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  • कहां से आए हैं ये रत्न, जानिए किस ग्रह के लिए कौन सा रत्न पहना जाता है
    उज्जैन। हमारे शास्त्रों में रत्न पहनना बहुत शुभ माना गया है। विज्ञान भी इन नगीनों और रत्नों के सकारात्मक ऊर्जा देने वाले तथ्यों की पुष्टि करता है। रत्नों को वैसे तो प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त माना गया है, लेकिन इनके अनमोल व शुभ होने से यह रोचक पौराणिक प्रसंग जुड़ा है - प्राचीन समय में बलासुर नामक शक्तिशाली दैत्य था। उससे देवता भी पराजित हो गए। तब दैत्य के अंत के लिए देवताओं ने यज्ञ में बली के लिए उस दैत्य से निवेदन किया। बलासुर ने यज्ञ जैसे शुभ कार्य के लिए अपनी देह दान की। इस तह यज्ञ बली से...
    August 30, 05:08 PM
  • 10 दिन तक दिन इस विधि से करें पूजा, घर पर रहेगी लक्ष्मी कृपा
    उज्जैन।सांसारिक जीवन में कई लोग वैभव के बीच रहते हुए भी अभाव महसूस करने लगते हैं। ऐसा मन व विचारों पर आलस्य के हावी होने से होता है। जबकि धर्मशास्त्र कहते हैं कि वैभव व अभाव दोनों ही स्थितियों में इंसान को बेहतर सोच से काम व मेहनत का जज्बा कायम रखना चाहिए, क्योंकि गलत सोच निराशा की गर्त में धकेलती है, इससे बोझिल मन आलस्य और रोग की वजह भी बनता है। इसलिए जरूरी है कि कमियों को पूरा करने के लिए सोच अच्छी ही नहीं, सही दिशा में भी हो। शुभ या मंगल को चुनकर खुशहाल बनने की बात हो तो हिन्दू धर्म परंपराओं...
    August 30, 07:05 AM
  • जानें स्वस्तिक क्यों है गणेशजी का रूप, ऐसे दूर करता है कई तरह के वास्तु दोष
    उज्जैन। स्वस्तिक शब्द को सु औरं अस्ति दोनों से मिलकर बना है। सु का अर्थ है शुभ और अस्तिका अर्थ है- होना यानी जिस से शुभ हो, कल्याण हो वही स्वस्तिक है। हिन्दू धर्म परंपराओं में हर मांगलिक, धार्मिक कर्म, पूजा, उपासना या कार्य की शुरुआत स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर की जाती है। स्वस्तिक देवशक्तियों, शुभ व मंगल भावों का प्रतीक माना जाता है। कहा गया है.... स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा: स्वस्ति न: पूषा विश्ववेदा:। स्वस्तिनस्ता रक्षो अरिष्टनेमि: स्वस्ति नो बृहस्पर्तिदधातु।। माना जाता है कि इस मंत्र...
    August 30, 02:32 AM
  • श्री गणेश का सिर कटने के पीछे ये शाप था कारण, सूर्य को मारा था त्रिशूल
    तस्वीरों का प्रयोग प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है उज्जैन। ब्रह्मवैवर्तपुराणके अनुसार शनि देव शिवजी और पार्वती को पुत्र प्राप्ति की खबर सुनकर उनके घर आए। वहां उन्होंने पूरे समय अपना मुंह नीचे की ओर झुकाया हुआ था। यह देख पार्वती जी ने उनसे कहा कि आप मेरी या मेरे बालक की तरफ देख क्यों नहीं रहे हो? मैं इसका कारण जानना चाहती हूं। यह सुनकर शनिदेव बोले माता मैं आपके सामने कुछ कहने लायक नहीं हूं, लेकिन ये सब कर्मों के कारण है। मैं बचपन से ही श्रीकृष्ण का भक्त था। मेरे पिता चित्ररथ ने मेरा विवाह कर...
    August 29, 12:17 PM
  • बड़ों के पैर क्यों छूने चाहिए, क्या आप जानते हैं इस रिवाज का असली कारण
    उज्जैन। बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करना न सिर्फ एक अच्छा आचरण माना जाता है, बल्कि प्यार बनाए रखने में भी सहायक सिद्ध होता है। पैर छूने के भी अनेक तरीके हैं। आम तौर पर झुककर पैरों या जूतों को हाथ लगाकर सम्मान दिया जाता है, लेकिन बस थोड़ा सा झुककर हाथ नीचे ले जाकर भी यह रस्म पूरी हो जाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि यह रस्म क्यों है और इसके फायदे क्या हैं, अगर नहीं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं बड़ों के पैर छूने से होने वाले फायदों के बारे में.... हिन्दू संस्कृति में बड़ों का सम्मान व सेवा का...
    August 27, 01:04 PM
  • जानें श्रीराम में कौन से 16 गुण थे, जिनके कारण वे कहे गए आदर्श पुरुष
    उज्जैन। भगवान के जितने भी अवतार हुए हैं। उनमें श्रीरामजी के अवतार को ही मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। कहा जाता है कि बेटा हो तो राम जैसा, राजा हो तो राम जैसा या चरित्र हो तो राम जैसा। दरअसल राम को हमारे धर्म ग्रथों में सबसे आदर्श पुरुष माना गया है। सांसारिक जीवन में आगे बढऩे, नाम कमाने यानी ख्याति, यश, कीर्ति के लिए सद्गुणों और अच्छे कामों की बड़ी भूमिका होती है, क्योंकि गुण ही किसी भी इंसान को असाधारण और विलक्षण प्रतिभा का स्वामी बना देते हैं। इसलिए हर इंसान को अपने जीवन में सफल होने के लिए...
    August 26, 04:04 AM
  • उज्जैन। भगवान के जितने भी अवतार हुए हैं। उनमें श्रीरामजी के अवतार को ही मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया है। कहा जाता है कि बेटा हो तो राम जैसा, राजा हो तो राम जैसा या चरित्र हो तो राम जैसा। दरअसल राम को हमारे धर्म ग्रथों में सबसे आदर्श पुरुष माना गया है। सांसारिक जीवन में आगे बढऩे, नाम कमाने यानी ख्याति, यश, कीर्ति के लिए सद्गुणों और अच्छे कामों की बड़ी भूमिका होती है, क्योंकि गुण ही किसी भी इंसान को असाधारण और विलक्षण प्रतिभा का स्वामी बना देते हैं। इसलिए हर इंसान को अपने जीवन में सफल होने के लिए...
    August 26, 04:04 AM
  • इस तिथि को क्यों कहते हैं अमावस्या, जानेें शास्त्रों में इसके बारें में कही गई बातें
    उज्जैन। वर्तमान समय मेंं धर्म परंपराओं से दूर कामकाजी लोग व आधुनिक संस्कृति में रमी नई पीढ़ी के कई नौजवानों के लिए जानकारी के अभाव में व्रत-त्योहार की परंपराएं या तिथियां अरुचि का विषय ही रहती हैं। इसका एक कारण जानकारी न होना भी है। कई बार तिथि की जानकारी न होने से व्रत-उपवास भी भंग हो जाता है। इसलिए पंचांग और तिथि के संबंध में सामान्य जानकारी हर इंसान को रखनी चाहिए। इसके अलावा कुछ सामान्य तिथियों से जुड़ी साधारण बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए। आज हम आपको दे रहे हैं ऐसी कुछ रोचक जानकारी...
    August 25, 05:46 AM
  • रानी ने नहीं खाया राजा का दिया फल तो राजा ने लिखा स्त्री पर ये अनोखा ग्रंथ
    उज्जैन। प्रेम एक ऐसा भाव है जिसे चंद शब्दों में बांधना मुश्किल है। प्रेम को जानने-समझने के कई पहलू हो सकते हैं, लेकिन प्रेम की गहराई को कौन कितना समझ पाता है, ये उसकी सोच पर निर्भर करता है। किसी ने बहुत सुंदर कहा है कि प्रेम जब शरीर तक रहे तो वासना बन जाता है, मन तक पहुंचे तो भावना बन जाता है और आत्मा को छू ले तो साधना बन जाता है। एक प्रेम कहानी तभी बनती है जब उसमें एक नायक और एक नायिका हो। हिंदू धर्म, संस्कृति और इतिहास से स्त्री प्रेम से जुड़े कई प्रसंग न केवल जि़ंदगी से जुड़ी बातों और सच्चाइयों को...
    August 22, 12:37 PM
  • केले के पत्तों पर ही क्यों खाया जाता है खाना, क्यों बनाई गई थी ये परंपरा
    उज्जैन। हमारे धर्म ग्रंथों में केले को बहुत पवित्र वृक्ष माना गया है। यही कारण है कि इसकी पूजा की जाती है। कुछ विशेष पूजन में इसका मंडप भी बनाया जाता है। यह वृक्ष विष्णु भगवान को बहुत प्रिय माना जाता है। इसलिए जिन लोगों के विवाह में विलंब होता है, उन्हें केले के पेड़ की पूजा करने को कहा जाता है। वास्तु के अनुसार केले के पेड़ को घर के सामने और बगीचे में लगाना अच्छा माना जाता है। भारत के कुछ हिस्सों में इसकी पवित्रता के कारण इसका उपयोग भोजन करने के लिए भी किया जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि...
    August 21, 07:12 PM
  • शादी के बाद लड़की करे ये 16 चीजें तो बहुत शुभ माना जाता है
    उज्जैन। हमारे धर्म ग्रंथों में बिना सिंगार के स्त्री को अधूरा मानागया है। विवाह के बाद जो स्त्री सिंगार नहीं करती उसे सुलक्षणा नहीं माना जाता है, क्योंकि विवाहित स्त्रियों के लिए सिंगार को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए सभी सुहागन के लिए ये सोलह सिंगार बहुत जरूरी और एक तरह का शुभ शकुन माने गए हैं। बिंदी - सुहागिन स्त्रियों को कुमकुम या सिंदूरसे अपने माथे पर लाल बिंदी जरूर लगाना चाहिए। इसे परिवार की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कंगन और चूड़ियां- हिन्दू परिवारों में सदियों से यह...
    August 21, 04:50 PM
  • ये हैं रावण के सौतेले भाई, धन-संपत्ति के लिए करते हैं इनकी पूजा
    उज्जैन। धर्म ग्रंथों के अनुसार रावण के दो भाई थे कुंभकर्ण और विभीषण। ये बात सभी जानते हैं, लेकिन रावण के सौतेले भाई के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ग्रंथों में इनका नाम कुबेर बताया गया है। कुबेर राजाओं के अधिपति तथा धन के स्वामी हैं। वे देवताओं के धनाध्यक्ष के रूप मे जाने जाते हैं। इसीलिए इन्हें राजाधिराज भी कहा जाता है। गंधमादन पर्वत पर स्थित संपत्ति का चौथा भाग इनके नियंत्रण में है। उसमें से सोलहवां भाग ही मानवों को दिया गया है। कुबेर नौ-निधियों के अधिपति जो हैं। ये निधियां हैं- पद्म,...
    August 21, 01:00 AM
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