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Lord Surya: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Religion Bhaskar | Nov 10, 2016, 17:42 IST

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Lord Surya: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Lord Surya: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

भगवान सूर्यदेव की माता अदिति व पिता महर्षि कश्यप हैं। अदिति का पुत्र होने से इन्हें आदित्य भी कहते हैं। सूर्यदेव का विवाह देवशिल्पी विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ है। यजुर्वेद ने सूर्य को भगवान का नेत्र कहा गया है। सूर्यदेव व संज्ञा के दो पुत्र व एक पुत्री बताए गए हैं, ये हैं वैवस्वत मनु व यमराज तथा यमुना। सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण संज्ञा ने अपनी छाया उनके पास छोड़ दी और स्वयं तप करने लगीं। सूर्यदेव व संज्ञा की छाया से शनिदेव, सावर्णि मनु और तपती नामक कन्या हुई। सूर्यदेव को पता चला कि संज्ञा घोड़ी के रूप में तप कर रही है तो वे भी उसी रूप में उनके पास पहुंचे। इसी से अश्विनकुमारों का जन्म हुआ। त्रेतायुग में कपिराज सुग्रीव और द्वापर युग में महारथी कर्ण भगवान सूर्य के अंश से ही उत्पन्न हुए थे।

Lord Surya : आरतियां

सूर्य देव की आरती

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। श्री सूर्यदेव की आरती जय कश्यप नन्दन, ऊँ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥ ऊँ जय कश्यप नन्दन। जय सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी। दुखहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥ ऊँ जय कश्यप नन्दन। जय सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली। अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥ ऊँ जय कश्यप नन्दन। जय सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी। विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥ ऊँ जय कश्यप नन्दन। जय कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा। सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥ ऊँ जय कश्यप नन्दन। जय नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी। वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥ ऊँ जय कश्यप नन्दन। जय सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै। हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥ ऊँ जय कश्यप नन्दन।

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Lord Surya : पूजन की विधि

श्री सूर्य देव की​ पूजन विधि

सामग्री कुमकुम या लाल चंदन, लाल फूल, चावल, दीपक, तांबे की थाली, तांबे का लोटा विधि सूर्य देव के रोजाना किए जाने वाले पूजन में आवाहन, आसन की जरुरत नहीं होती है। सूर्य ऐसे देवता हैं जो प्रत्यक्ष ही दिखाई देते हैं। उगते हुए सूर्य का पूजन उन्नतिकारक होता हैं। इस समय निकलने वाली सूर्य किरणों में सकारात्मक प्रभाव बहुत अधिक होता है। जो कि शरीर को भी स्वास्थय लाभ पंहुचाती हैं। श्री सूर्यदेव की​ पूजन विधि सूर्य पूजन के लिए तांबे की थाली और तांबे के लोटे का उपयोग करें। लाल चंदन और लाल फूल की व्यवस्था रखें। एक दीपक लें। लोटे में जल लेकर उसमें एक चुटकी लाल चंदन का पाउडर मिला लें। लोटे में लाल फूल भी डाल लें। थाली में दीपक और लोटा रख लें। अब ऊँ सूर्याय नमः मंत्र का जप करते हुए सूर्य को प्रणाम करें। लोटे से सूर्य देवता को जल चढ़ाएं। सूर्य मंत्र का जप करते रहें। इस प्रकार से सूर्य को जल चढ़ाना सूर्य को अर्घ प्रदान करना कहलाता है। ऊँ सूर्याय नमः अर्घं समर्पयामि कहते हुए पूरा जल समर्पित कर दें। अर्घ समर्पित करते समय नजरें लोटे के जल की धारा की ओर रखें। जल की धारा में सूर्य का प्रतिबिम्ब एक बिन्दु के रूप में जल की धारा में दिखाई देगा। सूर्य को अर्घ समर्पित करते समय दोनों भुजाओं को इतना ऊपर उठाएं। कि जल की धारा में सूर्य का प्रतिबिंब दिखाई दे। सूर्य देव की आरती करें। सात प्रदक्षिणा करें व हाथ जोड़कर प्रणाम करें।

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Lord Surya : मंत्र और स्तुतियां

​सूर्य दर्शन मन्त्र

सूर्य दर्शन मन्त्र सुबह जब भी प्रथम बार सूर्य दर्शन हो । तब इस मंत्र का जप करना सूर्य देव को प्रसन्न करता है। कनकवर्णमहातेजं रत्नमालाविभूषितम् । प्रातः काले रवि दर्शनं सर्व पाप विमोचनम् ।।

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Spiritual Quotes

  • किसी से किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता नहीं है। आप स्वयं में जैसे हैं, एकदम सही हैं, खुद को स्वीकारिए - ओशो

  • हमारी प्रार्थना बस सामान्य रूप से आशीर्वाद के लिए होनी चाहिए, क्योंकि भगवान जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है - सुकरात

  • कुछ सच्चे , इमानदार और उर्जावान पुरुष और महिलाएं ; जितना कोई भीड़ एक सदी में कर सकती है उससे अधिक एक वर्ष में कर सकते हैं - स्वामी विवेकानंद

  • एक अनपढ़ व्यक्ति का जीवन उसी तरह से बेकार है जैसे की कुत्ते की पूँछ, जो ना उसके पीछे का भाग ढकती है ना ही उसे कीड़े-मकौडों के डंक से बचाती है। - चाणक्य

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