें कि यह आत्मविश्वास आता कहां से है। अगर दूसरे दे सकते तो हम भेंट में ले लेते। आत्मविश्वास हमारे ही भीतर का बाय-प्रोडक्ट है। इसका सीधा संबंध मस्तिष्क से है। हमारे भीतर एक मन है, दूसरा हृदय है और तीसरा मस्तिष्क है। जब भी हम कोई काम करते हैं, हमारे शरीर के अलावा भीतर ये तीन चीजें भी सक्रिय...
    November 4, 02:25 PM
  • जानिए, भगवान को जीवन में लाने के तरीके ...
    उज्जैन।प्रार्थना परत उतारने की प्रक्रिया है। हमने संसार में रहते हुए अपने चेहरे पर, अपने व्यक्तित्व पर कई परतें जमा कर ली हैं। प्रार्थना द्वार जैसी है परमात्मा तक जाने के लिए। उस दिव्य शक्ति के सामने छिपा हुआ चेहरा लेकर नहीं जा सकते। वहां तो जैसे हैं वैसा ही रहना होगा। हम क्या हैं यह बताने की क्रिया जगत में अलग होती है और जगदीश के सामने अलग होती है। दुनिया में कई लोगों के सामने हम चिल्लाते हैं जानते नहीं मैं कौन हूं? हमारा मनपसंद काम नहीं हुआ, अपमान हुआ, तो हम एक दम ब्लास्ट हो जाते हैं। अभी बताता...
    November 1, 02:35 PM
  • इन दो चीजों से बढ़ता है जीवन का आनंद
    उज्जैन।भोजन का आनंद दो बातों में है स्वाद और परोसगारी में। स्वाद का संबंध निर्माण से है और परोसगारी का आग्रह से। वही बात हमारे व्यक्तित्व निर्माण से जुड़ी है। बाहरी जगत के व्यक्तित्व निर्माण के अपने तरीके हैं इनसे सुख, सफलता मिलती भी है, लेकिन शांति के मामले में ये बाहरी साधन मौन है। व्यक्तित्व निर्माण की एक भीतरी प्रक्रिया भी है जिसे आध्यात्मिक कहते हैं। यहाँ आदमी केवल विचारों, सिद्धान्तों से तैयार नहीं होता, यहाँ वह ध्यान से गुजरता है। ध्यान के अनुभव को जीने वाले लोग अपने व्यक्तित्व को...
    October 30, 03:18 PM
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