धर्म गुरु

 
श्री रमेश भाई ओझा
श्री रमेश भाई ओझा भाईश्री और भाईजी के रूप में लोकप्रिय हैं। भाईश्री, कथाकार के रूप में एक अलग ही पहचान बनाई है। धर्म गुरु के साथ एक आध्यात्मिक विचारक के रूप में अपने अनुयायियों में हमेशा लोकप्रिय रहे हैं। भाईश्री ने अपनी कथा और प्रवचनों के जरिए कोशिश की है कि लोग सर्वशक्तिमान के अस्तित्व में विश्वास करें। भाईश्री का प्रयास है कि दुनिया अपनी अच्छाई के लिए जानी जाए। श्री रमेश भाई लोगों को प्यार, अच्छाई और आध्यात्मिकता के रास्ते पर चलने के लिए हमेशा प्रेरित करते हैं।
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  • मानव शरीर है मंदिर स्वरूप

    Feb 12, 2014, 15:55 PM IST
    मानव शरीर है मंदिर स्वरूप

    ख्यात संत रमेशभाई ओझा अपनी दिव्यवाणी और लोकरुचि वाली अभिव्यक्ति के लिए प्रभु प्रेमियों में आदर से सुने जाते हैं। जीवन के हर क्षेत्र पर भाईश्री का विश्लेषण अद्भुत और अनुकरणीय है। वे जीवन की समस्याओं का हल अपने प्रवचनों के माध्यम से सहजता से देते हैं। भक्ति, परमात्मा प्राप्ति और ज्ञानार्जन के विषय में उनके दिए सूत्र अद्वितीय हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही सूत्रों के बारे में...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • जानिए सुख के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए

    Feb 08, 2014, 12:34 PM IST
    जानिए सुख के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए

    सुख बांटोगे तो बढ़ेगा, दुःख मिलकर सहन करोगे तो सह्य हो जाएगा। संयुक्त परिवार में रहने से हो सकता है कि स्वतन्त्रता में कुछ कमी आए, परन्तु उसमें रहने का आनन्द अलग ही है। प्रतिशोध की अग्नि व्यक्ति को जला देती है जबकि प्रायश्चित की अग्नि कल्याण कारक होती है। रक्तदान एक ऐसा दान है जिसे गरीब से गरीब भी कर सकता है तथा अमीर से अमीर व्यक्ति को इसे लेना पड़ सकता है। अतः जीवित हो तब तक...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • पांच तरह के होते हैं यज्ञ, हर एक का होता है कुछ खास...

    Feb 06, 2014, 08:02 AM IST
    पांच तरह के होते हैं यज्ञ, हर एक का होता है कुछ खास फल

    यज्ञ हमारी वैदिक परंपरा है। लोक कल्याण के लिए ऋषियों ने, राजाओं ने, अवतारों ने कई-कई यज्ञ किए हैं। यज्ञ भारतवंश की अभिन्न संस्कृति है। यज्ञ वैदिक भी हैं और वैज्ञानिक भी। संसार के सही संचालन और संतुलन के लिए यज्ञ आवश्यक है।  वेदानुसार यज्ञ पाँच प्रकार के होते हैं- (1) ब्रह्मयज्ञ (2) देवयज्ञ (3) पितृयज्ञ (4) वैश्वदेव यज्ञ (5) अतिथि यज्ञ।  यज्ञ का अर्थ है- शुभ कर्म। श्रेष्ठ कर्म।...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • इस तरह का हो आपके जीवन में संतुलन

    Feb 03, 2014, 08:41 AM IST
    इस तरह का हो आपके जीवन में संतुलन

    जिस प्रकार वीणा के तार यदि कम कसे हों या ज्यादा कस दिए जाएं तो सुर नहीं निकलते। सुर निकालने के लिए अधिक और कम के मध्य की स्थिति श्रेष्ठ होती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन में एक मध्य मार्ग अपनाकर चलना चाहिए। मनुष्य को परिवार में सभी सदस्यों का हाथ पकड़े रहना चाहिए लेकिन उनसे हाथ भर की दूरी भी बनाए रखे। इस प्रकार सांसारिक जीवन में एक प्रकार की प्रामाणिक दूरी बनाए रखे। भाव यह है कि...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • असफलता और गलतियों का सबसे बड़ा कारण क्या है

    Jan 25, 2014, 09:06 AM IST
    असफलता और गलतियों का सबसे बड़ा कारण क्या है

    जहां आसक्ति है, वहीं आग्रह है। दोनों साथ-साथ ही रहते हैं। जहां आसक्ति है, वहां आग्रह आएगा और आग्रह होगा, तो परिताप होगा। वह ठीक तरह से कर्मक्षेत्र में प्रवृत्त नहीं हो पाएगा। वह यदि प्रयास करेगा तो भी उससे गलतियां होंगी, गलतियों के कारण क्रोध आएगा और पुन: गलतियां होंगी। टेनिस के खेल में खिलाड़ी उत्तेजित हो जाता है तो ठीक से खेल नहीं पाता। जब खेल नहीं पाता तो अपना रेकेट पटकता है। जहाँ...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • जानिए कहां और कैसे जन्म लेता है पाप

    Jan 22, 2014, 08:31 AM IST
    जानिए कहां और कैसे जन्म लेता है पाप

    पाप अज्ञानता के अंधकार में होता है। पाप का प्रमुख कारण वासना है। वासना भी अज्ञानता के कारण होती है। जहां प्रकाश है, वहीं उपासना है। जहां उपासना है, वहीं प्रेम है। प्रेम उपासना है, साधना है भक्ति के शिखर पर ज्ञान है और ज्ञान के शिखर पर प्रेम है। मनुष्य को अपना श्रम ज्ञान दीप को प्रज्वलित करने में लगाना चाहिए। इससे वासना की जगह उपासना जागृत होती है।  परमात्मा द्वारा निर्मित मंदिर...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • ये शरीर भगवान का बनाया मंदिर है...

    Jan 19, 2014, 09:03 AM IST
    ये शरीर भगवान का बनाया मंदिर है...

    ख्यात संत रमेशभाई ओझा अपनी दिव्यवाणी और लोकरुचि वाली अभिव्यक्ति के लिए प्रभु प्रेमियों में आदर से सुने जाते हैं। जीवन के हर क्षेत्र पर भाईश्री का विश्लेषण अद्भुत और अनुकरणीय है। वे जीवन की समस्याओं का हल अपने प्रवचनों के माध्यम से सहजता से देते हैं। भक्ति, परमात्मा प्राप्ति और ज्ञानार्जन के विषय में उनके दिए सूत्र अद्वितीय हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही सूत्रों के बारे में...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • मनुष्य के लिए ये सबसे मुश्किल काम है....

    Jan 15, 2014, 08:43 AM IST
    मनुष्य के लिए ये सबसे मुश्किल काम है....

    उज्जैन। इंसान को हर स्थिति में कोई काम तो करना ही पड़ेगा। अकर्मण्यता की स्थिति कभी होती ही नहीं है। कर्महीन रहना मनुष्य के लिए कठिन है। यदि कोई व्यक्ति कुछ भी नहीं कर रहा है, सिर्फ खाली बैठा है, तो वह बैठना भी एक कर्म ही है। मनुष्य को कुछ न कुछ कर्म करना पड़ता है। इसके बिना शरीर की यात्रा चलने वाली नहीं है। किंतु निरर्थक कर्मों में अपने को उलझाने से क्या लाभ?  कर्म ऐसा हो जिससे कुछ...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • इस तरह बढ़ेगा सुख, कम हो जाएगा दुःख..

    Jan 11, 2014, 12:43 PM IST
    इस तरह बढ़ेगा सुख, कम हो जाएगा दुःख..

    सुख बांटोगे तो बढ़ेगा, दुःख मिलकर सहन करोगे तो सह्य हो जाएगा। संयुक्त परिवार में रहने से हो सकता है कि स्वतन्त्रता में कुछ कमी आए, परन्तु उसमें रहने का आनन्द अलग ही है।  प्रतिशोध की अग्नि व्यक्ति को जला देती है जबकि प्रायश्चित की अग्नि कल्याण कारक होती है। रक्तदान एक ऐसा दान है जिसे गरीब से गरीब भी कर सकता है तथा अमीर से अमीर व्यक्ति को इसे लेना पड़ सकता है। अतः जीवित हो तब तक...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • आखिर क्या कारण है इस अशांति और अभाव का...।

    Jan 08, 2014, 08:24 AM IST
    आखिर क्या कारण है इस अशांति और अभाव का...।

    सारा संसार जैसे एक तरह की अशांति से परेशान है। सब कुछ होते हुए भी अभाव का भाव लोगों के मन में बढ़ता ही जा रहा है। इंसान के जीवन में जो संगीत सुनाई पड़ना चाहिए, वह सुनाई नहीं दे रहा है। चारों ओर कोलाहल हो रहा है। आदमी प्रयास तो शांति पाने का कर रहा है, लेकिन अशांति उसे छोड़ नहीं रही है।   यह बात हमेशा ध्यान रखने की है कि मन की शांति सांसारिक चीजों से नहीं, वरन संतों और गुरु की शरण में...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • परमात्मा को पाने के लिए इन बातों को अपनाएं...

    Jan 04, 2014, 00:10 AM IST
    परमात्मा को पाने के लिए इन बातों को अपनाएं...

    ख्यात संत रमेशभाई ओझा अपनी दिव्यवाणी और लोकरुचि वाली अभिव्यक्ति के लिए प्रभु प्रेमियों में आदर से सुने जाते हैं। जीवन के हर क्षेत्र पर भाईश्री का विश्लेषण अद्भुत और अनुकरणीय है। वे जीवन की समस्याओं का हल अपने प्रवचनों के माध्यम से सहजता से देते हैं। भक्ति, परमात्मा प्राप्ति और ज्ञानार्जन के विषय में उनके दिए सूत्र अद्वितीय हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही सूत्रों के बारे में...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • हर नई शुरुआत करें परमात्मा के साथ...

    Jan 01, 2014, 06:59 AM IST
    हर नई शुरुआत करें परमात्मा के साथ...

    आज से नए साल की शुरुआत हो गई है। हर नई चीज की शुरुआत परमात्मा के सानिध्य में करनी चाहिए। इससे उसकी सफलता और समृद्धि निश्चित हो जाती है।    भगवान को जिस रूप में चाहो, वैसे मिलेगा। जरूरी है कि उससे प्रेम का रिश्ता बनाए रखना। भगवान से जब भी मांगें, भक्ति मांगें, प्रेम मांगें। शेष तो उसकी कृपा से सब मिल ही जाएगा। रामचरितमानस के जरिए तुलसी दास जी ने भगवान से मांगी भक्ति और कहा कि मेरे...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • जानिए क्यों जरूरी है हमारे लिए शक्ति का पूजन

    Dec 30, 2013, 07:48 AM IST
    जानिए क्यों जरूरी है हमारे लिए शक्ति का पूजन

    उज्जैन। पुराणों में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर नाम के राक्षस के वध की कथा आती है। महिषासुर ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया। उसके बुरे कामों और विचारों का आतंक इतना बढ़ चुका था कि मनुष्य तो ठीक है उसके भय से आक्रांत देवताओं का रंग भी पीला पड़ गया था।    देवी-देवताओं, जो महिषासुर के भय से सारा साहस और वीरता खो चुके थे, ने तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु और शिव की पूजा...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • जानिए, कितनी तरह के होते हैं यज्ञ, किससे क्या फल...

    Dec 27, 2013, 00:10 AM IST
    जानिए, कितनी तरह के होते हैं यज्ञ, किससे क्या फल मिलता है

    यज्ञ हमारी वैदिक परंपरा है। लोक कल्याण के लिए ऋषियों ने, राजाओं ने, अवतारों ने कई-कई यज्ञ किए हैं। यज्ञ भारतवंश की अभिन्न संस्कृति है। यज्ञ वैदिक भी हैं और वैज्ञानिक भी। संसार के सही संचालन और संतुलन के लिए यज्ञ आवश्यक है।  वेदानुसार यज्ञ पाँच प्रकार के होते हैं-(1) ब्रह्मयज्ञ (2) देवयज्ञ (3) पितृयज्ञ (4) वैश्वदेव यज्ञ (5) अतिथि यज्ञ।  यज्ञ का अर्थ है- शुभ कर्म। श्रेष्ठ कर्म। सतकर्म।...

    By: Shri Ramesh Bhai Ojha

  • जानिए भक्ति के कितने रूप होते हैं...

    Dec 24, 2013, 07:58 AM IST
    जानिए भक्ति के कितने रूप होते हैं...

    श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम् । अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम् ॥ श्रवण (परीक्षित), कीर्तन (शुकदेव), स्मरण (प्रह्लाद), पादसेवन (लक्ष्मी), अर्चन (पृथुराजा), वंदन (अक्रूर), दास्य (हनुमान), सख्य (अर्जुन), और आत्मनिवेदन (बलि राजा) - इन्हें नवधा भक्ति कहते हैं । श्रवण: ईश्वर की लीला, कथा, महत्व, शक्ति, स्त्रोत इत्यादि को परम श्रद्धा सहित अतृप्त मन से निरंतर सुनना। कीर्तन:...

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