Home >> Jeevan Mantra >> Jeene Ki Rah >> Suktiyon Ki Seekh
  • अपने चरित्र को संभाले रखने के लिए करें ये एक काम
    तस्वीरों का उपयोग केवल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। उज्जैन।विद्यार्थी जीवन में शिक्षा के साथ चरित्र का तालमेल योग्यता में दिव्यता लाता है। केवल शिक्षा योग्य बना सकती है। ऐसी योग्यता से अच्छा पद, धन या प्रतिष्ठा मिल सकती है, लेकिन साथ में अशांति, अवसाद, चिड़चिड़ापन और क्रोध बोनस अंकोंके रूप में जीवन की मार्कशीट में जुड़ जाएंगे। शिक्षण संस्थाओं के कैंपस में चरित्र को तो जैसे दफन ही कर दिया गया है। मौज-मस्ती इस दौर में होनी ही चाहिए, लेकिन यह भोग-विलास में बदल जाए, यह विद्यार्थी जीवन के...
    02:51 PM
  • संघर्ष के समय में भी खुश रहने के लिए अपनाएं ये सूत्र...
    उज्जैन।संघर्ष के बाद मिली उपलब्धि स्थायी होती है और उसका मजा कुछ अलग ही रहता है। इस समय हर व्यक्ति अपनी योग्यता को मांजने पर लगा है। किसी काम को करने के लिए जब आप पूरी ताकत लगा रहे होते हैं, तब दूसरा भी यही कर रहा होता है। इसीलिए प्रतिस्पर्धा खूब बढ़ गई है। इसलिए संघर्ष को जीवनशैली बना लें। हो सकता है जब संघर्ष शुरू हो आप अकेले रहें, लेकिन एक आदमी का संघर्ष बाद में कई लोगों का संघर्ष बन जाता है। संघर्ष की स्थिति आए तो पहले ठीक से उसका आकलन करिए। कितना उसमें भाग्य-दुर्भाग्य काम कर रहा है, स्थिति कौन...
    September 18, 02:26 PM
  • जिन युवाओं को सफलता चाहिए, उन्हें नहीं भूलना चाहिए ग्रंथों की ये सीख
    अच्छी वृत्ति से पाएं समस्या का समाधान उज्जैन।यह एक आदर्श वाक्य है कि हर समस्या के साथ उसका निदान भी आता है, लेकिन निदान को कैसे पकड़ा जाए, यह फिर एक समस्या है। शास्त्रों में मनुष्य के भीतरी स्वभाव को वृत्ति कहा गया है। यानी विचारों को क्रिया में बदलने वाली शक्ति। हर मनुष्य में अच्छी और बुरी वृत्ति है। महाभारत में कहा गया है, मैं धर्म को जानता हूं, परंतु धर्म में मेरी प्रवृत्ति नहीं हो रही है। मैं अधर्म को जानता हूं, परंतु उससे मेरी निवृत्ति नहीं हो रही है। हमारे भीतर की अच्छी वृत्ति हमसे...
    September 17, 04:24 PM
  • अपने अंदर की ये चीजें उपयोग करेंगे तो हमेशा सफल और स्वस्थ रहेंगे
    उज्जैन।यह प्रकृति पंच तत्वों से बनी है। आकाश, वायु, जल, अग्नि और पृथ्वी। ये जितने बाहर हैं, उतने ही हमारे भीतर भी मौजूद हैं। इनका संतुलन स्वास्थ्य है और असंतुलन बीमारी। सुंदरकांड में श्रीराम ने जब क्रोध दिखाया तो समुद्र डरा और बहुत ही दार्शनिक ढंग से क्षमा याचना की। तुलसीदासजी ने लिखा है, सभय सिंधु गहि पद प्रभु केरे। छमहु नाथ सब अवगुन मेरे।। गगन समीर अनल जल धरनी। इन्ह कइ नाथ सहज जड़ करनी। तव प्रेरित माया उपजाए। सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए।। काकभुशुण्डिजी ने कहा-हे गरुडज़ी सुनिए! समुद्र ने...
    September 15, 03:55 PM
  • अपने बच्चों को अच्छा बनाना चाहते हैं तो अपनाएं ये ग्रंथों की सीख
    उज्जैन।आजकल के बच्चों को यह बताना जरूरी है कि उनके पास सबसे महत्वपूर्ण चीज है जीवन। चूंकि उनका पूरा लालन-पालन और विकास भौतिक चीजों के आसपास होता है इसलिए वे यह भूल ही जाते हैं कि जीवन भी कुछ है। लगातार ऐसी स्थितियों में रहने के कारण अधिकांश बच्चे बड़े होने तक मशीन बना दिए जाते हैं। बच्चों के लालन-पालन में जब भी अवसर आए तो उन्हें यह अहसास दिलाएं कि यह जो मनुष्य शरीर उनके पास है यह जितना महत्वपूर्ण है उससे अधिक मूल्यवान है इसमें बसी आत्मा। वे शरीर के महत्व के साथ उसके भ्रम को भी जानें, लेकिन आत्मा...
    September 13, 03:48 PM
  • ऐसे पहचानें शरीर से बलवान और मजबूत दिखने वाले दुर्बल व्यक्ति को
    (राजा के सैनिक का प्रतिकात्मक फोटो) उज्जैन। जो लोग शरीर से शक्तिशाली दिखते हैं, वे वास्तव में शक्तिशाली हैं ही, यह समझ पाना बहुत मुश्किल है। कुछ लोग दिखने में तो शक्तिशाली होते हैं, लेकिन मन से दुर्बल होते हैं। मन से दुर्बल व्यक्ति यदि मजबूत और शक्तिशाली शरीर का स्वामी है, तब भी वह कुछ कर नहीं सकता है। ऐसे लोगों को पहचाने के लिए यहां एक कहानी बताई जा रही है। इस कहानी को पढ़कर आप आसानी से समझ सकते हैं कि मजबूत और शक्तिशाली शरीर वाले मन से दुर्बल व्यक्ति कैसे होते हैं। कहानी इस प्रकार है......
    September 13, 06:00 AM
  • संघर्ष कर रहे हैं तो इन चीजों का जरूर ध्यान रखें
    उज्जैन।जीवन गणित की तरह नहीं होता, जिसमें सबकुछ तय शुदा होता है। कभी भी परिणाम उसके फॉर्मूले के बाहर नहीं आते, लेकिन जीवन में सबकुछ तय नहीं होता। आज जो है जरूरी नहीं कि वैसा कल भी मिले। जीवन की सबसे अच्छी तुलना रसायन शास्त्र से हो सकती है। यह विभिन्न तत्वों के मिश्रण से मिलने वाले परिणाम का अध्ययन है। जीवन भी कई लोगों के मिश्रण से तैयार होता है, इसीलिए मनुष्य के जीवन का एक हिस्सा है संघर्ष। कब किसके जीवन में उतर आए कह नहीं सकते। कुछ लोगों का जीवन तो संघर्ष से ऐसे जुड़ जाता है कि उन्हें इसे जीवनशैली...
    September 12, 05:27 PM
  • वो लोग कभी दुखी नहीं होते जो जानते हैं ये तीन सूत्र
    उज्जैन।कहा जाता है विपरीत परिस्थितियों में अपना आत्मविश्वास न छोड़ें। मदद दूसरे लोग भी करेंगे, लेकिन खुद पर किए विश्वास में बड़ी ताकत होती है। किसी ने कहा है आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है। चलिए, आज इस पर विचार करें कि यह आत्मविश्वास आता कहां से है। अगर दूसरे दे सकते तो हम भेंट में ले लेते। आत्मविश्वास हमारे ही भीतर का बाय-प्रोडक्ट है। इसका सीधा संबंध मस्तिष्क से है। हमारे भीतर एक मन है, दूसरा हृदय है और तीसरा मस्तिष्क है। जब भी हम कोई काम करते हैं, हमारे शरीर के अलावा भीतर ये तीन चीजें भी सक्रिय...
    September 11, 04:04 PM
  • जब लेना हो कोई बड़ा निर्णय और लग रहा हो डर तो अपनाएं ये फॉर्मूले
    उज्जैन।अपने किए हुए के परिणाम को लेकर जागरुक रहें, लेकिन परेशान न हों। रिजल्ट आपके हित में आए इसकी इच्छा जरूर रखें, पर ऐसा न हो तो बहुत दुखी न हो। ये दुख कम हो सकता है इस भावना से कि हमारे अलावा इस ब्रह्माण्ड में ऐसी शक्ति है, जिसकी इच्छा चलती है। जैन संत सुधासागरजी व्यक्त करते हैं, जब कर्म उदय में आता है तो सुख की नींद नहीं सोने देता है। हम आज तो सुखी हैं, दूसरे क्षण वह सुख रहेगा कि नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। एक क्षण पहले कहा जा रहा था कि अयोध्या का राज श्रीराम के चरणों में समर्पित होगा। सूर्य जब...
    September 10, 02:54 PM
  • दुखों को दूर करना हो तो डाल लें ये आदत
    उज्जैन।सभी लोगों के जीवन में एक न एक बार ऐसा मौका आता है जब आप सही हों और लोग आपको गलत समझ रहे हों। बाहरी हालात इतने उलझे हुए हों कि खुद को सच साबित करने के लिए आपको बड़ी ताकत लगानी पड़ती है। कई बार हम खुद ही इतना उलझ जाते हैं कि कोई ओर छोर ही नजर नहीं आता। घुटन के इस माहौल में अपने ही लोगों द्वारा पूछे गए साधारण प्रश्न भी क्रोध पैदा कर देते हैं। ऐसे में मनुष्य या तो चिड़चिड़ा हो जाता है या फिर उसकी चिंतन प्रक्रिया इतनी तेज हो जाती है कि वह कोई शारीरिक बीमारी पाल लेता है। कभी-कभी तो ऐसे लोग कब घर...
    September 8, 04:02 PM
  • नीतियां- ये चीजें बता देती हैं, हमारा चरित्र कैसा है
    उज्जैन। हम अपने जीवन में जिन चीज़ों की ख्वाहिश रखते हैं, उसी से हमारे चरित्र के बारे में पता लगाया जा सकता है। ये चीजें ही बता देती हैं कि हमारी सोच कैसी है और हम क्या-क्या कर सकते हैं, हमारा आचरण कैसा है। हम जितना भी पैसा कमाते हैं उसकी तुलना जूतों से की जा सकती है। जूता छोटा है तो वे पैरों को काटने लगेगा। जूते का आकार बड़ा है तो लड़खड़ाकर गिर भी सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के पास पैसा कम है तो वह कष्टों का सामना करता है। यदि किसी व्यक्ति के पास पैसा अधिक है तो वह गलत आदतों का शिकार हो सकता है, अधिक धनी...
    September 7, 12:40 PM
  • जब ब्रह्मा के पुत्र ने दक्षिणा में पार्वती से मांगा शिवजी को
    एक बार देवी पार्वती के मन में इच्छा हुई कि उन्हें एक ऐसा पुत्र हो, जो सभी देवताओं में प्रथम पूजन पाए। शिवजी को इच्छा बताई तो उन्होंने पुष्पक व्रत का अनुष्ठान करने के लिए कहा। पार्वती ने व्रत के अनुष्ठान का संकल्पकर यज्ञ में सम्मिलित होने के लिए समस्त देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया। शिवजी ने सभी देवताओं का सत्कार किया। ब्रह्माजी के पुत्र सनत कुमार के पौरोहित्य में यज्ञ निर्विघ्न संपन्न हुआ। विष्णु भगवान ने आशीर्वाद दिया, देवी! आपके संकल्प के अनुसार आपको एक पुत्र की प्राप्ति होगी। तभी सनत...
    September 6, 06:00 AM
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