
हम किसी भी धर्म के मानने वाले हों और ईश्वर के किसी भी स्वरुप पर आस्था रखते हों, इन सबके मूल में निहित अध्यात्म हमें स्वस्थ रहने की प्रेरणा देता है। यह बात यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी के शोधर्ताओं ने अपने शोध से प्रमाणित की है। धार्मिक एवं आस्था की कसौटी हमें मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करती है, यह बात सदियों पूर्व आयुर्वेद के मनीषी सुश्रुत ने स्वास्थ्य को परिभाषित करते समय "सम दोष:...
जाने-अंजाने में हम सभी ने अघोर तांत्रिकों के बारे में जरुर सुना होगा। इनका नाम सुनते ही मन में अचानक भय उत्पन्न हो जाता है और जिज्ञासा भी बढऩे लगती है। अघोरी सांसारिक बंधनों को नहीं मानते और अधिकांश समय श्मशान में बिताते हैं। अघोर का अर्थ है जो घोर अर्थात विभत्स नहीं है। यानी अघोरी वो लोग होते हैं जो संसार की किसी भी वस्तु को घोर यानी विभत्स नहीं मानते। इसलिए न तो वे किसी वस्तु से...
भगवान श्रीकृष्ण लीला पुरुषोत्त्तम कहलाते हैं। क्योंकि पूरे जीवन की गई श्रीकृष्ण की लीलाओं में कोई लीला मोहित करती है तो कोई अचंभित करती है। लेकिन हर लीला जीवन से जुड़े कोई न कोई बेहतरीन संदेश देती है। भगवान श्रीकृष्ण की सभी लीलाओं में रासलीला के कई पहलू एक ओर श्रद्धा व आस्था तो दूसरी तरफ उत्सुकता और जिज्ञासा का विषय भी रहे हैं। किंतु युग के बदलाव, धर्म की गहरी समझ की कमी और...
इस्लाम धर्म की बुनियाद है - नमाज। इस्लाम धर्म को मानने वाले हर इंसान के लिए जरूरी पांच फर्जों में से नमाज भी एक है। इसके लिए पांच वक्त की नमाज जरूरी बताई गई है। इस्लाम धर्मग्रंथों के मुताबिक पांच वक्त की नमाज से जाने-अनजाने हुए सभी गुनाह मिट जाते हैं। साथ ही उस नमाजी के लिए जन्नत यानी स्वर्ग के दरवाजे खुल जाते हैं। इस तरह नमाज खुदा की रहमत पाने का पवित्र कर्म है और फर्ज भी। खासतौर...
भगवान को पाने के लिए भक्ति करना पड़ती है। यह एक सामान्य विचार है। अधिकांश लोगों का मकसद भी यही होता है कि भगवान मिल जाए। संत-महात्माओं से कई लोग यही प्रश्र पूछते हैं क्या आपने कभी भगवान को देखा है? कई लोग तो अपनी जिंदगी ऐसे व्यक्तियों की तलाश में गुजार देते हैं जिन्हें कभी भगवान मिला हो। दरअसल भगवान को पाना और भक्ति करना दो अलग-अलग बातें हैं। यदि किसी की दृष्टि चली जाए और वह अंधा...
अभाव किसी को भी नहीं भाता। वस्तु पास में न हो, स्थिति अनुकूल न रहे तब जो अभाव होता है वह तो समझ में आता है परन्तु मन चाहा मिल जाए और फिर भी जीवन में अभाव, असंतोष बना रहे, खतरा यहां से शुरू होता है और आज अनेक लोग इसी खतरनाक स्थिति में जी रहे हैं। जो लोग ये मानते हैं कि सम्पन्नता के साधनों से ही प्रसन्नता आएगी और प्रगति होगी वे भूल जाते हैं कि केवल इससे ही कुछ नहीं होगा। इन बाहरी साधनों...
किसके जीवन में मुसीबत नहीं आती। छोटे को छोटी और बड़े को बड़ी दिक्कतें आती ही रहती हैं। मुसीबतों को आने के लिए कोई रिजर्वेशन नहीं कराना पड़ता और ना ही वे पूर्व सूचना दिए आती हैं। कुछ तो वे स्वयं चलकर आती हैं और कुछ हम खुद आमंत्रित करते हैं। स्वआमंत्रित समस्याओं के मामले में कुछ लोग बहुत भरेपूरे होते हैं। जैसे ही मुसीबतों के आने का एहसास हो या वह सामने आकर खड़ी ही हो जाए तो अपने...
अक्सर हम बच्चों पर या तो अपेक्षाओं का बोझ लाद देते हैं या फिर उन्हें इतनी आजादी दे देते हैं कि वो नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं। माता-पिता को चाहिए कि वो अपनी संतान के जीवन के दोनों पहलुओं आध्यात्मिक व भौतिक जीवन का लक्ष्य तय कर दें। लक्ष्य तय करें फिर उसके अनुसार उनका लालन-पालन करें। कई लोगों का जीवन बीत जाता है और वे तय नहीं कर पाते कि उनके जीवन का लक्ष्य क्या है। कई लोग लक्ष्य...
हिन्दू धर्म शास्त्रों में मानव जीवन के सुखों, कामनाओं की पूर्ति, पीड़ा मुक्ति या ग्रह दोषों की शांति के लिए सप्ताह के हर दिन अलग-अलग देवी-देवताओं की आराधना का महत्व बताया गया है। इनमें खासतौर पर शिव पुराण में हर दिन अलग-अलग देवताओं की पूजा के साथ धर्म-कर्म का महत्व और उसका फल बताया गया है। जानिए, किस दिन किस देवता की उपासना मनचाहे फल देती है - रविवार - सूर्य पूजा करें, ब्राह्मणों को...