
यह घटना रूस के एक विमान अभियंता (इंजीनियर) से संबंधित है। प्रथम विश्वयुद्ध चल रहा था, चारों ओर मारकाट मची थी। लाखों लोग काल के ग्रास बन रहे थे और अनेक अपाहिज हो रहे थे। इस भीषण माहौल में यह अभियंता भी रूस की ओर से युद्ध में शामिल हुआ। दुर्भाग्य से युद्ध में उसे एक पैर गंवाना पड़ा। महीनों तक वह अस्पताल में रहा। जब ठीक हुआ तो चिकित्सकों ने सलाह दी कि नकली पैर लगवा लें ताकि चलने-फिरने व...
थामस अल्वा एडीसन बहुत बड़े वैज्ञानिक थे। उनके द्वारा किए गए आविष्कारों की वजह से आज हमारे अनेक कार्य सुविधाजनक ढंग से संपन्न होते हैं। एडीसन निरंतर नवीन प्रयोगों में व्यस्त रहते थे। खाना-पीना सब भुलकर रात-दिन एक करते हुए वे अपनी वैज्ञानिक खोजों को निश्चित व सार्थक परिणाम देते थे। यह बात उन दिनों की है, जब एडिसन स्टोरेज बैटरी बनाने के कार्य में जुटे हुए थे। लगातार मेहनत के बाद भी...
महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम में प्रत्येक कार्य का समय नियत था और नियम कायदों का सख्ती से पालन होता था। आश्रम के प्रत्येक कर्मचारी और वहां रहने व आने वाले सभी लोगों को निम्नानुसार ही कार्य करने की हिदायत दी जाती थी। साबरमती आश्रम का एक नियम यह था कि वहां भोजनकाल में दो बार घंटी बजाई जाती थी। उस घंटी की आवाज सुनकर आश्रम में रहने वाले सभी लोग भोजन करने आ जाते थे। जो लोग दूसरी बार...
विख्यात भारतीय विद्वान सत्यदेव परिव्राजक उन दिनों अमेरिका प्रवास पर थे। प्रात:कालीन भ्रमण उनका नित्य का नियम था। एक दिन वे प्रात:कालीन भ्रमण पर थे कि सामने से एक किशोर आया। उसने सत्यदेव का अभिवादन किया। सत्यदेव ने भी प्रत्युत्तर में अभिवादन कर उसकी ओर प्रश्नसूचक दृष्टि से देखा। लड़के के हाथों में कुछ समाचार पत्र थे। वह सत्यदेव से बोला-मान्यवर। क्या आप मुझसे एक समाचार पत्र...
ईरान के धर्म साहित्य में ईमानदारी के महत्व पर केंद्रित एक कथा है। एक लुहार बहुत अच्छे हथौड़े बनाता था। वह अति निर्धन लेकिन परम संतोषी था। वह न्यूनतम कीमत पर हथौड़े बनाता और कभी अपने इस हुनर से उसने अतिरिक्त लाभ अर्जित करने का प्रयास नहीं किया। एक दिन एक बढ़ाई उसके पास आया और बोला-मेरे लिए एक अच्छा सा हथौड़ा बना दो। हम सात आदमी बाहर से काम करने आए हैं। मेरा हथौड़ा घर पर ही छूट गया...
आज हम पढ़ते कुछ और हैं, उसका अर्थ कुछ और लगाते हैं और उसका परिणाम कुछ और ही निकालते हैं। ऐसा क्यों हैं, किताबें या शास्त्र अपना मूल अर्थ, अपनी मौलिक विचारधारा क्यों खो रहे हैं। सीधा कारण है कि अब लोग पढ़ते समय अपने विचारों को किताबों पर थोप देते हैं। खासकर धर्म शास्त्रों के साथ यह दुर्घटना घट रही है। इस संसार में सभी किसी न किसी से जुड़े हुए हैं। रिश्तों से, धर्म से, काम काज से जुड़ाव...