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Lord Rama: Shree Ram आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Religion Bhaskar | Nov 18, 2016, 19:25 IST

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Lord Rama: Shree Ram आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Lord Rama: Shree Ram आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

धर्म ग्रंथों के अनुसार, श्रीराम भगवान विष्णु के 7वे अवतार माने गए हैं। इनका जन्म त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ के घर हुआ था। इनकी माता का नाम कौशल्या था। पिता की आज्ञा मानते हुए 14 साल वन में रहे। इस दौरान इन्होंने अनेक राक्षसों का वध किया। राक्षसों का राजा रावण जब इनकी पत्नी सीता को छल से उठा ले गया तो इन्होंने वानरों की व भालुओं की सहायता से उसका अंत किया। श्रीराम ने अपने जीवन में हर क्षेत्र में एक मर्यादा स्थापित की, इसलिए इन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है।

Lord Ram : आरतियां

श्री राम की आरती

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। भगवान श्रीराम की आरती श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणं नव कंजलोचन, कंज मुख, करकंज, पद कंजारुणं। कंदर्प अगणित अमित छबि नवनीत नीरद सुंदरं। पटपीत मानहु तडितरूचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।। भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकंदनं। रघुनन्द आनंदकंद कौशलचंद दशरथ नंदनं ।। सिरा मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभूषणं। आजानुभुज शर चापधर संग्रामजित खरदूषणं ।। इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं । मम ह्रदय कंच निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं।। मनु जाहिं राचेउ मिलहि सो बरु सहज सुन्दर सांवरो। करुना निधान सुजान सिलु सनेहु जानत रावरो।। एही भांतिगौरि असीस सुनि सिया सहित हिय हरषीं अली। तुलसी भवानिहि पूजी पुनिपुनि मुदित मन मंदिरचली।।

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Lord Ram : पूजन की विधि

श्री राम पूजन की सरल विधि

सामग्री देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध। तुलसीदल, तिल, जनेऊ। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा में से जो भी हो। सकंल्प किसी विशेष मनोकामना के पूरी होने की इच्छा से किए जाने वाले पूजन में संकल्प की जरूरत होती है। निष्काम भक्ति बिना संकल्प के भी की जा सकती है। पूजन शुरूकरने से पहले सकंल्प ले। संकल्प करने से पहले हाथों मेे जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें। संकल्प का उदाहरण जैसे 28/3/2015 को श्री राम का पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं ( अपना नाम बोलें) विक्रम संवत् 2072 को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को कृतिका नक्षत्र में, मंगलवार को, भारत देश के मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन शहर में महाकालेश्वर तीर्थ में इस मनोकामना से (मनोकामना बोलें) श्री राम का पूजन कर रही/ रहा हूं। श्री राम पूजन की सरल विधि सर्वप्रथम गणेश पूजन करें। गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प अक्षत से पूजन करें। अब भगवान राम का पूजन करें। भगवान राम को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं। अब तिलक करें। ‘‘श्री रामाय नमः’’ कहते हुए भगवान राम को अष्टगंध का तिलक लगाएं। अब धूप व दीप अर्पित करें। फूल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें। आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें। फल, मिठाई अर्पित करें। पूजन के समय ‘‘ऊँ रामाय नमः’’ मंत्र का जप करते रहें।

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Lord Ram : मंत्र और स्तुतियां

श्री राम चालीसा

श्री राम चालीसा श्री रघुवीर भक्त हितकारी । सुन लीजै प्रभु अरज हमारी।। निशिदिन ध्यान धरै जो कोई । ता सम भक्त और नहिं होई।। ध्यान धरे शिवजी मन माहीं । ब्रहृ इन्द्र पार नहिं पाहीं।। दूत तुम्हार वीर हनुमाना । जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना।। तब भुज दण्ड प्रचण्ड कृपाला । रावण मारि सुरन प्रतिपाला।। तुम अनाथ के नाथ गुंसाई । दीनन के हो सदा सहाई।। ब्रहादिक तव पारन पावैं । सदा ईश तुम्हरो यश गावैं ।। चारिउ वेद भरत हैं साखी । तुम भक्तन की लज्जा राखीं।। गुण गावत शारद मन माहीं । सुरपति ताको पार न पाहीं ।। नाम तुम्हार लेत जो कोई । ता सम धन्य और नहिं होई ।। राम नाम है अपरम्पारा । चारिहु वेदन जाहि पुकारा ।। गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो । तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो ।। शेष रटत नित नाम तुम्हारा । महि को भार शीश पर धारा ।। फूल समान रहत सो भारा । पाव न कोऊ तुम्हरो पारा ।। भरत नाम तुम्हरो उर धारो । तासों कबहुं न रण में हारो ।। नाम शक्षुहन हृदय प्रकाशा । सुमिरत होत शत्रु कर नाशा ।। लखन तुम्हारे आज्ञाकारी । सदा करत सन्तन रखवारी ।। ताते रण जीते नहिं कोई । युद्घ जुरे यमहूं किन होई ।। महालक्ष्मी धर अवतारा । सब विधि करत पाप को छारा ।। सीता राम पुनीता गायो । भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो ।। घट सों प्रकट भई सो आई । जाको देखत चन्द्र लजाई ।। सो तुमरे नित पांव पलोटत । नवो निद्घि चरणन में लोटत ।। सिद्घि अठारह मंगलकारी । सो तुम पर जावै बलिहारी ।। औरहु जो अनेक प्रभुताई । सो सीतापति तुमहिं बनाई ।। इच्छा ते कोटिन संसारा । रचत न लागत पल की बारा ।। जो तुम्हे चरणन चित लावै । ताकी मुक्ति अवसि हो जावै ।। जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा । नर्गुण ब्रहृ अखण्ड अनूपा ।। सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी । सत्य सनातन अन्तर्यामी।। सत्य भजन तुम्हरो जो गावै । सो निश्चय चारों फल पावै ।। सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं । तुमने भक्तिहिं सब विधि दीन्हीं।। सुनहु राम तुम तात हमारे । तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे ।। तुमहिं देव कुल देव हमारे । तुम गुरु देव प्राण के प्यारे ।। जो कुछ हो सो तुम ही राजा । जय जय जय प्रभु राखो लाजा।। राम आत्मा पोषण हारे । जय जय दशरथ राज दुलारे।। ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा । नमो नमो जय जगपति भूपा ।। धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा । नाम तुम्हार हरत संतापा।। सत्य शुद्घ देवन मुख गाया । बजी दुन्दुभी शंख बजाया ।। सत्य सत्य तुम सत्य सनातन । तुम ही हो हमरे तन मन धन ।। याको पाठ करे जो कोई । ज्ञान प्रकट ताके उर होई ।। आवागमन मिटै तिहि केरा । सत्य वचन माने शिर मेरा ।। और आस मन में जो होई । मनवांछित फल पावे सोई ।। तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै । तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै।। साग पत्र सो भोग लगावै । सो नर सकल सिद्घता पावै ।। अन्त समय रघुबरपुर जाई । जहां जन्म हरि भक्त कहाई ।। श्री हरिदास कहै अरु गावै । सो बैकुण्ठ धाम को पावै ।। दोहा- सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय । हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय ।। राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय । जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्घ हो जाय ।।

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Spiritual Quotes

  • किसी मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबें उतनी ही उपयोगी हैं जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आईना। - चाणक्य

  • जब कभी संभव हो दयालु बने रहिये। यह हमेशा संभव है - दलाई लामा

  • कोई पाप है, तो वो यही है; ये कहना कि तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं। - स्वामी विवेकानंद

  • झूठे शब्द सिर्फ खुद में बुरे नहीं होते , बल्कि वो आपकी आत्मा को भी बुराई से संक्रमित कर देते हैं - सुकरात

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