धर्म का सही अर्थ है अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाना...

यह आदमी का स्वभाव है कि वह अधिकारों के लिए जितना जागरूक होता है, कर्तव्यों के प्रति उतना ही उदासीन। कर्तव्य के लिए आमतौर पर लोगों के मन में टालने की प्रवृत्ति होती है। क र्तव्य को टालने का अर्थ है, धर्म से कट जाना क्योंकि कर्तव्य का ही एक नाम धर्म है। सीधे तौर पर कह सकते हैं कर्तव्य ही धर्म है।  कर्तव्यों से बचकर धर्म या अध्यात्म के रास्ते पर नहीं चला जा सकता है, अध्यात्म की पहली मांग ही है कि कर्तव्यों की पूर्ति हो। पहले समझें कि कर्तव्य क्या है? ऐसे सारे काम जो हमारे धर्म के पालन के लिए जरूरी हैं वे कर्तव्य हैं। हम किसी के पुत्र है, पुत्र का धर्म या कर्तव्य है माता-पिता की...
 
 
 
 
 
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