Home >> Jeevan Mantra >> Jeene Ki Rah >> Suktiyon Ki Seekh
  • धन कमाएं, लेकिन सही समय पर और खर्च करते समय ध्यान रखें ये बातें
    हमारा देश साधना प्रधान देश है। हम सर्वधर्म में जीते हैं। धर्म में सत्संग का बड़ा महत्व है इस कारण हमारे साधनारत लोग ज्यादातर मौकों पर साधना और सत्संग पर ही टिके रहे। वे भूल ही गए कि इसकी श्रेष्ठतम परिणति सेवा होना चाहिए। धार्मिक व्यक्ति की विशेषता होना चाहिए कि वह दूसरों की पीड़ा को समझे। परपीड़ा न समझना एक तरह से अधर्म ही है। असल में हमने दूसरे की पीड़ा, दु:ख मिटाने के लिए जो सेवा हाथ में ली थी वह कर्मकाण्ड जैसी ही रही। लोगों ने सेवा को समय बिताने का साधन और अपने अहंकार के पोषण का माध्यम बना...
    12:05 AM
  • हनुमानजी से सीखें, हमारा जीवन कैसा होना चाहिए
    जीवन नीरस नहीं होना चाहिए। रसाभोर रहने का अर्थ हम हनुमानजी से सीख सकते हैं। श्रीराम की कथा सुनने में इन्हें विशेष रस आता है। आप श्रीराम, लखनजी और सीताजी के मन में बसे हुए हैं। हनुमानचालीसा की आठवीं चौपाई में उनके लिए लिखा है प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। रामकथा को हनुमानजी केवल सुनते ही नहीं हैं, रसिया रसिक भी हैं। कथा तीन तरीके से सुनी जाती है। श्रोता समझदार हो, हरि का दास हो और रसिक हो। वे श्रोता तो बहुत अच्छे हैं ही, उतने ही अच्छे वक्ता भी हैं। सामान्यत: ऐसा होता है कि जो...
    August 1, 12:05 AM
  • ये बातें ध्यान रखेंगे तो किसी व्यक्ति को परखने में गलती नहीं होगी
    उज्जैन। एक राजमहल के द्वार पर एक वृद्ध भिखारी आया। द्वारपाल से उसने कहा, भीतर जाकर राजा से कहो कि तुम्हारा भाई मिलने आया है। द्वारपाल ने समझा कि शायद कोई दूर के रिश्ते में राजा का भाई हो। सूचना मिलने पर राजा ने भिखारी को भीतर बुलाकर अपने पास बैठा लिया। उसने राजा से पूछा, कहिए बड़े भाई! आपके क्या हालचाल हैं? राजा ने मुस्कराकर कहा, मैं तो आनंद में हूं। आप कैसे हैं? भिखारी बोला, मैं जरा संकट में हूं। जिस महल में रहता हूं, वह पुराना और जर्जर हो गया है। कभी भी टूटकर गिर सकता है। मेरे बत्तीस नौकर थे, वे भी एक...
    July 30, 06:11 PM
  • नौकरी में सबको आती हैं ये चार समस्याएं, ऐसे करें समाधान
    उज्जैन. कहते हैं परेशानियों का नाम ही जिंदगी है, लेकिन थोड़ी-सी परेशानियों से लोग घबरा भी जाते हैं। युवाओं में ये घबराहट आम है। थोड़ी-सी परेशानी उन्हें भीतर तक झकझोर देती है। कॉरपोरेट कल्चर में आजकल नौकरी युवाओं के लिए कई समस्याएं पैदा कर देती हैं। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में सफलता कम, परेशानियां ज्यादा हैं। कुछ समस्याएं ऐसी हैं, जिनका सामना लगभग हर युवा को करना ही पड़ता है। ये हैं कम समय में अधिक काम का दबाव। रातोंरात वर्क प्रोफाइल चेंज हो जाना। योग्यता के अनुसार काम नहीं मिलना। बेहतर...
    July 26, 04:07 PM
  • प्रेरक कहानी- बंदर ने एक राजा को सिखाया अच्छाई का पाठ
    जातक कथा के मुताबिक किसी वन में नदी किनारे मीठे और रसीले आमों का वृक्ष था। आमों का लुत्फ उस वृक्ष पर रहने वाले बंदर उठाते थे। बंदरों के समूह का चतुर मुखिया गर्मी की शुरुआत में नदी के ऊपर फैली टहनियों पर लगे बौर नष्ट करवा देता। वह कहता, यदि इन टहनियों पर आम लगकर नदी में गिरे तो मानवों तक पहुंच जाएंगे। फिर वे इस वृक्ष के सारे फल ले जाएंगे। हालांकि, एक साल कुछ बौर रह गए। उनमें आम लगे और वे पानी में गिरे। वे जिन मछुआरों को मिले उनके मुखिया ने कुछ आम राजा को भेंट किए। राजा ने भी इतने रसीले आम पहले कभी नहीं...
    July 24, 02:19 PM
  • इन 7 बातों से पति-पत्नी का रिश्ता हो जाता है और गहरा
    उज्जैन।दाम्पत्य कहते किसे हैं? क्या सिर्फ विवाहित होना या पति-पत्नी का साथ रहना दाम्पत्य कहा जा सकता है। पति-पत्नी के बीच का ऐसा धर्म संबंध जो कर्तव्य और पवित्रता पर आधारित हो। इस संबंध की डोर जितनी कोमल होती है, उतनी ही मजबूत भी। जिंदगी की असल सार्थकता को जानने के लिये धर्म-अध्यात्म के मार्ग पर दो साथी, सहचरों का प्रतिज्ञा बद्ध होकर आगे बढऩा ही दाम्पत्य या वैवाहिक जीवन का मकसद होता है। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तरों पर स्त्री और पुरुष दोनों ही अधूरे होते हैं।...
    July 19, 01:18 PM
  • कोई भी काम करते समय ध्यान रखें ये बातें वरना बढ़ने लगती हैं कामनाएं
    फोटो-पं. विजयशंकर मेहता जब भी कोई काम करें तो शरीर, मन और आत्मा की भूमिका दिमाग में जरूर रखें। हम बाहरी सांसारिक वस्तुओं के प्रति व्यक्तियों को लेकर जागरूक रहते हैं, लेकिन हमारी हर गतिविधि में इन तीनों का बड़ा योगदान है। खासतौर पर मन का, क्योंकि किसी भी कर्म में मन कामना भर देता है। मन की क्षमता अद्भुत होती है। यदि उसका ठीक से उपयोग नहीं हुआ है तो वह कामनाओं की आंधी चला देता है। जब हम कोई कर्म करते हैं और उसमें मन यदि सक्रिय रहे तो पहला परिणाम फल पर आता है। दूसरा परिणाम उस फल से मिलने वाली खुशी या...
    July 15, 12:07 PM
  • गुस्से को दबाएं नहीं, ऐसे करें उसका उपयोग
    उज्जैन। सर्वश्रेष्ठ सद्गुणी व्यक्ति में यदि दुर्गुण ढूंढ़ें तो हो सकता है आपको असफलता हाथ लगे। इसके बावजूद एक दुर्गुण मिलने की आशंका रहेगी। आज की जीवनशैली में सबसे ज्यादा दिक्कत इसी दुर्गुण के कारण है और वह है क्रोध। बच्चे से बूढ़े तक, अमीर से गरीब तक, आदमी हो या औरत सबको क्रोध ने अपनी चपेट में ले रखा है। यह जानते हुए भी कि क्रोध कई बीमारियों को जन्म देता है, लोग क्रोध करने से नहीं चूकते। क्रोध का पहला नुकसान तो मनुष्य स्वयं का करता है, फिर परिवार व समाज में, अपने व्यावसायिक क्षेत्र में संबंधों...
    July 11, 08:22 AM
  • पुण्यतिथि- जानिए स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी रोचक बातें और प्रेरक प्रसंग
    उज्जैन। आज स्वामी विवेकानन्द की पुण्यतिथि है। इनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को हुआ था और 4 जुलाई1902को ध्यानावस्था में ही महासमाधि ले ली थी। वे विश्व विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। स्वामी विवेकानंद का वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। सन्1893में अमेरिकास्थितशिकागोमें विश्व धर्म महासभा आयोजित की गई थी, इस सभा में विवेकानंद ने भारत की ओर सेसनातन धर्मका प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने भाषण की शुरुआत मेरे अमरीकी भाइयों एवं बहनों के साथ की थी, इसी प्रथम वाक्य ने सभी का दिल जीत लिया था।...
    July 4, 12:05 PM
  • बच्चों के जिद्दी स्वभाव को सुधारने के लिए याद रखें ये बात
    उज्जैन। बच्चों और माता-पिता के बीच में कई बातों का संबंध होता है। उनमें से दो बातें इस संबंध को बहुत प्रभावित करती हैं और वे हैं हां या ना कहना। बच्चों की किसी भी मांग पर हां या ना कहने में बहुत ज्यादा सावधानी रखें, क्योंकि ये दो छोटे से शब्द भविष्य निर्माण की नींव हैं। बच्चों का लालन-पालन अनुशासन, समर्थन, प्रोत्साहन और अपनापन मांगता है। बालमन के पास परिपक्व विवेक नहीं होता। इसलिए माता-पिता द्वारा किए जा रहे हां और ना का अर्थ नहीं समझ पाता। आप अपने इस हां-ना के निर्णय को उसे ठीक से समझाएं। यदि आप...
    June 30, 02:50 PM
  • जानिए कौन बोलता है झूठ और किसकी वाणी में होता है सत्य
    उज्जैन। किसी बात को प्रस्तुत करने में केवल शब्द शिल्प ही काम नहीं आता। आज का समय सुंदर प्रस्तुति का समय है। किसी व्यक्ति, स्थान, स्थिति का वर्णन करते समय अपनी पूरी कल्पनाशक्ति उसमें लगा दें। आपकी वाणी में उपन्यासकार और नाटककार दोनों उतरने चाहिए। ध्यान रखिए इस समय लोग अच्छा सुनने के लिए तरस रहे हैं। आपकी कल्पनाशीलता, वाणी की मिठास, विचारों की शृंखला, शब्दों का चयन आपके व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाएगा। यह अभ्यास इसलिए भी करिए कि जब कभी सत्य को, सही बात को व्यक्त करना है तो वह प्रभावशाली ढंग से...
    June 28, 08:08 AM
  • Day against Drug - आखिर कोई भी व्यक्ति ड्रग लेने को मजबूर क्यों होता है ?
    फोटो - डेमो पिक। उज्जैन।आज, 26 जून 2014 को वर्ल्ड डे अगेंस्ट ड्रग्स यानी नशे के खिलाफ विश्व भर में जागरुकता लाने का दिन है। अपनी जेब खाली किए बिना भी आप महसूस कर सकते हैं कि ड्रग्स लेने वालों के लिए सामाजिक आध्यात्मिक हल। आखिर कोई भी व्यक्ति ड्रग लेने को मजबूर क्यों होता है? इसके चार कारण हो सकते हैं:- 1. मीडिया के दबाव की वजह से। 2. बुरी संगति की वजह से। 3. रोमांच और साहस की भावना लाने के लिए। 4. दुख और निराशा दूर करने के लिए। 5 संकोच छोड़ने के लिए और परफोर्म करने के लिए हांलाकि कोई भी व्यक्ति ड्रग रूपी...
    June 26, 12:29 PM
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