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धर्म गुरू

  • मानव शरीर है मंदिर स्वरूप
    ख्यात संत रमेशभाई ओझा अपनी दिव्यवाणी और लोकरुचि वाली अभिव्यक्ति के लिए प्रभु प्रेमियों में आदर से सुने जाते हैं। जीवन के हर क्षेत्र पर भाईश्री का विश्लेषण अद्भुत और अनुकरणीय है। वे जीवन की समस्याओं का हल अपने प्रवचनों के माध्यम से सहजता से देते हैं। भक्ति, परमात्मा प्राप्ति और ज्ञानार्जन के विषय में उनके दिए सूत्र अद्वितीय हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही सूत्रों के बारे में भाईश्री रमेश भाई ओझा के श्रीमुख से निकले प्रवचनों के जरिए..... परमात्मा द्वारा निर्मित मंदिर में जहां उनका वास होता है,...
    February 12, 03:55 PM
  • ध्यान रखें, धन और लक्ष्मी में बहुत अंतर होता है
    धन और लक्ष्मी में बहुत अंतर होता है। इन दोनों में बहुत अंतर है। आपके पास पैसा भले ही बहुत हो लेकिन आपके पास लक्ष्मी का निवास है या नहीं ये अलग बात है। ऐसा पैसा जिसे दूसरों की सेवा, परोपकार में बांटने में कष्ट होता हो वह वह सिर्फ धन होता है और जिसे जनसेवा में खुलकर लगाया जाए, वह लक्ष्मी का रूप होता है। परिवार में तीन सत्य होते हैं, एक मेरा सत्य, दूसरा आपका सत्य और तीसरा हमारा सत्य। परिवार में इन तीन सत्यों को आत्मसात किया जाना चाहिए। परिवार में तीनों सत्यों का त्रिकोण जुड़ा हुआ है। सूर्य हम सबका...
    February 10, 12:53 PM
  • जानिए सुख के लिए हमें क्या-क्या करना चाहिए
    सुख बांटोगे तो बढ़ेगा, दुःख मिलकर सहन करोगे तो सह्य हो जाएगा। संयुक्त परिवार में रहने से हो सकता है कि स्वतन्त्रता में कुछ कमी आए, परन्तु उसमें रहने का आनन्द अलग ही है।प्रतिशोध की अग्नि व्यक्ति को जला देती है जबकि प्रायश्चित की अग्नि कल्याण कारक होती है। रक्तदान एक ऐसा दान है जिसे गरीब से गरीब भी कर सकता है तथा अमीर से अमीर व्यक्ति को इसे लेना पड़ सकता है। अतः जीवित हो तब तक रक्तदान करो तथा मृत्यु के पश्चात अंगदान करो यह बहुत पुण्य का कार्य है। कथा इन्सान बनाने का कारखाना है। कथा मनोरंजन के लिए...
    February 8, 12:34 PM
  • पांच तरह के होते हैं यज्ञ, हर एक का होता है कुछ खास फल
    यज्ञ हमारी वैदिक परंपरा है। लोक कल्याण के लिए ऋषियों ने, राजाओं ने, अवतारों ने कई-कई यज्ञ किए हैं। यज्ञ भारतवंश की अभिन्न संस्कृति है। यज्ञ वैदिक भी हैं और वैज्ञानिक भी। संसार के सही संचालन और संतुलन के लिए यज्ञ आवश्यक है। वेदानुसार यज्ञ पाँच प्रकार के होते हैं- (1) ब्रह्मयज्ञ (2) देवयज्ञ (3) पितृयज्ञ (4) वैश्वदेव यज्ञ (5) अतिथि यज्ञ। यज्ञ का अर्थ है- शुभ कर्म। श्रेष्ठ कर्म। सतकर्म। वेदसम्मत कर्म। सकारात्मक भाव से ईश्वर-प्रकृति तत्वों से किए गए आह्वापन से जीवन की प्रत्येक इच्छा पूरी होती है। आज हम...
    February 6, 08:02 AM
  • इस तरह का हो आपके जीवन में संतुलन
    जिस प्रकार वीणा के तार यदि कम कसे हों या ज्यादा कस दिए जाएं तो सुर नहीं निकलते। सुर निकालने के लिए अधिक और कम के मध्य की स्थिति श्रेष्ठ होती है, उसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन में एक मध्य मार्ग अपनाकर चलना चाहिए। मनुष्य को परिवार में सभी सदस्यों का हाथ पकड़े रहना चाहिए लेकिन उनसे हाथ भर की दूरी भी बनाए रखे। इस प्रकार सांसारिक जीवन में एक प्रकार की प्रामाणिक दूरी बनाए रखे। भाव यह है कि इतना नजदीक न हो कि दूर जाते हुए डर लगे व इतना दूर न रहो कि पास आते हुए भय सताए। यही प्रमाणिकता है। मानव शरीर में से कई...
    February 3, 08:41 AM
  • जानिए, सत्य के भी हैं नौ रुप और रस
    सत्य का कोई एक रस नहीं होता। सत्य के अपने रुप हैं, अपने रंग हैं। हमारे जीवन में सत्य हर बार अलग परिस्थिति में किसी भिन्न रुप में उतरता है। सत्य के नौ रस हैं। सत्य हमेशा विजयी होता है लेकिन इसको सिर्फ जीत और हार के मापदंड पर नहीं रखा जा सकता। सत्य के मार्ग पर विजेता वही बन सकता है जो हारने की क्षमता रखता है। विजेता बनने की लालसा सत्य में बाधक बन सकती है। शांति, सत्य का एक रस है और सत्य शांति में रुचि रखता है, अशांति में नहीं। अगर किसी धार्मिक ग्रंथ का स्वाध्याय करते हुए आपकी आंखों में आंसू आ जाएं तो...
    January 31, 08:06 AM
  • सिर्फ प्रेम की एक नजर से आप व्यक्त कर सकते हैं अपनी भावनाएं...
    आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की वाणी जितनी मिठास भरी और मिर्मल है, उतने ही श्रेष्ठ उनके दिव्य विचार हैं। जीवन में प्रेम, शांति और सौहार्द्र का संदेश देने वाले गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर जीवन की जटिलता से निपटने के इतने सहज उपाय बताते हैं कि उनके विचार सुन-पढ़ कर मन में कोई संदेह या शंका नहीं रह जाती। ये महज विचार नहीं हैं, बल्कि ये वो सूत्र हैं जिन्हें अपने भीतर उतारकर हम जीवन की दिशा को बदल सकते हैं। प्रेम देने का आनंद इतना रसमय है कि उसे कौन ग्रहण कर रहा है यह...
    January 27, 08:29 AM
  • असफलता और गलतियों का सबसे बड़ा कारण क्या है
    जहां आसक्ति है, वहीं आग्रह है। दोनों साथ-साथ ही रहते हैं। जहां आसक्ति है, वहां आग्रह आएगा और आग्रह होगा, तो परिताप होगा। वह ठीक तरह से कर्मक्षेत्र में प्रवृत्त नहीं हो पाएगा। वह यदि प्रयास करेगा तो भी उससे गलतियां होंगी, गलतियों के कारण क्रोध आएगा और पुन: गलतियां होंगी। टेनिस के खेल में खिलाड़ी उत्तेजित हो जाता है तो ठीक से खेल नहीं पाता। जब खेल नहीं पाता तो अपना रेकेट पटकता है। जहाँ फल की आसक्ति हुई, तो फिर आग्रह, टेंशन, क्रोध सब कुछ आएगा। फलत: भूलें होंगी, फिर क्रोध-टेंशन का ऐसा चक्र चलता ही रहेगा।...
    January 25, 09:06 AM
  • जानिए जीवन का अंतिम सत्य क्या है...
    सुख और दुख जीवन के दो पहलु है। जीवन में गंगा धारा के समान है। कभी सुख तो कभी दुख आते ही रहते हैं, इससे घबराना नहीं चाहिए। भगवान श्रीराम चारों भाई विवाह कर अयोध्या वापस आए। अयोध्या में आनंद का वातावरण बन गया। वहीं अचानक वनवास की घोषणा हुई और भगवान जाने को तैयार हो गए, जिससे अयोध्या पर भारी कष्ट आ गया। संसार में सुख-दुख, दिन-रात, पाप-पुण्य, अमीरी-गरीबी, भला-बुरा सब व्याप्त है। बड़ी सावधानी से जीवन जीना चाहिए। सुख भी स्थाई नहीं है, तो दुख भी स्थाई नहीं है। रात पूरी होने पर दिन होता है और दिन के समाप्ति पर...
    January 24, 08:16 AM
  • जानिए कहां और कैसे जन्म लेता है पाप
    पाप अज्ञानता के अंधकार में होता है। पाप का प्रमुख कारण वासना है। वासना भी अज्ञानता के कारण होती है। जहां प्रकाश है, वहीं उपासना है। जहां उपासना है, वहीं प्रेम है। प्रेम उपासना है, साधना है भक्ति के शिखर पर ज्ञान है और ज्ञान के शिखर पर प्रेम है। मनुष्य को अपना श्रम ज्ञान दीप को प्रज्वलित करने में लगाना चाहिए। इससे वासना की जगह उपासना जागृत होती है। परमात्मा द्वारा निर्मित मंदिर में जहां उनका वास होता है, उनका दर्शन अहंकार रोकता है क्योंकि अहंकार कभी-कभी स्वयं ईश्वर होने का दंभ भरता है। मानव का...
    January 22, 08:31 AM
  • ये शरीर भगवान का बनाया मंदिर है...
    ख्यात संत रमेशभाई ओझा अपनी दिव्यवाणी और लोकरुचि वाली अभिव्यक्ति के लिए प्रभु प्रेमियों में आदर से सुने जाते हैं। जीवन के हर क्षेत्र पर भाईश्री का विश्लेषण अद्भुत और अनुकरणीय है। वे जीवन की समस्याओं का हल अपने प्रवचनों के माध्यम से सहजता से देते हैं। भक्ति, परमात्मा प्राप्ति और ज्ञानार्जन के विषय में उनके दिए सूत्र अद्वितीय हैं। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही सूत्रों के बारे में भाईश्री रमेश भाई ओझा के श्रीमुख से निकले प्रवचनों के जरिए..... परमात्मा द्वारा निर्मित मंदिर में जहां उनका वास होता है,...
    January 19, 09:03 AM
  • पांच तरह की होती है वाणी, हर वाणी में होता है सत्य
    सत्य बहुधा वाणी में ही प्रतिष्ठित माना गया है और वाणी पांच प्रकार की होती है। ब्रह्म वाणी, देव वाणी, वेद वाणी, आत्म वाणी और गुरुवाणी। ब्रह्म वाणी परम शून्य, परम विस्तार से निकली है, जो महात्मा ही सुन सकते हैं। देववाणी या दिव्य वाणी ब्रह्मवाणी से थोड़ा नीचे है इसे भी सुनना आम जनता के वश में नहीं है। वेद वाणी अपने-अपने शास्त्रों की वाणी है, इसे पढ़ना और समझना कठिन है। आत्मवाणी मनुष्य की सबसे करीबी वाणी है, क्योंकि वह उसकी अंतरात्मा की आवाज है, परंतु वह आज के दौर में कपटों से ढक गई है तथा उसे सुनना...
    January 16, 09:04 AM
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