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Lord Hanuman: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Religion Bhaskar | Nov 22, 2016, 14:20 IST

Lord Hanuman: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Lord Hanuman: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

हनुमानजी को भगवान शिव का श्रेष्ठ अवतार माना जाता है। त्रेतायुग में इनका जन्म वानरराज केसरी के घर हुआ था। इनकी माता का नाम अंजनी है। इन्होंने सूर्यदेव से ज्ञान प्राप्त किया था। ये भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। राम-रावण युद्ध में इन्होंने निर्णायक भूमिका निभाई थी। माता सीता की खोज, ‌विभीषण को अपनी ओर करना, संजीवनी बूटी लाकर श्रीराम व लक्ष्मण के प्राण बचाना आदि अनेक वीरतपूर्ण कार्य हनुमान ने सहजता से ही कर दिए थे। हनुमानजी को अष्ट चिरंजीवियों (8 अमर) में से एक माना जाता है। माता सीता ने ही इन्हें अमरता का वरदान दिया था।

Lord Hanuman : आरतियां

श्री हनुमान की आरती

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। यानी कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। श्री हनुमानजी की आरती आरति कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपै । रोग-दोष जाके निकट न झांपै ।। अंजनी पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रेम सदा सहाई ।। दे बीरा रघुनाथ पठाये । लंका जारि सिया सुधि लाये ।। लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई।। लंका जारि असुर संहारे। सिया रामजी के काज संवारे।। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे । आनि सजीवन प्रान उबारे ।। पैठि पताल तोरि जम-कारे । अहिरावन की भुजा उखारे ।। बाईं भुजा असुर दल मारे । दाहिने भुजा संतजन तारे ।। सुर नर मुनि आरती उतारे । जै जै जै हनुमान उचारे ।। कंचन थार कपूर लौ छाई । आरती करत अंजना माई ।। जो हनुमान जी की आरती गावै । बसि बैकुंठ परम पद पावै ।। लंक विध्वंस किये रघुराई । तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ।। आरति कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।

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Lord Hanuman : पूजन की विधि

श्री हनुमान पूजन की सरल विधि

सामग्री देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। सिंदूर, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, फूल, चावल। प्रसाद के लिए फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा । सकंल्प पूजन शुरूकरने से पहले सकंल्प लें। संकल्प करने से पहले हाथों मेंजल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छाबोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें। संकल्प का उदाहरण जैसे 4/4/2015 को श्री हनुमान का पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं (अपना नाम बोलें)विक्रम संवत् 2072 को, चैत्र मास के पूर्णिमा तिथि को, शनिवार को, हस्त नक्षत्र में, भारत देश के मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन शहर में महाकाल तीर्थ में इस मनोकामना से (मनोकामना बोलें) श्री हनुमान का पूजन कर रहा हूं। श्री रामदूत हनुमान के पूजन की विधि सर्वप्रथम गणेश पूजन करें। गणेश जी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प , धूप ,दीप, अक्षत से पूजन करें। अब राम जी के दूत हनुमान जी का पूजन करें। महावीर को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं। अब तिलक करें। ऊँ ऐं हनुमते रामदूताय नमः मंत्र का उच्चारण करते हुए हनुमान जी को सिंदूर का तिलक लगाएं। अब धूप व दीप अर्पित करें। फूल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें। आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें। फल, मिठाई, पान का बीड़ा अर्पित करें। पूजन के समय ऊँ ऐं हनुमते रामदूताय नमः मंत्र का जप करते रहें।

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Lord Hanuman : मंत्र और स्तुतियां

श्री हनुमान चालीसा

।। दोहा ।। श्री गुरु चरन सरोज राज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँरघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरों पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देऊ मोहि, हरहु क्लेश विकार।। ।। चौपाई।। जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महावीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा ।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै ।। शंकर सुवन केसरी नन्दन। तेज प्रताप महा जग वन्दन ।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। विकट रूप धरि लंक जरावा ।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे ।। लाय संजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये ।। रघुपति किन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरत सम भई ।। सहस बदन तुम्हरो जस गावै। अस कहि श्रीपति कंठ लगावै ।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राजपद दीन्हा।। तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना ।। जुग सहस्त्र योजन पर भानू। लील्यो ताहिं मधुर फल जानू ।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना ।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक ते काँपै ।। भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै ।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा ।। संकट तें हनुमान छुडावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा ।। और मनोरथ जो कोई लावै। सोई अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु सन्त के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुःख बिसरावै।। अन्त काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेक की नाईं। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महासुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा ।। तुलसी दास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ ह्रदय मँह डेरा।। ।। दोहा ।। पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, ह्रदय बसहु सुर भूप।।

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Spiritual Quotes

  • हर व्यक्ति की आत्मा अमर होती है , लेकिन जो व्यक्ति नेक होते हैं उनकी आत्मा अमर और दिव्य होती है - सुकरात

  • कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता | कर्तव्य-पालन में ही चित्त की शांति है -प्रेमचंद

  • सर्प , नृप , शेर, डंक मारने वाले ततैया, छोटे बच्चे , दूसरों के कुत्तों, और एक मूर्ख इन सातों को नींद से नहीं उठाना चाहिए - चाणक्य

  • इस दुनिया में सभी भेद-भाव किसी स्तर के हैं, ना कि प्रकार के, क्योंकि एकता ही सभी चीजों का रहस्य है - स्वामी विवेकानंद

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