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Durga Mata: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Religion Bhaskar | Nov 18, 2016, 17:28 IST

Durga Mata: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

Durga Mata: आरतियां, मंत्र, स्तुतियां, पूजन विधि, व्रत कथा

भगवान शिव की पत्नी पार्वती का एक रूप दुर्गा भी है। हिंदुओं के शाक्त संप्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, जब राक्षसों का अत्याचार बहुत बढ़ गया तो देवताओं ने अपने तेज से एक स्त्री का निर्माण किया। यही दैवीय शक्ति दुर्गा कहलाई। देवताओं ने इसे अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। दुर्गम नामक राक्षस का वध करने के कारण ही वे दुर्गा कहलाईं। महिषासुर का वध करने के कारण इन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है। चैत्र व शारदीय नवरात्र में देवी दुर्गा के प्रमुख नौ रूपों की पूजा की जाती है। भगवती दुर्गा की सवारी शेर है।

Durga Mata : आरतियां

श्री दुर्गा की आरती

आरती का अर्थ है पूरी श्रद्धा के साथ परमात्मा की भक्ति में डूब जाना। भगवान को प्रसन्न करना। इसमें परमात्मा में लीन होकर भक्त अपने देव की सारी बलाए स्वयं पर ले लेता है और भगवान को स्वतन्त्र होने का अहसास कराता है। आरती को नीराजन भी कहा जाता है। नीराजन का अर्थ है विशेष रूप से प्रकाशित करना। जिसका अर्थ यही है कि देव पूजन से प्राप्त होने वाली सकारात्मक शक्ति हमारे मन को प्रकाशित कर दें। व्यक्तित्व को उज्जवल कर दें। बिना मंत्र के किए गए पूजन में भी आरती कर लेने से पूर्णता आ जाती है। आरती पूरे घर को प्रकाशमान कर देती है, जिससे कई नकारात्मक शक्तियां घर से दूर हो जाती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं। श्रीदुर्गा माता की आरती जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशि दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।। जय अम्बे ... मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ।। जय अम्बे ... कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै।। जय अम्बे ... केहरि वाहन राजत, खड़ग खप्पर धारी। सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी।। जय अम्बे ... कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटि चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति।। जय अम्बे ... शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती।। जय अम्बे ... चण्ड - मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे। मधु - कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे।। जय अम्बे ... ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।। जय अम्बे ... चैंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरु। बाजत ताल मृदंग, अरु बाजत डमरू।। जय अम्बे ... तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता ।। जय अम्बे ... भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी।। जय अम्बे ... कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती । श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ।। जय अम्बे ... अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी, सुख - सम्पत्ति पावे।। जय अम्बे ...

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Durga Mata : पूजन की विधि

गौरी पूजन की सरल विधि

सामग्री देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का पात्र, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र व आभूषण। चावल, कुमकुम, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, अष्टगंध। गुलाब के फूल। प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा में से जो भी हो। सकंल्प किसी विशेष मनोकामना के पूरी होने की इच्छा से किए जाने वाले पूजन में संकल्प की जरूरतहोती है। निष्काम भक्ति बिना संकल्प के भी की जा सकती है। पूजन शुरूकरने से पहले सकंल्प लें। संकल्प करने से पहले हाथों मेंजल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें। संकल्प का उदाहरण जैसे 23/3/2015 को श्री गौरी का पूजन किया जाना है। तो इस प्रकार संकल्प लें। मैं ( अपना नाम बोलें) विक्रम संवत् 2072 को, चैत्र मास के तृतीया तिथि को सोेमवार के दिन, भरणी नक्षत्र में, भारत देश के मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन शहर में महाकालेश्वर तीर्थ में इस मनोकामना से (मनोकामना बोलें) श्री गौरी का पूजन कर रही हूं। देवी पार्वती पूजन कीसरल विधि श्री गणेश के पूजन से शुरू करें। भगवान गणेश को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प, अक्षत अर्पित करें। अब देवी पार्वती का पूजन शुरूकरें। देवी पार्वती की मूर्ति भगवान शिव के बायीं और स्थापित करना चाहिए। मूर्ति में देवी पार्वती काआवाहन करें। आवाहन यानी कि बुलाना। देवी पार्वती को अपने घर में आसन दें। अब देवी को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और वापिस जल से स्नान कराएं। अब देवी पार्वती को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। अब पुष्पमाला पहनाएं। सुगंधित इत्र अर्पित करें। अब तिलक करें। अब धूप व दीप अर्पित करें। देवी पार्वती को फूल और चावल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें। आरती के पश्चात् परिक्रमा करें। अब नेवैद्य अर्पित करें। देवी पार्वती पूजन के दौरन ’’ऊँ गौर्ये नमः’’ या ’’ऊँ पार्वत्यै नमः’’ इस मंत्र का जप करते रहें।

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Durga Mata : मंत्र और स्तुतियां

श्री दुर्गा चालीसा

श्री दुर्गा चालीसा श्री दुर्गा शक्ति की देवी है। शक्ति की देवी की उपासना बल प्रदान करती है। देवी शारीरिक, आत्मिक और मानसिक बल प्रदान करती है। अतिरुद्र रूपा देवी की आराधना महान कष्ट की नाशक है। किंतु श्रद्धा और नियम मां दुर्गा को अतिप्रिय है। अनुशासन से युक्त होकर की गई आराधना दुर्गा मां को प्रसन्न करती है। श्री दुर्गा चालीसा पाठ वह माध्यम है। जिसके द्वारा हृदय की श्रद्धा को दुर्गा मां तक सरल शब्दों में पहुंचाया जा सकता है। ।। चौपाई।। नमो नमो दुर्गा सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी।। निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूं लोक फैली उजियारी।। शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भुकुटी विकराला।। रूप मातु को अधिक सुहावे। दरस करत जन अति सुख पावे।। तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अत्र धन दीना ।। अत्रपूर्णा हुई जगपाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ।। प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ।। शिवयोगी तुम्हारे गुण गावे। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ।। रूप सरस्वती का तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ।। धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। प्रगट भई फाड़ के खम्भा ।। रक्षा कर प्रहलाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ।। लक्ष्मी रूप धरो जगमाहीं। श्री नारायण अंग समाही ।। क्षीर सिंधु में करत बिलासा। दया सिंधु कीजे मन आशा ।। हिंगलाज में तुम्ही भवानी। महिमा अमित न जात बखानी ।। मातंगी धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ।। श्री भैरव तारा जगतारिनि। छिन्न भाल भव दुःख निवारिनि ।। केहरि वाहन सौह भवानी। लंगुर बीर चलत अगवानी ।। कर में खप्पर खंग बिराजे। जाको देखि काल डर भाजे ।। सोहे अस्त्र शस्त्र और तिरशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला।। नव कोटि में तुम्हीं विराजत। तिहूं लोक में डंका बाजत ।। शुंभ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्त बीज संखन संहारे।। महिषासुर नृप अति अभिमानी।जोहि अघ भारि मही अकुलानी।। रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तेहि संहारा।। परी गाढ़ सन्तन पर जब जब। भई सहया मातु तुम तब तब।। अमरपुरी अरु बासव लोका। तव महिमा सब रहे अशोका।। ज्वाला मैं है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजत नरनारी।। प्रेम भक्ति से जो नर गावै। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवे।। ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म मरन ते सो छुटी जाई।। योगी सुरमुनि कहत पुकारी। योग न होय बिन शक्ति तुम्हारी।। शंकर आचरज तप कीनो। कामहु क्रोध जीत सब लीनो ।। निसदिन ध्यान धरत शिवको। काहू काल नहीं सुमिरो तुमको।। शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछतायो ।। शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी।। भई प्रसत्र आदि जगदम्ब। दई शक्ति नहीं कीन विलंबा।। मोको मातु कष्ट अति धेरो। तुम बिन कौन हरे दुःख मेरो।। आशा तृष्णा निपट सतावै। रिपु मुरख हो अति डर पावै।। शत्रु नाश कीजे महारानी। सुमिरो इक चित्त तुम्हें भवानी।। करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि सिद्धि दे करहू निहाला ।। जब लगि जियो सदा फलपाउं। सब सुख भोग परमपत पाउं।। देवीदास शरण निज जानी। करहू कृपा जगतम्ब भवानी।। ।।दोहा ।। शरणागत रक्षा करे, भक्त रहे निशंक। मै आया तेरी शरण में, मातु लीजिये अंक।।

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Spiritual Quotes

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  • आश्चर्य की बात है कि लोग जीवन को बढ़ाना चाहते हैं, सुधारना नहीं - सुकरात

  • शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु है. विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु है. प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु है- स्वामी विवेकानंद

  • कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिये जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा के हों। ऐसी मित्रता कभी आपको ख़ुशी नहीं देगी - चाणक्य

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