
एक समय था जब रिश्ते दूसरों को लाभ पहुंचाने के लिए होते थे। फिर वक्त बदला, रिश्ते साझा लाभ के लिए होने लगे और अब वक्त आ गया है, जब निज हित रिश्तों पर हावी हो गया है। सार्वजनिक स्थान पर जब किसी काम के लिए कतार लगती है तो कुछ लोग बीच में घुसने की कोशिश कर रहे होते हैं और जो नियम से खड़े रहते हैं, वे आक्रोश व्यक्त करते हैं। यह एक सामान्य दृश्य है। कतार में न लगना या पंक्ति तोड़कर आगे...
श्री हनुमानचालीसा के सवा करोड़ पाठ का आयोजन रक्षाबंधन की पूर्व संध्या १ अगस्त पर होने जा रहा है। इस आयोजन का नाम महात्यौहार है। दुनियाभर में सवा करोड़ लोग एक साथ, एक ही समय, एक ही स्वर में श्री हनुमानचालीसा का पाठ करेंगे। इस आयोजन को नाम दिया गया है एक शाम रिश्तों के नाम। मुख्य कार्यक्रम मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में होगा। इसमें जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजयशंकर मेहता आम जीवन में...
हिंदू धर्म में सदियों से विभिन्न त्योहार मनाए जाने की परंपरा चली आ रही है। रक्षा बंधन भी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 2 अगस्त, गुरुवार को है। इस त्योहार का बहन-भाई को बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन बहन अपने भाई को रक्षा सूत्र बांधकर जीवन भर रक्षा करने का वचन लेती है। रक्षा बंधन का...
सासांरिक जीवन में सुख-सफलता पाने के लिये हर इंसान का अलग-अलग तरीका हो सकता है, लेकिन चाहत एक समान होती है। इसे पूरा करने के लिए अपनाए गए सही या गलत तरीके ही सुख व सफलता का रूप या वक्त भी तय कर देते हैं। गलत कामों से बंटोरा सुख अंतत: अपयश, किंतु सद्कर्मों से पाए सुखों से हमेशा सफल व यशस्वी जीवन मिलता है। हिन्दू धर्मग्रंथ महाभारत में इंसान की सुख-सफलता व यश पाने की इसी कामना को पूरा करने...
धन जीवन में आने पर जो भी चीजें लाता है, दो बातें जरूर कर जाता है। दौलत बाहर की भीड़ और भीतर का अकेलापन भी देती है। धनवान लोग अपने बाहरी जीवन में अकेले कम ही रहते हैं। धन कमाने के लिए दूसरे जरूर चाहिए। यही दृश्य खर्च के साथ भी है। अत्यधिक खर्च की वृत्ति भी अपने आसपास भीड़ बढ़ाने का ही कार्यक्रम है। रुपया-पैसा तीन बातों पर असर करता ही है। स्वास्थ्य, तृष्णा और दुर्गुण। अधिक धन का...
पति-पत्नी में यदि रोज झगड़े हों तो इसका कारण सिर्फ आपसी मतभेद ही नहीं वास्तु दोष भी हो सकता है। अवैध संबंधों का भी एक कारण वास्तु दोष हो सकता है। यदि इन वास्तु दोषों को दूर कर लिया जाए तो इससे होने वाले दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए- 1- दक्षिणी नैऋत्य(पश्चिम-दक्षिण), उत्तरी वायव्य(उत्तर-पश्चिम) या पश्चिमी नैऋत्य(पश्चिम-दक्षिण) का निर्माण यदि...
राम-सीता, शिव-पार्वती जैसे पात्रों से इस रिश्ते की बारीकियां सीखी जा सकती हैं। राम सीता का दांपत्य और शिव पार्वती की गृहस्थी दोनों ही प्रेरणास्पद है। राम ने धनुष तोड़कर सीता से विवाह किया। धनुष अहंकार का प्रतीक है। हमेशा तना रहता है और जब भी बाण चलाता है किसी के प्राण ही लेता है। अहंकार भी हमारे जीवन में ऐसा ही है। जब तक हमारे भीतर अहंकार है हम किसी के प्रति प्रेम, दया, सौहार्द,...
विवाह का एक आध्यात्मिक अभिप्राय भी होता है। दांपत्य को सामाजिक दृष्टि से ही न देखा जाए। पति-पत्नी होना स्त्री-पुरुष के लिए कोई शारीरिक कृत्य मात्र नहीं। इस रिश्ते में आध्यात्मिक अनुभूतियां जितनी गहन होंगी, रिश्ता उतना ही आनंददायक हो जाएगा। आज के दौर में सर्वाधिक मतभेद और आंतरिक तनाव इसी रिश्ते में देखा जा रहा है। आदमी दांपत्य के सुख से भी ऊब गया है और दुख से भी। जिन लोगों को...
परिवारों में रिश्ते बनते भले ही शरीर से हैं, लेकिन रिश्तों को निभाने के लिए शरीर से अलग हटना पड़ता है। भारतीय परिवारों में भी बदलते दौर में एक बड़ा परिवर्तन आया है। हमारे यहां पहले रिश्तों को महत्व दिया गया, शरीर को गौण रखा गया। इसीलिए भारत के परिवार के सदस्य एक-दूसरे से भावनात्मक रूप में रहते हैं। धीरे-धीरे घर-गृहस्थी का विस्तार हुआ। बाहर की दुनिया में लोगों का समय अधिक बीतने...