
इनके क्रोध से डरते थे क्षत्रिय पर भीष्म को नहीं...
हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु के आवेशावतार परशुराम का जन्म हुआ था। इस बार परशुराम जयंती का पर्व 13 मई, सोमवार को है। हमारे धर्म ग्रंथों में भगवान परशुराम के संबंध में कई रोचक कथाएं हैं। ऐसी भी मान्यता है कि परशुराम अमर हैं और वे आज भी पृथ्वी पर तपस्या कर रहे हैं।...
परशुराम जयंती 13 को, क्या आज भी जीवित हैं भगवान...
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया यानी अक्षय तृतीया के दिन हिंदू अनुयायियों द्वारा प्रतिवर्ष भगवान परशुराम की जयंती बड़ी धूमधाम व उत्साह से मनाई जाती है। इस बार भगवान परशुराम की जयंती 13 मई, सोमवार को है। हिंदू धर्म ग्रंथों में कुछ महापुरुषों का वर्णन है जिन्हें आज भी अमर माना जाता है। इन्हें अष्टचिरंजीवी भी कहा जाता है। इनमें से एक भगवान विष्णु के आवेशावतार परशुराम भी हैं-
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क्या आप जानते हैं कैसे पड़ा भगवान परशुराम का ये...
परशुराम भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक थे। धर्म शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (इस बार 13 मई, सोमवार) को इनका जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम महर्षि जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था। बाल्यावस्था में इनके माता-पिता इन्हें राम कहकर पुकारते थे।
जब राम कुछ बड़े हुए तो उन्होंने पिता से वेदों का ज्ञान प्राप्त किया और पिता के सामने धनुर्विद्या सीखने की...
स्त्री मिलन और श्राप के कारण हुई इस राजा की...
हिंदू धर्म ग्रंथों के अंतर्गत कई प्रसंगों में श्राप देने की बात आप सभी ने सुनी होगी। ऋषियों के श्राप के भय से तो बड़े-बड़े राजा भी घबराते थे। श्राप के कारण भगवान को भी दु:ख भोगने पड़े और मनुष्य रूप में जन्म लेना पड़ा। यहां तक की दूसरों के बुरे कर्मों का हिसाब रखने वाले यमराज भी श्राप से नहीं बच पाए। रामायण, महाभारत, शिवमहापुराण, श्रीमद्भागवत आदि कई ग्रंथों में श्राप देने के अनेक...
अक्षय तृतीया है बहुत खास दिन, इससे जुड़ी हैं ये...
वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं। इस बार यह तिथि 13 मई, सोमवार को है। यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान, हवन, पूजन या साधना अक्षय (संपूर्ण) होता है। हिंदू धर्म शास्त्रों में अक्षय तृतीया तिथि से जड़ी और भी कई रोचक बातों का वर्णन मिलता है।
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क्या आप जानते हैं अक्षय तृतीया को क्यों मानते...
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं। इस बार अक्षय तृतीया का पर्व 13 मई, सोमवार को है। इस तिथि को बहुत ही शुभ मानते हैं इसलिए इसे सौभाग्य दिवस भी कहते हैं। इसका कारण है कि पूरे वर्ष में कोई भी तिथि क्षय हो सकती है लेकिन यह तिथि अर्थात वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया कभी भी क्षय नहीं होती। इसी कारण इस दिन किए गए हवन, दान, जप या साधना का फल अक्षय(संपूर्ण) होता है।
अक्षय तृतीया 13 को, इसे सौभाग्य दिवस भी कहते हैं
हिंदू धर्म में सभी मांगलिक कार्य शुभ मुहूर्त देखकर किए जाने का विधान है जैसे- विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश, सगाई आदि। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ तिथि ऐसी भी हैं जिस दिन सभी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं। ऐसी ही एक शुभ तिथि है वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया। इसे अक्षय तृतीया या आखा तीज भी कहते हैं। इस बार अक्षय तृतीया 13 मई, सोमवार को है।
वैशाख में करें सिर्फ ये एक काम, प्रसन्न हो जाएंगे...
धार्मिक दृष्टि से प्रत्येक मास का अपना एक विशेष महत्व है। हिंदू वर्ष के दूसरे माह वैशाख के विषय में धर्म ग्रंथों में लिखा है कि-
न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।।
(स्कंदपुराण, वै. वै. मा. 2/1)
अर्थात वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं है, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है।
वैशाख महीने में इस मंत्र से करें भगवान विष्णु का...
हिंदू धर्म के अनुसार एक वर्ष में 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीने के स्वामी एक विशेष देवता माने गए हैं। उनके पूजन की विधि भी अलग-अलग बताई गई है। उसके अनुसार वैशाख मास के स्वामी भगवान मधुसूदन हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार सूर्यदेव के मेष राशि में आने पर भगवान मधुसूदन के निमित्त वैशाख मास स्नान का व्रत लेना चाहिए। स्नान के बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करना चाहिए तत्पश्चात भगवान मधुसूदन...