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Lord Krishna: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Religion Bhaskar | Nov 10, 2016, 17:57 IST

Lord Krishna: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Lord Krishna: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक हैं। इनका जन्म द्वापरयुग में हुआ था। इनकी माता देवकी व पिता वसुदेव थे। इनका पालन-पोषण नंदगांव में माता यशोदा और नंदबाबा ने किया था। श्रीकृष्ण ने बचपन में ही अनेक राक्षकों का वध किया था। उस समय कंस का आतंक बहुत बढ़ गया तो श्रीकृष्ण ने उसका अंत किया था। महाभारत युद्ध में भी श्रीकृष्ण ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन के कारण ही पांडव वह युद्ध जीत सके थे। इस युद्ध में श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने थे। इनकी अनेक पत्नियां थी, इनमें से रुक्मणी, सत्यभामा, जामवंती आदि प्रमुख थीं। इनके पुत्र प्रद्युम्न, सांब आदि भी बहुत पराक्रमी थे।

Lord Krishna : आरतियां

कुंज बिहारी की आरती

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। श्रीकुंजबिहारी की आरती आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजन्ती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवन में कुंडलझलकाला, नंदके आनंदनंदलाला।। नैनन बीच, बसहि उरबीच, सुरतिया रूप उजारी की ।। आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली। लतन में ठाढ़ै बनमाली, भ्रमर सी अलक। कस्तूरी तिलक, चंद्रसी झलक, ललित छबि श्यामा प्यारी की।। आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। कनकमय मोर मुकट बिलसे, देवता दरसन को तरसे। गगनसों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग मधुर मिरदंग।। ग्वालनी संग, अतुल रति गोप कुमारी की।। आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। जहांते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्री गंगै स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस जटाके बीच। हरै अघ कीच, चरन छबि श्री बनवारी की।। आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। चमकती उज्जवल तट रेनू, बज रही वृन्दावन बेनू। चहुंदिसि गोपी ग्वाल धेनू, हसत मृदु मंदचांदनी चंद । कटत भव फंद, टेर सुनु दीन भिखारी की।। आरती कुंज बिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की।

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Lord Krishna : पूजन की विधि

श्री कृष्ण पूजन की सरल विधि

सामग्री देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, अष्टगंध। तुलसीदल, तिल, जनेऊ। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा में से जो भी हो। सकंल्प किसी विशेष मनोकामना के पूरी होने की इच्छा से किए जाने वाले पूजन में संकल्प की जरूरतहोती है। निष्काम भक्ति बिना संकल्प के भी की जा सकती है। पूजन शुरूकरने से पहले सकंल्प ले। संकल्प करने से पहले हाथों मेंजल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें। संकल्प का उदाहरण जैसे 5/9/2015 को श्री कृष्ण का पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं ( अपना नाम बोलें) विक्रम संवत् 2072 को, भादौ मास के अष्टमी तिथि को, शनिवारी के दिन, रोहणी नक्षत्र में, भारत देश के मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन शहर में महाकालेश्वर तीर्थ में इस मनोकामना से (मनोकामना बोलें) श्री कृष्ण का पूजन कर रही/ रहा हूं। श्री कृष्ण पूजन की सरल विधि सर्वप्रथमश्रीगणेश पूजन करें। गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प , धूप ,दीप, अक्षत से पूजन करें। अब श्री कृष्ण का पूजन करें। श्रीकृष्ण को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं।वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं। अब तिलक करें। ‘‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’’ मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान श्री कृष्ण को अष्टगंध का तिलक लगाएं। अब धूप व दीप अर्पित करें। फूल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें। आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें। फल, मिठाई अर्पित करें। पूजन के समय ‘‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’’ मंत्र का जप करते रहें।

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Lord Krishna : मंत्र और स्तुतियां

श्री कृष्ण स्तुति

श्री कृष्ण स्तुति नमो विश्वस्वरूपाय विश्वस्थित्यन्तहेतवे। विश्वेश्वराय विश्वाय गोविन्दाय नमो नमः॥1॥ नमो विज्ञानरूपाय परमानन्दरूपिणे। कृष्णाय गोपीनाथाय गोविन्दाय नमो नमः॥2॥ नमः कमलनेत्राय नमः कमलमालिने। नमः कमलनाभाय कमलापतये नमः॥3॥ बर्हापीडाभिरामाय रामायाकुण्ठमेधसे। रमामानसहंसाय गोविन्दाय नमो नमः॥4॥ कंसवशविनाशाय केशिचाणूरघातिने। कालिन्दीकूललीलाय लोलकुण्डलधारिणे॥5॥ वृषभध्वज.वन्द्याय पार्थसारथये नमः। वेणुवादनशीलाय गोपालायाहिमर्दिने॥6॥ बल्लवीवदनाम्भोजमालिने नृत्यशालिने। नमः प्रणतपालाय श्रीकृष्णाय नमो नमः॥7॥ नमः पापप्रणाशाय गोवर्धनधराय च। पूतनाजीवितान्ताय तृणावर्तासुहारिणे॥8॥ निष्कलाय विमोहाय शुद्धायाशुद्धवैरिणे। अद्वितीयाय महते श्रीकृष्णाय नमो नमः॥9॥ प्रसीद परमानन्द प्रसीद परमेश्वर। आधि.व्याधि.भुजंगेन दष्ट मामुद्धर प्रभो॥10॥ श्रीकृष्ण रुक्मिणीकान्त गोपीजनमनोहर। संसारसागरे मग्नं मामुद्धर जगद्गुरो॥11॥ केशव क्लेशहरण नारायण जनार्दन। गोविन्द परमानन्द मां समुद्धर माधव॥12॥

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Spiritual Quotes

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