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Saraswati Mata: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Religion Bhaskar | Nov 22, 2016, 17:31 IST

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Saraswati Mata: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Saraswati Mata: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

माता सरस्वती हिंदू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं। इन्हें विद्या, बुद्धि, संगीत व कला की देवी भी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, ये सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की पत्नी हैं। माघ शुक्ल पंचमी (वसंत पंचमी) को इनका प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। इस दिन शिक्षा संस्थानों आदि में माता सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है। देवी सरस्वती के अनेक नाम हैं जैसे- शारदा, शतरूपा, वीणावादिनी, वीणापाणि, वाग्देवी, वागेश्वरी, भारती आदि। मान्यता है कि महाकवि कालिदास, वरदराजाचार्य, वोपदेव आदि सरस्वती उपासना के सहारे उच्च कोटि के विद्वान् बने थे।

Saraswati Mata : आरतियां

श्री सरस्वती की आरती

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। श्री सरस्वती देवी की आरती ऊँ जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता।। ऊँ जय सरस्वती माता। चन्द्रवदीन पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी।। ऊँ जय सरस्वती माता। बाएँ कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गले मोतियन माला।। ऊँ जय सरस्वती माता। देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया।। ऊँ जय सरस्वती माता। विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह, अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो।। ऊँ जय सरस्वती माता। धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्दर करो।। ऊँ जय सरस्वती माता। माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे । हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे।। ऊँ जय सरस्वती माता।

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Saraswati Mata : पूजन की विधि

श्री सरस्वती पूजन की सरल विधि

सामग्री मां सरस्वती की मूर्ति, चावल, कुमकुम, धूप, दीपक, बत्ती, दूध, दही, घी, शहद, शकर, साफ जल, सरस्वती मां के लिए वस्त्र, सफेद फूल, नैवेद्य (मिठाई और फल), अष्टगंध। सकंल्प पूजन शुरूकरने से पहले सकंल्प लें। संकल्प करने से पहले हाथों मेे जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें। संकल्प का उदाहरण जैसे 21/4/2015 कोश्री सरस्वती पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं( अपना नाम बोलें) विक्रम संवत् 2072 को, वैशाख मास के तृतीया तिथि को मंगलवार के दिन, कृतिका नक्षत्र में, भारत देश के मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन शहर में महाकालेश्वर तीर्थ मेंइस मनोकामना से(मनोकामना बोलें)श्री सरस्वती का पूजन कर रही / रहा हूं। श्रीसरस्वती पूजनकी सरलविधि सबसे पहले मूर्ति में माता सरस्वती आवाहन करें। आवाहन यानी कि बुलाना। माता सरस्वती को अपने घर बुलाएं। माता सरस्वती को अपने अपने घर में सम्मान सहित आसन दें। अब माता सरस्वती को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शकर) से और फिर से जल से स्नान कराएं। अब माता सरस्वती को वस्त्रअर्पित करें।। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। पुष्पमाला पहनाएं। फिर तिलक करें। तिलक के लिए अष्टगंध का प्रयोग करें। अब धूप व दीप अर्पित करें। माता सरस्वती को सफेद फूल अर्पित करें। 11 या 21 चावल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाए। आरती करें। आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नैवेद्य (भोग) अर्पित करें। सरस्वती पूजन के दौरन “ऊँ ऐं सरस्वतयै नमः” इस मंत्र का जप करते रहें।

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Saraswati Mata : मंत्र और स्तुतियां

देवी सरस्वती पूजन के सरल मंत्र

देवीसरस्वती पूजन के सरल मंत्र देवी सरस्वती की पूजन ज्ञान और बुद्धि को बढ़ाती हैं। विधार्थी जीवन में रहते हुए सरस्वती देवी का पूजन किया जाना श्रेष्ठ विद्या की प्राप्ति कराता है। शास्त्रों में देवी सरस्वती की आराधना के लिए कई मंत्र हैं। जिनमें से प्रमुख व सरल मंत्र इस प्रकार है। सरस्वती मूल मंत्र ऊँ सरस्वत्यै नमः। सरस्वती मंत्र ऊँ ऐं सरस्वत्यै नमः। ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः। सरस्वती गायत्री मंत्र ऊँ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्रयै धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात। ऊँ वाग देव्यै विद्महे काम राज्या धीमहि तन्नो सरस्वतीः प्रचोदयात। स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा। परीक्षा भय निवारण हेतु ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि स्वाहा।

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Spiritual Quotes

  • धन्य हैं वो लोग जिनके शरीर दूसरों की सेवा करने में नष्ट हो जाते हैं - भगवान गौतम बुद्ध

  • कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिये जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों। ऐसी मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी - चाणक्य

  • सहिष्णुता के अभ्यास में, आपका शत्रु ही आपका सबसे अच्छा शिक्षक होता है - दलाई लामा

  • उस व्यक्ति ने अमरत्त्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता - स्वामी विवेकानंद

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