जीवन मंत्र
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  • डिप्रेशन से उबरना हो तो न भूलें ये एक बात
    उज्जैन।इस समय जितनी शिक्षा बढ़ी है, उतनी ही अधीरता भी बढ़ रही है। पढ़े-लिखे लोग अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए इस कदर अधीर होते जा रहे हैं कि जरा-सी रुकावट या देरी उन्हें डिप्रेशन की ओर ले जाती है। जो थोड़े हिम्मत वाले हैं, वे अपने आप को डिप्रेशन से तो बचा लेते हैं, लेकिन चिड़चिड़े हो जाते हैं। कुल मिलाकर शिक्षा ने आदमी को बुद्धिमान बनाया, पर बेताब भी बना दिया। हर पढ़े-लिखे आदमी को यह बात जरूर समझनी चाहिए कि कुछ बातें होकर ही रहती हैं। जीवन के प्रवाह में कुछ ऐसा होता ही है, जो घट जाता है।आप चाहें या न...
    November 25, 03:32 PM
  • जब लगातार मिल रही हो असफलता तो अपनाए ये फंडा
    उज्जैन।सफलता की ललक ने अच्छे-अच्छों को बेताब कर दिया है। फिर सफलता के साथ लगातार शब्द और जुड़ गया है। निरंतर सफल रहने का नशा जब चढ़ता है तो मनुष्य कुछ बातें भूल जाता है। उसमें से एक यह है कि जब कभी असफल होना पड़े, तब क्या करेंगे। ऐसे लोगों की असफलता उन्हें तोड़ देती है। वे या तो गुस्से में आकर दूसरों को दोष देने लगते हैं या डिप्रेशन में डूबकर खुद का नुकसान करते हैं। सफलता के लिए खूब तैयारी करिए, पर थोड़ी बहुत तैयारी असफलता प्राप्त होने पर क्या करें इसकी भी करते रहिए। इसमें आध्यात्मिक दृष्टिकोण...
    November 24, 12:22 PM
  • सफल होने के लिए ये तीन सूत्र याद रखना बेहद जरूरी है
    उज्जैन। दूसरे आपको पसंद करें इसकी तैयारी आपको ही करनी होगी। यदि आप बहुत अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं, अनुभवी भी नहीं हैं तो आपको कोई क्यों पसंद करेगा। किसी सिस्टम में आपसे अधिक एजुकेटेड, टैलेंटेड लोग हों तो आप पीछे रह जाएंगे। अतिरिक्त परिश्रम आज के समय में वह पूंजी है जिससे आप सफलता का ताला खोल सकते हैं। हर बॉस आपकी इस योग्यता का कायल होगा। उसे भरोसा रहेगा कि भले ही आपके पास ऊंची शिक्षा नहीं है, लेकिन अतिरिक्त परिश्रम आपकी खूबी है। अतिरिक्त परिश्रम का मतलब जरूरत से ज्यादा काम करना नहीं होता।  ...
    November 23, 08:07 AM
  • अपने जीवन का हिसाब-किताब भी कुछ इस तरह से रखिए...
    उज्जैन।इंसानों में जितने भेद होते हैं उनमें एक बड़ा भेद रुचि का होता है। अभिन्न मित्रों में भी भिन्न रुचियां पाई जाती हैं। एक ही माता-पिता की संतानों की रुचियां अलग-अलग होती हैं।मनोवैज्ञानिकों के अनुसार हमारा उस व्यक्ति-परिस्थिति से तालमेल हो जाना ही रुचि है। बेहतर तालमेल ही रुचि में बदल जाता है। जिस काम में हमें रुचि होती है उसे हम अच्छे ढंग से करते हैं, लेकिन यह भी सही है कि किसी काम को लगातार करते रहें तो उसमें रुचि जाग जाती है। रुचि है बहुत महत्वपूर्ण तत्व। जब आप किसी बड़े अभियान में...
    November 21, 03:30 PM
  • खुशहाल गृहस्थ जीवन के लिए याद रखें ग्रंथों की ये छोटी सी बात...
    उज्जैन। गृहस्थी कौन सी सबसे ज्यादा सुखी मानी जाती है। इस बात को लेकर लंबी बहस हो सकती है लेकिन सच तो यही है कि गृहस्थी वो ही सबसे ज्यादा सुखी है जहां प्रेम, त्याग, समर्पण, संतुष्टि और संस्कार ये पांच तत्व मौजूद हों। इनके बिना दाम्पत्य या गृहस्थी का अस्तित्व ही संभव नहीं है। यदि इन पांच तत्वों में से कोई एक भी अगर नहीं हो तो रिश्ता फिर रिश्ता नहीं रह जाता, महज एक समझौता बन जाता है। गृहस्थी कोई समझौता नहीं हो सकती। इसमें मानवीय भावों की उपस्थिति अनिवार्य है। आइए, भागवत में चलते हैं, देखिए महान राजा...
    November 18, 04:33 PM
  • शास्त्रों को समझने के लिए इस नजरिए को अपनाएं....
    उज्जैन।नई पीढ़ी के बच्चे जब भी कोई ऐसा काम करते हैं, जो पुराने लोग नहीं कर चुके हों या जिन्हें वे पसंद न करते हों ये बुजुर्ग उन्हें समझाने पर तुल जाते हैं। मैंने देखा है कि इसके लिए कई बार पुराने लोग शास्त्रों का सहारा लेते हैं। कहते हैं कि रामायण में यह लिखा है, बाइबल यह कहती है और कुरान में ऐसे समझाया है। ये प्रमाण इन बच्चों को प्रभावित कर दें, जरूरी नहीं है। यह सही है कि ग्रंथ में लिखी बातों के प्रति इस धरती पर असीम श्रद्धा है। लिखने वाले महापुरुषों ने इस देश, काल, परिस्थिति में जो देखा, समझा और...
    November 17, 03:29 PM
  • संघर्ष कर रहे हैं तो याद रखें सफल होने के लिए ये सूत्र
    उज्जैन।इस दौर में बिना संघर्ष के कम ही लोगों को उपलब्धियां मिलेंगी और जिन्हें मिल जाएंगी वे उसे बहुत दिनों तक पचा नहीं सकेंगे। समस्या, परेशानी, संघर्ष को सहजता से लीजिए। अब इस स्तंभ में हम चर्चा कर रहे हैं श्रीरामचरित मानस के चौथे सोपान किष्किंधा कांड की। यह संघर्ष की कथा है। यहां न सिर्फ श्रीराम संघर्ष कर रहे हैं, बल्कि जितने पात्र आएंगे सब कहीं न कहीं किसी न किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं। श्रीराम व हनुमान बताते हैं कि संघर्ष एक जीवनशैली है। इसे बोझ, प्रतिकूलता, तनाव और परेशानी का कारण न...
    November 15, 03:50 PM
  • अपनी आदतों पर सब लोगों को ध्यान देना चाहिए, क्योंकि...
    उज्जैन।एक होता है हमारा स्वभाव और दूसरी होती है आदत। इन दोनों से मिलकर हमारे व्यक्तित्व का वह महत्वपूर्ण हिस्सा तैयार होता है, जिससे हम अपना सांसारिक जीवन चलाते हैं। स्वभाव तैयार करने के लिए भीतरी प्रयास करने पड़ते हैं। थोड़ा एकांत साधना पड़ता है। अपने भीतर उतरकर मन, हृदय व मस्तिष्क को टटोलना पड़ता है। भक्ति करने वालों के लिए भीतर उतरना थोड़ा आसान रहता है। कर्मकांड में उलझे लोगों को बाहर सुविधा रहती है। बाहर का सारा काम आदत से चलता है। इसलिए आदत पर टिके लोग बड़े कर्मकांडी बन जाते हैं। आदत...
    November 14, 01:57 PM
  • गुस्से पर काबू पाना हो तो कभी न भूलें ये दो बातें
    उज्जैन।क्या आपको गुस्सा बहुत आता है? ज्यादातर लोगों का जवाब रहता है, हां। आजकल किसी को कम गुस्सा आता ही नहीं है। जब भी आता है जमकर आता है। हां, प्रदर्शन में उसकी तीव्रता कम-ज्यादा हो सकती है। लोग क्रोध कम करने के लिए अनेक प्रयास करते हैं। सबसे सरल तरीका है योग। प्राणायाम द्वारा क्रोध नियंत्रित होता है, लेकिन फिर समय की दिक्कत है। अगर ऐसा है तो एक बात का अभ्यास बढ़ा दीजिए। हमारी बहुत सी आदतों की तरह क्रोध भी आदत ही है। चलिए, आदत से आदत को मारें। अपने भीतर क्षमा करने की आदत विकसित करें। क्षमा...
    November 11, 01:33 PM
  • पढ़ाई से बच्चों को लगता है डर तो ये काम करें....
    उज्जैन।बच्चों को पढ़ाई से डर क्यों लगता है? जिन्हें डर नहीं लगता उन्हें अरुचि होती है। कम बच्चे होते हैं जो स्वेच्छा से, समझ से, स्वयं पढ़ाई कर लेते हैं। माता-पिता दबाव बनाते हैं तब कोई बच्चा पढ़ाई करता है। शिक्षा को जब तक बाहरी दृष्टि से देखा जाएगा, ऐसा ही होगा। बच्चों को पढ़ाई-लिखाई से जोडऩे के लिए माता-पिता जितनी भी तकनीकें अपनाते हैं वे सब सांसारिक हैं। कॅरिअर ओरिएंटेड है, लाइफ ओरिएंटेड नहीं। चूंकि विद्यार्थी शिक्षा से अधूरे ढंग से जुड़ा है, इसलिए उसमें अरुचि और भय जाग जाता है। विद्यार्थी...
    November 10, 12:55 PM
  • मन में हमेशा अशांति रहती हो तो दूर करने के लिए अपनाएं ये तरीके
    उज्जैन।जब हम बाजार जाते हैं तो हमारी कोशिश रहती है अच्छी से अच्छी चीज ढूंढ़ी जाए। इसीलिए खरीदते समय खूबियों पर बहुत ध्यान देते हैं। खूबियों के चक्कर में आदमी कभी-कभी अपनी औकात से बाहर जाकर खर्च कर देता है। फिर यह तो क्वालिटी का युग है। लोग नारे की तरह यह घोषणा करते हैं कि दो पैसे भले ही ज्यादा लग जाएं, पर क्वालिटी चाहिए। क्वालिटी खोजने की इस आदत को खुद पर लागू करें। थोड़ा शांति से बैठकर अपने भीतर की खूबियों का विश्लेषण करें। जब ऊपर वाले ने हमें इस संसार में भेजा तो अपनी इच्छा से भेजा। इसी तरह...
    November 8, 02:46 PM
  • विचारों में आते हैं ऐसे परिवर्तन तो मिलती है सफलता
    उज्जैन।आज व्यावसायिक दृष्टिकोण से मनुष्य को यदि लाभ हुआ है तो एक बड़ी हानि भी हुई है। लाभ यह कि मनुष्य ने अपना, अपने से जुड़े लोगों का, क्षेत्र का विकास किया और नुकसान यह है कि भावनात्मक रूप से दूसरों के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता। जैसे ही दृष्टिकोण व्यावसायिक होता है, मनुष्य सबको वस्तु समझने लगता है। भावनात्मक संबंध बनते हैं अस्तित्व से। व्यावसायिक विकास रुकना नहीं चाहिए। हम खूब प्रगति करें, लेकिन केवल यही दृष्टि हो तो मनुष्य का भावनात्मक संतुलन बिगड़ जाता है। उसके भीतर एक अजीब सा असंतोष...
    November 7, 01:36 PM
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