धर्म गुरु
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अगर सही तरह से भक्ति करना चाहते हैं तो ये सीखें..
May 20, 2013, 13:27 PM ISTप्रेम के बिना भक्ति संभव नहीं है। जब तक मन में प्रेम का अंकुर नहीं फूटेगा, तब तक भक्ति का भाव भी नहीं जागेगा। भक्ति और उपासना बिना प्रेम के संभव ही नहीं है। जहां उपासना है, वहीं प्रेम है। प्रेम ही उपासना है, साधना है, भक्ति के शिखर पर ज्ञान है और ज्ञान के शिखर पर प्रेम है। मनुष्य को अपना श्रम ज्ञान दीप को प्रज्वलित करने में लगाना चाहिए। इससे वासना की जगह उपासना जागृत होती है।...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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अगर चाहते हैं कि कोई मुसीबत ना आए तो ऐसे रहिए....
Apr 02, 2013, 18:42 PM ISTश्रीमद भागवत कथा भगवान का ही दूसरा स्वरूप है। इसमें खुद भगवान विराजित है। ये कथा हमें जीवन-मृत्यु के बंधनों से मुक्त होने की कला सीखाती है। हमारे शरीर की आंखे और कान अच्छाई ग्रहण करने के महत्वपूर्ण द्वार हैं। हम सावधानी से निर्णय करके इनसे जीवन को सफल बनाने वाली चीजों को प्राप्त करें तो दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। मनुष्य की संगत अच्छी हो तो उसका जीवन सुधर जाता है...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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जो लोग ताकत का दुरुपयोग करते हैं उनका होता है ऐसा...
Feb 14, 2013, 14:24 PM ISTपुराणों में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर नाम के राक्षस के वध की कथा आती है। महिषासुर ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। उसके बुरे कामों और विचारों का आतंक इतना बढ़ चुका था कि मनुष्य तो ठीक है उसके भय से आक्रांत देवताओं का रंग भी पीला पड़ गया था। देवी-देवताओं, जो महिषासुर के भय से सारा साहस और वीरता खो चुके थे, ने तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु और शिव की पूजा की।...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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जानिए, क्यों करनी चाहिए हमें नवरात्रि में देवी...
Feb 11, 2013, 13:27 PM ISTकोई भी व्यक्ति, चाहे आदमी हो या औरत, एक माँ के बिना उसे अच्छी तरह से नहीं पाला जा सकता है। इसलिए, नवरात्रि उत्सव की परंपरा को दुनिया के सामने माता के प्रति हमारे प्यार, सम्मान और विश्वास के त्योहार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। नवरात्रि का त्योहार सिर्फ उस शक्ति की पूजा का त्योहार न होकर, जिसने राक्षसों को नष्ट किया, बल्कि यह भी इस दुनिया में पूरे मातृ शक्ति के लिए सम्मान का...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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धन कमाने का असली उद्देश्य क्या होना चाहिए...
Feb 07, 2013, 12:44 PM ISTमनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ माने गए हैं। ये चार है धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। लेकिन इन चारों का उद्देश्य क्या है? धर्म का उद्देश्य मोक्ष है, अर्थ नहीं। धर्म के अनुकुल आचरण करो तो किसके लिए? मोक्ष के लिए। अर्थ से धर्म कमाना है, धर्म से अर्थ नहीं कमाना। धन केवल इच्छाओं की पूर्ति के लिए मत कमाओ। अच्छे कपड़े हों, महंगे आभूषण हों, दुनियाभर के संसाधन हों, इन सबकी जीवन के लिए जरूरत है,...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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जिसने ये एक काम नहीं किया उसका जीवन बेकार है...
Feb 05, 2013, 14:14 PM ISTजिसने जीवन में परोपकार नहीं किया, जिसने अपने मन से लोगों का कभी भला नहीं चाहा, जिसने सदा लोगों से पाने की अपेक्षा की और देने की कभी कोशिश नहीं की, उसका जीवन बेकार है। जिसने परोपकार किया, उसका जीवन धन्य है। उससे ही समाज धन्य होता है। अपने लिए तो सभी जी लेते हैं, मगर जो दूसरों के लिए जीते हैं, कुछ करते हैं, परमात्मा सदैव उनके साथ रहता है। सारा संसार जैसे एक तरह की अशांति से परेशान है। सब...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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तीन शहर हैं इन तीन बातों का प्रतीक...
Jan 28, 2013, 12:34 PM ISTभगवान को जिस रूप में चाहो, वैसे मिलेगा। जरूरी है कि उससे प्रेम का रिश्ता बनाए रखना। भगवान से जब भी मांगें, भक्ति मांगें, प्रेम मांगें। शेष तो उसकी कृपा से सब मिल ही जाएगा। रामचरितमानस के जरिए तुलसी दास जी ने भगवान से मांगी भक्ति और कहा कि मेरे मन को कामादि विकारों से दूर कर दो। यदि आप मुझे भक्ति देंगे तो आपकी महिमा और बढ़ जाएगी क्योंकि आप मेरे जैसे कुपात्र को देंगे, सत्पात्र को तो सभी...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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मन से किसी डर को दूर करना है तो ये करिए...
Jan 05, 2013, 17:01 PM ISTप्रेम और भक्ति की गांठ में बहुत रस होता है। यह गांठ जितना मजबूत होगी, जीवन में उतना परमात्मा निकट आएगा। जिन लोगों के जीवन में प्रेम और भक्ति, ये दो भाव नहीं हैं, उनका जीवन ही व्यर्थ है। भागवत पुराण सूर्य है। भा से प्रकाश, ग से ग्यान, व से वैराग्य और त का अर्थ है त्याग। भागवत ज्ञान के प्रकाश से मोह, माया के अंधकार को दूर कर इंसान में वैराग्य और त्याग की भावना लाती है। विचार से सृष्टि...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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इन तीन कामों से होता है इंसान पवित्र...
Jan 01, 2013, 13:14 PM ISTपवित्र होने का अर्थ सिर्फ भौतिक रुप में साफ-सुथरा होना नहीं होता। देह का साफ होना, पवित्र नहीं कहा जा सकता। पवित्र होना यानी मानसिक और कार्मिक शुद्धि होना। हमारा मन साफ हो, कर्म सत्कर्म हों तो मनुष्य पवित्र कहा जाता है। तीन क्रियाएं हैं जो इंसान को भीतर से पवित्र करती हैं। यज्ञ , दान और तप- ये तीन मनुष्य को पवित्र करने वाले साधन हैं। इसीलिए इन तीनों का कभी त्याग नहीं करना चाहिए।...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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भगवान को जैसा चाहोगे, वैसा पाओगे
Dec 24, 2012, 15:09 PM ISTभगवान को जिस रूप में चाहो, वैसे मिलेगा। जरूरी है कि उससे प्रेम का रिश्ता बनाए रखना। भगवान से जब भी मांगें, भक्ति मांगें, प्रेम मांगें। शेष तो उसकी कृपा से सब मिल ही जाएगा। रामचरितमानस के जरिए तुलसी दास जी ने भगवान से मांगी भक्ति और कहा कि मेरे मन को कामादि विकारों से दूर कर दो। यदि आप मुझे भक्ति देंगे तो आपकी महिमा और बढ़ जाएगी क्योंकि आप मेरे जैसे कुपात्र को देंगे, सत्पात्र को तो सभी...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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जानिए, क्या हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष
Dec 07, 2012, 14:17 PM ISTमनुष्य जीवन के चार पुरुषार्थ माने गए हैं। ये चार है धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। लेकिन इन चारों का उद्देश्य क्या है? धर्म का उद्देश्य मोक्ष है, अर्थ नहीं। धर्म के अनुकुल आचरण करो तो किसके लिए? मोक्ष के लिए। अर्थ से धर्म कमाना है, धर्म से अर्थ नहीं कमाना। धन केवल इच्छाओं की पूर्ति के लिए मत कमाओ। अच्छे कपड़े हों, महंगे आभूषण हों, दुनियाभर के संसाधन हों, इन सबकी जीवन के लिए जरूरत है, इसमें दो...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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काम करना है तो उसे इस तरह दिशा दीजिए
Dec 05, 2012, 15:25 PM ISTइंसान को हर स्थिति में कोई काम तो करना ही पड़ेगा। अकर्मण्यता की स्थिति कभी होती ही नहीं है। कर्महीन रहना मनुष्य के लिए कठिन है। यदि कोई व्यक्ति कुछ भी नहीं कर रहा है, सिर्फ खाली बैठा है, तो वह बैठना भी एक कर्म ही है। मनुष्य को कुछ न कुछ कर्म करना पड़ता है। इसके बिना शरीर की यात्रा चलने वाली नहीं है। किंतु निरर्थक कर्मों में अपने को उलझाने से क्या लाभ? कर्म ऐसा हो जिससे कुछ लाभ हो, जिसका...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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अगर ऐसे करेंगे हर काम तो मिलेगा यज्ञ जैसा फल...
Dec 01, 2012, 12:25 PM ISTभगवान ने हमें जितने संसाधन दिए हैं वे सिर्फ विलासिता के लिए नहीं दिए हैं। साधनों का सदुपयोग परोपकार में है। भोग में नहीं। कुछ लोग सिर्फ खुद के भोग पर ही केंद्रित होते हैं, उन्हें दूसरों से कोई मतलब नहीं होता। ऐसे लोगों को स्वार्थी कहा जाता है। दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं साधक, सिद्ध और विषय भोगी। अयोध्या साधकों, मथुरा सिद्धों और लंका विषयी लोगों की प्रतीक हैं। शास्त्रों ने...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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ऐसे लोगों का जीवन बेकार ही होता है...
Nov 28, 2012, 14:47 PM ISTजिसने जीवन में परोपकार नहीं किया, जिसने अपने मन से लोगों का कभी भला नहीं चाहा, जिसने सदा लोगों से पाने की अपेक्षा की और देने की कभी कोशिश नहीं की, उसका जीवन बेकार है। जिसने परोपकार किया, उसका जीवन धन्य है। उससे ही समाज धन्य होता है। अपने लिए तो सभी जी लेते हैं, मगर जो दूसरों के लिए जीते हैं, कुछ करते हैं, परमात्मा सदैव उनके साथ रहता है। सारा संसार जैसे एक तरह की अशांति से परेशान है। सब...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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जानिए क्या है श्रीकृष्ण की रासलीला का अर्थ?
Nov 01, 2012, 16:46 PM ISTश्रीमद् भागवत में रास पंचध्यायी का उतना ही महत्व है जितना हमारे शरीर में आत्मा का। श्रीमद् भागवत में रास पंचध्यायी दसवें स्कंध में 29 से 33 अध्याय में है। भाईश्री ने रास लीला के अर्थ को इस लेख में समझाया है। एक गोपी जो भगवान कृष्ण के प्रति कोई इच्छा नहीं रखती। वह सिर्फ कृष्ण को ही चाहती है। उनके साथ रास खेलना चाहती है। उसकी खुशी सिर्फ भगवान कृष्ण को खुश देखने में है। भागवत में श्री...
By: Shri Ramesh Bhai Ojha
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गुजरात के सबसे लोकप्रिय संत मुरारी बापू को बापू के रूप में भी जाना जाता है। रामचरित मानस के एक...और पढ़ें

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श्री रमेश भाई ओझा भाईश्री और भाईजी के रूप में लोकप्रिय हैं। भाईश्री, कथाकार के रूप में एक अलग ही...और पढ़ें

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श्रीश्री रविशंकर, देश-दुनिया ख्यात आध्यात्मिक गुरु हैं। आप संसार में शांति दूत के रूप में भी...और पढ़ें





