• मित्र के साथ न करें ये 3 काम, कई मुसीबतों से बचेंगे
    उज्जैन।मित्रता की अहमियत समझने के लिए कई पहलू हो सकते हैं, लेकिन मोटे तौर पर समझना चाहे तों मित्रता, प्रेम और विश्वास का ही दूसरा नाम है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति मुश्किल वक्त, दु:ख और डर का भी सामना आसानी से कर लेता है। यहां तक कि सच्चा मित्र उतना ही भरोसेमंद होता है जितना माता, पत्नी, भाई और पुत्र। सच्ची मित्रता नि:स्वार्थ होती है। शास्त्रों में भी दोस्ती के कई प्रसंग इस बात को साबित भी करते हैं। इनमें कृष्ण-सुदामा की मित्रता हर काल में आदर्श है। आज के दौर में मित्रता की बात करें तो यह भी देखा जाता...
    April 4, 04:18[IST]
  • रिश्तों को और मजबूत करता है होली का त्योहार
    उज्जैन। होली के त्योहार का नाम सुनते ही मन में अचानक ही रंगों से सराबोर चेहरों की याद ताजा हो जाती है। और हो भी क्यों न, क्योंकि होली त्योहार ही रंगों का है। होली का त्योहार भारतीय परंपरा का वह स्वर्णिम पन्ना है, जिसका हर अक्षर खुशियों के रंग से लिखा है। होली जीवन का उत्सव है, जिंदगी में उत्साह और उमंग के संचार का पर्व है। पर्व का शाब्दिक अर्थ है गांठ, गठान या जोडऩा। होली इस मायने में एकदम सटीक है। इस बार होली (धुरेड़ी) 17 मार्च, सोमवार को है। होली के रंगों से सराबोर हो जाना, मूलत: इसी बात का प्रतीक है कि...
    March 10, 06:00[IST]
  • श्मशान और अघोरियों का खास रिश्ता, जानिए इनसे जुड़ी खास बातें
    उज्जैन। अघोरियों का नाम सुनते ही न जानें क्यों दिमाग में एक डरावना चित्र उभर आता है। अघोरियों का जीवन जितना कठिन है, उतना ही रहस्यमयी भी। अघोरियों की साधना विधि सबसे ज्यादा रहस्यमयी है। उनकी अपनी शैली, अपना विधान है, अपनी अलग विधियां हैं। अघोरी उसे कहते हैं जो घोर नहीं हो। यानी बहुत सरल और सहज हो। जिसके मन में कोई भेदभाव नहीं हो। अघोरी हर चीज को समान भाव से देखते हैं। वे सड़ते जीव के मांस को भी उतना ही स्वाद लेकर खा सकते हैं, जितना स्वादिष्ट पकवानों को स्वाद लेकर खाया जा सकता है। अघोरियों की...
    February 10, 01:40[IST]
  • किसी से संबंध जोड़ऩे से पहले जरूर देखी जानी चाहिए ये बातें
    बात उस समय की है जब श्रीकृष्ण और बलराम की बहन सुभद्रा विवाह योग्य हो गई तो श्रीकृष्ण चाहते थे कि वह भावी मां और संस्कृति को विस्तार करने वाली है। उसे अपनी मर्जी से किसी को न सौपें। उसका जीवन साथी कैसा हो, यह तय करने का अधिकार भी उसे दें। उससे पूछें। बलराम ने यह नहीं किया, सीधा निर्णय ही सुना दिया। कई लोग आज भी यही कर रहे हैं। बलराम ने दुर्योधन में केवल दो बातें ही देखी, एक उसका योद्धा होना और दूसरा उसका राजपुत्र होना जबकि श्रीकृष्ण जानते थे कि अर्जुन ही सुभद्रा के लिए योग्य वर क्योंकि वे ये जानते थे...
    October 8, 02:23[IST]
  • आज एक शाम रिश्तों के नाम में भक्त करेंगे हनुमानचालीसा का पाठ
    जीवन प्रबंधन समूह तथा महात्यौहार आयोजन समिति द्वारा श्री हनुमानचालीसा के सवा करोड़ पाठ का द्वितीय आयोजन रक्षाबंधन की पूर्व संध्या 19 अगस्त, सोमवार को इंदौर में होने जा रहा है। इस आयोजन का नाम एक शाम रिश्तों के नाम है। इसमें करोड़ों हनुमान भक्त एक ही दिन, एक ही समय पर श्री हनुमानचालीसा का पाठ करेंगे। जीवन प्रबंधन समूह तथा महात्यौहार आयोजन समिति द्वारा प्रसिद्ध जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजयशंकर मेहता की प्रेरणा से 19 अगस्त की शाम हनुमान भक्त देश तथा विदेशों में अलग-अलग स्थानों पर एकत्रित होकर एक...
    August 19, 10:53[IST]
  • रक्षा बंधन: रिश्तों का सम्मान करना व निभाना सीखाता है ये त्योहार
    हिंदू धर्म में सदियों से विभिन्न त्योहार मनाए जाने की परंपरा चली आ रही है। रक्षा बंधन भी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 20 अगस्त, मंगलवार को है। पंचांग भेद के कारण देश के कुछ हिस्सों में 21 अगस्त, बुधवार को भी रक्षा बंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस त्योहार का बहन-भाई को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधकर जीवन भर रक्षा करने का वचन लेती है। रक्षा बंधन का मनोवैज्ञानिक पक्ष भी है, जो...
    August 16, 12:26[IST]
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