• सावन में पहननी चाहिए हरी चूड़ियां, ये हैं इस माह से जुड़ी प्राचीन परंपराएं..
    उज्जैन। हरी, पीली, लाल रंग की खनकती चूड़ियों को हिन्दू धर्म में सुहाग का प्रतीक माना गया है। साथ ही,चूड़ियों को हमारे ग्रंथों में से सोलह सिंगारमें से एक माना गया है। सुहागन स्त्रियों का हरे रंग की चूड़ियां पहनने का विशेष महत्व है। खासतौर पर सावन के महीने में। दरअसल सावन में हरे रंग की चूड़ियांपहनना भी एक परंपरा है, लेकिन ये परंपरा क्यों बनाई गई है, ये कम ही लोग जानते हैं आइए जानते हैं क्या कहता है, ज्योतिषीय नजरिया इस परंपरा के बारे में ... क्यों पहने हरी चूड़ियां-सावन मास को हरियाली और प्रकृति का...
    01:00 PM
  • जानिए, इस्लाम धर्म की परंपराओं से जुड़े खास सवालों के जवाब
    उज्जैन।मन या वचन से धर्म या ईश्वर को नकारने वाला या इन पर विश्वास न रखने वाला कोई व्यक्ति भी, व्यावहारिक तौर से तो कर्म के जरिए धर्म से किसी न किसी तरह से जुड़ा ही होता है, लेकिन अज्ञानता या अहं के चलते उसे इसका भान नहीं होता।दरअसल, हर धर्म का सार इसी सूत्र में समाया है कि सभी के हित के लिए सही उद्देश्य से पवित्र व निस्वार्थ भाव से सही समय पर अच्छे कर्म किए जाएं। इंसानियत व जीवन उपयोगी सबक सिखाने वाले दुनिया के ऐसे ही प्रमुख धर्मों में एक है-इस्लाम धर्म। हालांकि, दुनिया के कई हिस्सों में इस्लाम...
    July 8, 08:38[IST]
  • गुप्त नवरात्रि में होती हैं विशेष साधनाएं, ये 4 श्मशान हैं बहुत ही खास
    उज्जैन।हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक गुप्त नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। बहुत कम लोग इस नवरात्रि के बारे में जानते हैं इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ 28 जून, शनिवार से हो चुका है, जिसका समापन 6 जुलाई, रविवार को होगा। इस गुप्त नवरात्रि में वामाचार पद्धति से उपासना की जाती है। यह समय शाक्य एवं शैव धर्मावलंबियों के लिए पैशाचिक, वामाचारी क्रियाओं के लिए अधिक शुभ एवं उपयुक्त होता है। इसमें प्रलय एवं संहार...
    June 30, 01:00[IST]
  • अध्यात्म से जुड़े उपाय करने से होते हैं क्या खास फायदे, इन संकेतों से जानिए
    उज्जैन। दैनिक जीवन में धर्म-कर्म के दौरान अक्सर यह भी नजर आता है कि कई लोग धार्मिक या आध्यात्मिक होने का मतलब धार्मिक क्षेत्र, ज्ञान या विषयों से जुड़े किसी खास इंसान से जोड़कर ही निकालते हैं। जबकि शास्त्रों के मुताबिक सांसारिक जीवन में अगर कोई व्यक्ति अध्यात्म की ओर बढ़ता है, तब उसे किसी बाहरी दिखावे या बनावटी बातों की जरूरत नहीं होती, क्योंकि अध्यात्म का संबंध आत्मा से होता है। इसलिए इसका असर भलाई, भद्रता और विनम्रता के रूप में बाहर दिखाई देता है। जरूरी नहीं कि ऐसा इंसान धार्मिक कर्मकांड या...
    April 18, 05:27[IST]
  • भक्ति के ये 9 आसान उपाय कई लोग नहीं जानते
    उज्जैन। आज तेज रफ्तार की जिंदगी में शांति के लिए भौतिक सुख-सुविधा जैसे घर, भोजन, वस्त्र को ही अक्सर अहमियत दी जाती है। किंतु ये सभी पाने के बाद भी कई लोग मानसिक सुकून के लिए बेचैन नजर आते हैं। आधुनिक जिंदगी की इस परेशानी का एक हल धर्मग्रंथों में भी मिलता है। धर्म के नजरिए से किसी व्यक्ति के पास दौलत और सुख-सुविधा हो, बड़ा कुनबा हो, सामाजिक रुतबा हो, वह स्वयं गुणी और बुद्धिमान हो, वह दूसरों की भलाई भी करता हो, लेकिन अगर वह भगवान के स्मरण या भक्ति से दूर है तो कभी भी वास्तविक खुशी नहीं पाएगा। फिर चाहे...
    November 26, 07:51[IST]
  • क्या आप जानते हैं मधु-कैटभ की कथा का अर्थ, लिखिए अपने विचार
    एक बार भगवान विष्णु क्षीर सागर पर विश्राम कर रहे थे तो उनके कान के मैल से दो राक्षस निकले - मधु और कैटभ| दोनों बहुत शक्तिशाली थे और खूब उपद्रव करने लगे| उन्होंने ब्रह्मा जी को भी युद्ध के लिये ललकारा| ब्रह्मा जी ने विष्णु से सहायता मांगी| विष्णु ने हज़ारों वर्षों तक युद्ध किया पर उन्हें हरा न पाए| अंत में उन्होंने भगवती देवी की आराधना की और देवी के आशीर्वाद से उन्होंने मधु कैटभ का वध कर दिया| विचार करने के लिये प्रश्न: १. मधु कैटब का जन्म विष्णु के कान के मैल से हुआ इसका क्या अर्थ है? २. विष्णु उन्हें...
    October 10, 06:04[IST]
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