धर्म गुरु

 
श्री मुरारी बापू
गुजरात के सबसे लोकप्रिय संत मोरारी बापू को बापू के रूप में भी जाना जाता है। रामचरित मानस के एक प्रसिद्ध कथाकार है और पचास से अधिक वर्षों के लिए रामकथा पर अपनी विशिष्ट शैली में लोगों को कथा रसपान करा रहे हैं। अपनी नौ दिनी कथा में बापू रामचरित मानस की एक चौपाई लेकर पूरे नौ दिन उस पर विस्तार से विभिन्न विषयों पर व्याख्या करते हैं। कथा के मूल में समग्र लोकाचार, सार्वभौमिक शांति और सच्चाई, प्यार और दया की भावना निहित होती है, जबकि केन्द्र बिन्दु शास्त्र ही है। बापू के प्रवचनों में सिर्फ हिंदू धर्म ही केंद्रित नहीं होता, अन्य धर्मों पर भी प्रेम दृष्टि रखते हैं।
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  • ध्यान रखें, धन और लक्ष्मी में बहुत अंतर होता है

    Feb 10, 2014, 12:53 PM IST
    ध्यान रखें, धन और लक्ष्मी में बहुत अंतर होता है

    धन और लक्ष्मी में बहुत अंतर होता है। इन दोनों में बहुत अंतर है। आपके पास पैसा भले ही बहुत हो लेकिन आपके पास लक्ष्मी का निवास है या नहीं ये अलग बात है। ऐसा पैसा जिसे दूसरों की सेवा, परोपकार में बांटने में कष्ट होता हो वह वह सिर्फ धन होता है और जिसे जनसेवा में खुलकर लगाया जाए, वह लक्ष्मी का रूप होता है। परिवार में तीन सत्य होते हैं, एक मेरा सत्य, दूसरा आपका सत्य और तीसरा हमारा सत्य।...

    By: Shri Murari Bapu

  • जानिए, सत्य के भी हैं नौ रुप और रस

    Jan 31, 2014, 08:06 AM IST
    जानिए, सत्य के भी हैं नौ रुप और रस

    सत्य का कोई एक रस नहीं होता। सत्य के अपने रुप हैं, अपने रंग हैं। हमारे जीवन में सत्य हर बार अलग परिस्थिति में किसी भिन्न रुप में उतरता है। सत्य के नौ रस हैं। सत्य हमेशा विजयी होता है लेकिन इसको सिर्फ जीत और हार के मापदंड पर नहीं रखा जा सकता।  सत्य के मार्ग पर विजेता वही बन सकता है जो हारने की क्षमता रखता है। विजेता बनने की लालसा सत्य में बाधक बन सकती है।  शांति, सत्य का एक रस है और...

    By: Shri Murari Bapu

  • जानिए जीवन का अंतिम सत्य क्या है...

    Jan 24, 2014, 08:16 AM IST
    जानिए जीवन का अंतिम सत्य क्या है...

    सुख और दुख जीवन के दो पहलु है। जीवन में गंगा धारा के समान है। कभी सुख तो कभी दुख आते ही रहते हैं, इससे घबराना नहीं चाहिए। भगवान श्रीराम चारों भाई विवाह कर अयोध्या वापस आए। अयोध्या में आनंद का वातावरण बन गया। वहीं अचानक वनवास की घोषणा हुई और भगवान जाने को तैयार हो गए, जिससे अयोध्या पर भारी कष्ट आ गया। संसार में सुख-दुख, दिन-रात, पाप-पुण्य, अमीरी-गरीबी, भला-बुरा सब व्याप्त है। बड़ी...

    By: Shri Murari Bapu

  • पांच तरह की होती है वाणी, हर वाणी में होता है सत्य

    Jan 16, 2014, 09:04 AM IST
    पांच तरह की होती है वाणी, हर वाणी में होता है सत्य

    सत्य बहुधा वाणी में ही प्रतिष्ठित माना गया है और वाणी पांच प्रकार की होती है। ब्रह्म वाणी, देव वाणी, वेद वाणी, आत्म वाणी और गुरुवाणी। ब्रह्म वाणी परम शून्य, परम विस्तार से निकली है, जो महात्मा ही सुन सकते हैं। देववाणी या दिव्य वाणी ब्रह्मवाणी से थोड़ा नीचे है इसे भी सुनना आम जनता के वश में नहीं है।  वेद वाणी अपने-अपने शास्त्रों की वाणी है, इसे पढ़ना और समझना कठिन है। आत्मवाणी मनुष्य...

    By: Shri Murari Bapu

  • सत्य के साथ एक ये बात होना भी जरूरी है...

    Jan 13, 2014, 08:53 AM IST
    सत्य के साथ एक ये बात होना भी जरूरी है...

    धन और लक्ष्मी में बहुत अंतर होता है। इन दोनों में बहुत अंतर है। आपके पास पैसा भले ही बहुत हो लेकिन आपके पास लक्ष्मी का निवास है या नहीं ये अलग बात है। ऐसा पैसा जिसे दूसरों की सेवा, परोपकार में बांटने में कष्ट होता हो वह वह सिर्फ धन होता है और जिसे जनसेवा में खुलकर लगाया जाए, वह लक्ष्मी का रूप होता है।  परिवार में तीन सत्य होते हैं, एक मेरा सत्य, दूसरा आपका सत्य और तीसरा हमारा सत्य।...

    By: Shri Murari Bapu

  • इस तरह प्राप्त होता है सत्य..

    Jan 10, 2014, 08:31 AM IST
    इस तरह प्राप्त होता है सत्य..

    सत्य बोलने से कोई हानि नहीं होती, बल्कि इसका फायदा ही होता है। सही और सहो एक ही धातु के बने हैं, अर्थात सत्य बोलने वाले को सहना ही पड़ेगा। श्रद्धा से सत्य की प्राप्ति होती है। इसमें भी आनंद है, पर शब्द का होना आवश्यक है। सद्गुरु जुबां से नहीं, हृदय से बोलता है। सद्जनों ने इसी को अमृत का नाम दिया है। हर मनुष्य के लिए सत्य एक है। हर व्यक्ति के लिए इसके अलग-अलग मायने हैं। वास्तव में सत्य...

    By: Shri Murari Bapu

  • जब तक विकार है, तब तक विश्राम संभव नहीं...

    Jan 09, 2014, 09:02 AM IST
    जब तक विकार है, तब तक विश्राम संभव नहीं...

    दुनिया में सबसे अच्छी दवाई है खुश रहना। इससे शरीर को अच्छी औषधि और आरोग्यता मिलती है। यह निरोगी होने की निशानी भी है। प्रसन्नता जिसके साथ रहती है, वो तेज में जीता है। इसलिए साधारण व्यक्ति के लिए प्रसन्नता हासिल करना बड़ा ही मुश्किल होता है। जबकि यह सबकी जागीर है। जब तक विकार है, विश्राम संभव ही नहीं। अविकार की भूमिका विश्राम का स्वरूप या कहें कि विश्राम की पहचान है। प्रेम ही इस...

    By: Shri Murari Bapu

  • दुनिया की सारी सुविधाएं इस एक बात के बिना बेकार...

    Jan 07, 2014, 07:56 AM IST
    दुनिया की सारी सुविधाएं इस एक बात के बिना बेकार हैं...

    जिस प्रकार वीणा के तार यदि कम कसे हों या ज्यादा कस दिए जाएं तो सुर नहीं निकलते। सुर निकालने के लिए अधिक और कम के मध्य की स्थिति श्रेष्ठ होती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन में एक मध्य मार्ग अपनाकर चलना चाहिए। मनुष्य को परिवार में सभी सदस्यों का हाथ पकड़े रहना चाहिए लेकिन उनसे हाथ भर की दूरी भी बनाए रखे। इस प्रकार सांसारिक जीवन में एक प्रकार की प्रामाणिक दूरी बनाए रखे। भाव यह है कि...

    By: Shri Murari Bapu

  • सारे पाप और दोषों का नाश ऐसे भी कर सकते हैं हम

    Dec 31, 2013, 00:10 AM IST
    सारे पाप और दोषों का नाश ऐसे भी कर सकते हैं हम

    उज्जैन। राम कथा कोई साधारण कथा नहीं है। इसकी पंक्ति-पंक्ति में राम हैं। कथा सुनना मन को शांत और विचारों को शुद्ध करता है। राम कथा का अमृत मानसिक रोगों से मुक्त करता है। ब्रह्म रूपी समुद्र के मंथन से निकला कथा का अमृत। राम कथा सुनने से राग-द्वेष के विकारों का विनाश होगा। भीतर के रोग मिटेंगे। इस अमृत को पाने के लिए देवता भी ललचाते हैं।  अमृत मुख्य रूप में पीने की वस्तु है, खाने की...

    By: Shri Murari Bapu

  • संसार की सबसे श्रेष्ठ दवाई है ये एक चीज...

    Dec 28, 2013, 00:10 AM IST
    संसार की सबसे श्रेष्ठ दवाई है ये एक चीज...

    दुनिया में सबसे अच्छी दवाई है खुश रहना। इससे शरीर को अच्छी औषधि और आरोग्यता मिलती है। यह निरोगी होने की निशानी भी है। प्रसन्नता जिसके साथ रहती है, वो तेज में जीता है। इसलिए साधारण व्यक्ति के लिए प्रसन्नता हासिल करना बड़ा ही मुश्किल होता है। जबकि यह सबकी जागीर है। जब तक विकार है, विश्राम संभव ही नहीं। अविकार की भूमिका विश्राम का स्वरूप या कहें कि विश्राम की पहचान है। प्रेम ही इस...

    By: Shri Murari Bapu

  • जानिए क्या होता है मोक्ष का अर्थ, कैसे मिलता है ये

    Dec 26, 2013, 00:10 AM IST
    जानिए क्या होता है मोक्ष का अर्थ, कैसे मिलता है ये

    हरि नाम साधु संग और स्वयं राम चरित मानस। कुछ बीमारियों से मुक्त होकर मोक्ष पाने का उपाय है। मोक्ष कोई भूमि नहीं है, एक भूमिका है। इसका तालुक मन से है, एक मन से जुडी स्थिति है।  मोक्ष मन की स्थिति है और मन को बोध होगा भागवत कथा से। जब मन को बोध होगा तब कोई भी घटना विचलित नहीं करेगी। तुम ने पाया है तो तुम अपने सदभाग को बांटो। तुम्हारे सुख में सब का भाग है। भगवत भक्ति के बिना मोक्ष सुख...

    By: Shri Murari Bapu

  • सत्य के भी होते हैं नौ रस, जानिए कैसे करता है असर

    Dec 21, 2013, 07:49 AM IST
    सत्य के भी होते हैं नौ रस, जानिए कैसे करता है असर

    सत्य का कोई एक रस नहीं होता। सत्य के अपने रुप हैं, अपने रंग हैं। हमारे जीवन में सत्य हर बार अलग परिस्थिति में किसी भिन्न रुप में उतरता है। सत्य के नौ रस हैं। सत्य हमेशा विजयी होता है लेकिन इसको सिर्फ जीत और हार के मापदंड पर नहीं रखा जा सकता।  सत्य के मार्ग पर विजेता वही बन सकता है जो हारने की क्षमता रखता है। विजेता बनने की लालसा सत्य में बाधक बन सकती है।  शांति, सत्य का एक रस है और...

    By: Shri Murari Bapu

  • एक वानर ने रावण को बताई थी ये 14 बातें, आज भी हैं...

    Dec 21, 2013, 07:44 AM IST
    एक वानर ने रावण को बताई थी ये 14 बातें, आज भी हैं आपके बहुत काम की

    वैसे तो रावण को परम विद्वान भी माना जाता है क्योंकि वह समस्त वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता था, प्रकांड पंडित था। एक ओर तो रावण में ये गुण थे वहीं दूसरी ओर रावण में कई अवगुण भी थे। रावण ने कामवश होकर सीता का हरण किया और श्रीराम से युद्ध में पराजित हुआ। रावण को कई बार सभी ने समझाने की कोशिशें भी की लेकिन अपनी शक्तियों के झूठे घमंड में उसने किसी की बात नहीं मानी। बाली के पुत्र अंगद ने भी...

    By: Shri Murari Bapu

  • इन तीन शब्दों का सही अर्थ समझ लिया तो जीवन आसान...

    Dec 19, 2013, 08:40 AM IST
    इन तीन शब्दों का सही अर्थ समझ लिया तो जीवन आसान हो जाएगा

    सत्य, करुणा व प्रेम न तो सिद्धांत है और न ही तत्व, यह तो सिर्फ और सिर्फ रस हैं, रुचि है। मीरा का प्रभु गिरिधर नागर के प्रति अटूट प्रेम था और यह निस्वार्थ प्रेम ही रस है। हरी भजन से सिद्धांत बदल जाते हैं, इसलिए इस दिशा में बढ़ने के लिए पहले नकार यानि कि शून्य से बढ़ना शुरू किया जाता है। उसके बाद एक-दो का क्रम चलता है।   प्रेम व करुणा सिद्धांत नहीं है। सत्य अगर सिद्धांत होता तो बदलता...

    By: Shri Murari Bapu

  • किसी भी काम में सफलता के लिए सबसे पहले ये करें...

    Dec 17, 2013, 08:12 AM IST
    किसी भी काम में सफलता के लिए सबसे पहले ये करें...

    किसी भी कार्य की सफलता के लिए भावना अच्छी होनी चाहिए। कार्य के प्रारंभ में हमारा भाव क्या है। हम क्या करना चाहते हैं। इसका महत्व है। सफलता के लिए भगवान का सुमिरण कर कार्य करें। भगवान का ध्यान कर किए जाने वाले कार्य में सफलता अवश्य मिलती है। केवल परिश्रम से कुछ नहीं होता। कुछ लोग भगवान की असीम कृपा से कम परिश्रम में भी सफलता की ऊंचाइयों को छू लेते हैं। संतों ने सफलता के तीन मंत्र...

    By: Shri Murari Bapu

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