Home >> Jeevan Mantra >> Jeene Ki Rah >> Suktiyon Ki Seekh
  • प्रेरक कहानियां: चमगादड़ सभी पशु और पक्षियों से अलग रहते हैं, जानिए क्यों
    स्वार्थी व्यक्ति सदा रहते हैं मित्रहीन प्राचीन लोककथा है। एक बार पशुओं और पक्षियों में विवाद हो गया। दोनों स्वयं को एक-दूसरे से अधिक ताकतवर बता रहे थे। दोनों पक्षों के बीच तर्क-वितर्क हो रहा था, जिसने कुछ समय बाद संघर्ष का रूप ले लिया। निर्णय कराने वाला कोई नहीं था। अत: दोनों पक्ष अपनी पूरी ताकत से लड़ने लगे। चमगादड़ों ने इस लड़ाई में किसी का पक्ष नहीं लिया। उन्होंने सोचा, हम पक्षियों की तरह उड़ते हैं, अत: पक्षियों में शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर हमारे पक्षियों जैसे पंख नहीं होते और हम उनकी तरह...
    April 19, 12:05 AM
  • जीवन में आनंद और सफलता तो इस अभिनय से ही आएंगे...
    यह बहस बहुत पुरानी है कि यदि सबकुछ होना ही है तो फिर हम अतिरिक्त प्रयास क्यों करें। कितना भाग्य, कितना कर्म, इसका झगड़ा कभी खत्म नहीं होगा। यह मामला सुलझेगा समझ से। एक घटना याद करिए। कहते हैं ऋषि वाल्मीकि ने दिव्य दृष्टि से रामायण श्रीराम के जन्म के पूर्व ही लिख दी थी। फिर आए राम। उन्हें मालूम था कि उनकी लीला में कौन-कौन से दृश्य पूर्व नियोजित हैं। शाप और वरदान के कुछ प्रसंग घट चुके थे। अत: वे समझ गए थे कि सबकुछ नियत है और सब तय है तो राम को क्या करना है। राम को सिर्फ अपनी भूमिका निभानी थी। इसी...
    April 16, 01:43 PM
  • जानिए वास्तव में क्या हैं भगवान श्री हनुमान...
    जन्म मृत्यु के बीच में जीवन नामक महत्वपूर्ण घटना घटती है। जन्म तो जानवरों का भी होता है, लेकिन उनमें जीवन नहीं घटता। यह संभावना सिर्फ मनुष्य में है। जन्म को जीवन में बदलने का एक उदाहरण हनुमानजी का है। कई लोग पूछते हैं कि हनुमानजी मनुष्य हैं या बंदर। कोई उन्हें मानने को तैयार नहीं है तो कोई उन्हें लेकर अनुभूति के कई प्रसंग सुना सकता है। कहीं वे सेवा के प्रतिमान हैं तो कहीं जीवन प्रबंधन गुरु। उन्हें वानर कहा गया है, वन में रहने वाले नर। इसीलिए वे मनुष्य की श्रेष्ठतम स्थिति का प्रतीक हैं। वे पशु की...
    April 15, 01:25 PM
  • भोजन और जीवन दोनों का स्वाद बढ़ता है इन दो बातों से...
    उज्जैन। भोजन का आनंद दो बातों में है स्वाद और परोसगारी में। स्वाद का संबंध निर्माण से है और परोसगारी का आग्रह से। वही बात हमारे व्यक्तित्व निर्माण से जुड़ी है। बाहरी जगत के व्यक्तित्व निर्माण के अपने तरीके हैं इनसे सुख, सफलता मिलती भी है, लेकिन शांति के मामले में ये बाहरी साधन मौन है। व्यक्तित्व निर्माण की एक भीतरी प्रक्रिया भी है जिसे आध्यात्मिक कहते हैं। यहाँ आदमी केवल विचारों, सिद्धान्तों से तैयार नहीं होता, यहाँ वह ध्यान से गुजरता है। ध्यान के अनुभव को जीने वाले लोग अपने व्यक्तित्व को...
    April 14, 08:25 AM
  • ये 5 कहानियां आपके सोचने और समझने का तरीका बदल सकती हैं
    अकबर को वापस लेना पड़ा विचित्र आदेश एक दिन बादशाह अकबर जब दरबार में आए तो बहुत क्रोध में थे। सभी बादशाह के गर्म मिजाज को भांपकर चुप ही रहे। दरबार समाप्त होने पर बीरबल ने अकबर से गुस्से की वजह जाननी चाही तो वे बोले, मेरा दामाद बहुत दुष्ट है। मुझे अपनी बेटी से मिले एक साल हो गया, किंतु वह उसे भेजता ही नहीं है। बीरबल ने कहा, जहांपनाह! इसमें गुस्से की क्या बात है? मैं आज ही आपकी बेटी को लाने के लिए आदमी भेज देता हूं। अकबर बोले, आदमी तो मैंने भी भेजा था, किंतु दामाद ने उसे खाली हाथ लौटा दिया। वास्तव में...
    April 12, 02:14 PM
  • किसी काम को करने से पहले ध्यान रखेंगे ये बातें तो कभी नहीं आएगा संकट
    उज्जैन। बहुत पुरानी बात है। चार विद्वान ब्राह्मण मित्र थे। एक दिन चारों ने संपूर्ण देश का भ्रमण कर हर प्रकार का ज्ञान अर्जित करने का निश्चय किया। चारों ब्राह्मणों ने चार दिशाएं पकड़ीं और अलग-अलग स्थानों पर रहकर अनेक प्रकार की विद्याएं सीखीं। पांच वर्ष बाद चारों अपने गृहनगर लौटे और एक जंगल में मिलने की बात तय की। चूंकि चारों परस्पर एक-दूसरे को अपनी गूढ़ विद्याओं व सिद्धियों को बताना चाहते थे, अत: इसके लिए जंगल से उपयुक्त अन्य कोई स्थान नहीं हो सकता था। जब चारों जंगल में एक स्थान पर एकत्रित हुए...
    April 10, 01:42 PM
  • तेनालीराम में बनाई अंगों की ऐसी तस्वीरें और राजा को समझ आईं ये बातें
    उज्जैन। पुराने समय में एक राजा थे कृष्णदेवराय। उनके दरबार में तेनालीराम राज विदुषक थे। तेनालीराम को अपनी चतुराई और वाकपटुता के कारण राजा के दरबार में राज विदुषक की पदवी मिली थी। तेनालीराम का परिवार आंध्र प्रदेश के गुण्टूर जिले के एक गांव में हुआ था। तेनालीराम की कहानियां आज भी काफी प्रसिद्ध हैं। ये कहानियां काफी मनोरंजक और तेनालीराम की चतुराई से भरपूर हैं। यहां जानिए तेनालीराम की एक खास कहानी... एक बार राजा कृष्णदेवराय ने एक बार अपने महल के लिए एक चित्रकार नियुक्त किया। उसने भांति-भांति के...
    April 10, 12:58 PM
  • महाभारत के इन पात्रों से सीखिए, अपने बच्चों को कैसे बनाए महान
    उज्जैन। समाज और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण इकाई है परिवार जबकि परिवार की शुरुआत होती है दाम्पत्य से। परिवार की सम्पत्ति होती है संतान। अगर यह कहें कि संतान के बिना समाज का कोई अस्तित्व ही नहीं है तो कोई अचरज नहीं है। अपना परिवार बढ़ाना या संतान का उत्पादन करना सिर्फ व्यक्तिगत ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह कार्य साधारण नहीं बल्कि बड़ा ही महत्वपूर्ण और चुनौती वाला है। किसी भी युवक या युवति को माता-पिता बनने की जिम्मेदारी क ो उठाने के लिये आगे आने से पहले हर तरह से...
    April 3, 04:20 PM
  • पति-पत्नी का ऐसा रिश्ता सबसे ज्यादा खुशहाल है जिसमें ये पांच बातें हों...
    गृहस्थी कौन सी सबसे ज्यादा सुखी मानी जाती है। इस बात को लेकर लंबी बहस हो सकती है लेकिन सच तो यही है कि गृहस्थी वो ही सबसे ज्यादा सुखी है जहां प्रेम, त्याग, समर्पण, संतुष्टि और संस्कार ये पांच तत्व मौजूद हों। इनके बिना दाम्पत्य या गृहस्थी का अस्तित्व ही संभव नहीं है। अगर इन पांच तत्वों में से कोई एक भी अगर नहीं हो तो रिश्ता फिर रिश्ता नहीं रह जाता, महज एक समझौता बन जाता है। गृहस्थी कोई समझौता नहीं हो सकती। इसमें मानवीय भावों की उपस्थिति अनिवार्य है। आइए, भागवत में चलते हैं, देखिए महान राजा...
    April 1, 12:26 PM
  • अपने काम में ये तीन बातें शामिल करेंगे तो मिल जाएगी सफलता
    कई बार हमें अपने कमों का पूरा परिणाम नहीं मिलता। ऐसी स्थितियां सिर्फ व्यक्तित्व में झुंझलाहट ही पैदा करती हैं। जब व्यक्तित्व में तीखापन आ जाता है तो हर बात पर फिर क्रोध का आवेग आना शुरू हो जाता है। अपने कर्मों की प्लानिंग कीजिए। सिर्फ काम मत कीजिए। अपने काम में तीन चीजों का समावेश कीजिए। अधिकांश लोग बिना मार्गदर्शन के ही लक्ष्य सिद्धि के लिए निकल पड़ते हैं। ऐसे में असफलता ही मिलनी है। जब भी कोई लक्ष्य साधने निकले तो आपको तरीका पता हो। जीवन की सफलता के तीन सूत्र हैं अगर इन्हें ध्यान में रखा...
    March 31, 11:30 AM
  • सीखिए रावण से, कैसे बचा जा सकता है अपनी बर्बादी से...
    जब कभी हम कोई कर्म करते हैं तो यह नहीं सोचते कि हमारे परिवार पर इसका क्या असर होगा। अक्सर नासमझी या अनदेखी में कई काम ऐसे हो जाते हैं जो हमने किए खुद के लिए थे, परिणाम परिवार को भुगतना पड़ता है। जीवन में परिवार की वरीयता शेष चीजों से ऊपर रहे। परिवार पूंजी है, रिश्ते हमारी सम्पत्ति। जब भी कोई काम करें तो यह अनुमान पहले ही लगा लें कि इससे आपकी इस जायदाद पर तो कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। अहंकार जब परिवार में प्रवेश करता है तो फिर वहां परिवार गौण और व्यक्तिवाद हावी हो जाता है। परिवार का हर सदस्य केवल...
    March 29, 09:10 AM
  • हनुमानजी से सीखिए, कम समय और मेहनत में कैसे पाएं ज्यादा परिणाम
    आज का दौर कम समय में अधिक काम करने का है, बिना ज्यादा थके अधिकतम परिणाम पाने की प्रतिस्पर्धा है। टाइम मैनेजमेंट आज के दौर की सबसे बड़ी मांग है। किसी भी कर्मचारी से कंपनी तभी खुश है जब वह कम प्रयासों और न्यूनतम समय में अधिकतम परिणाम देता है। सुंदरकाण्ड में प्रसंग आता है हनुमानजी जैसे ही लंका के लिए चले सबसे पहले उड़ते हुए आंजनेय के सामने सुरसा नामक राक्षसी सामने आती है। इन्हें खाने के लिए उस राक्षसी ने अपना मुंह बड़ा करके खोला तो इन्होंने भी अपने रूप को बड़ा कर लिया। फिर छोटे बनकर उसके मुंह में...
    March 28, 10:44 AM
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