• स्वामी विवेकानंद ने एक महिला को बताया था कैसे होती है चरित्र की पहचान
    स्वामी विवेकानंद शिकागो की विश्व धर्म संसद के लिए अमेरिका पहुंच गए थे। अभी धर्मसंसद में कुछ दिन शेष थे। जाहिर है धर्मसंसद में न उनका ऐतिहासिक उद्बोधन हुआ था और न उन्हें ख्याति मिली थी। अमेरिका में पहुंचने के बाद भी वे संन्यासियों की वेशभूषा में रहते थे। कषाय वस्त्र, सिर पर पगड़ी, हाथों में डंडा और कंधों पर चादर डली हुई। इसी वेशभूषा में वे एक दिन शिकागो की सड़कों पर भ्रमण कर रहे थे। अमेरिका के वासियों के लिए यह वेशभूषा न सिर्फ अचरज की वजह थी, बल्कि काफी हद तक उनके लिए यह उपहास का विषय थी।...
    June 26, 10:45[IST]
  • एक राजा को ऐसे मालूम हुआ तंदुरुस्ती का राज, खाते समय ध्यान रखें ये 3 बातें
    एक राजा प्राय: रात के समय अपनी प्रजा के हालचाल जानने के लिए वेश बदलकर घूमता था। उसे कोई पहचान नहीं पाता और इसलिए वह प्रजा की समस्याओं व जरूरतों का ठीक-ठीक तरीके से आंकलन कर पाता था। इससे उसे राज्य विषयक योजनाएं बनाने में तो मदद मिलती ही थी, साथ ही वह अपनी प्रजा के हर प्रकार के स्तर से वाकिफ होता था। एक बार वह रात के समय निकला और राजधानी के पूर्वी छोर की बस्ती में पहुंचा। वहां का इलाका अपेक्षाकृत रूप से निर्धन था। राजा वहां बनी झोपडिय़ों में रहने वालों से मिला और उनकी समस्याओं को जाना। तभी उसकी...
    June 15, 12:42[IST]
  • क्रोध के कारण महिला ने गंवाई जान, पढ़िए पूरी कहानी
    एक किसान की पत्नी बहुत क्रोधी थी। कोई जब उसके भले की बात कहता तो वह उसका उल्टा ही करती थी। एक दिन किसान ने कहा, 'आज गर्मी अधिक है। खिड़की-दरवाजे खोल दो तो जरा ठंडी हवा आएगी।' यह सुनते ही किसान की पत्नी बोली, 'मुझे तो ठंड लग रही है। खिड़की-दरवाजे बंद ही रहने दो।' बेचारा किसान चुप रह गया। एक दिन वह बोला, 'आज बारिश हो रही है। मेरा मन मठरियां खाने का हो रहा है। थोड़ी मठरियां बना दो।' उसकी पत्नी ने चिढ़कर कहा, 'घर में घी और मैदा नहीं है, जो तुम्हारा यह शौक पूरा करूं।' किसान मन मसोसकर रह गया। जब वह खेत से घर आया तो...
    June 2, 12:20[IST]
  • जानिए अच्छी और बुरी चीजों से क्या सीखना चाहिए
    एक राजा अपने सारे लवाजमे और सेना के साथ एक जंगल से गुजर रहा था। राज-काज के काम से दूर जंगल के प्राकृतिक वातावरण में वह बहुत ही प्रसन्नता अनुभव कर रहा था। जल्दी ही वह एक कुटिया के सामने से गुजरा। कुटिया के आंगन में एक व्यक्ति, जिसके तन पर नाम मात्र के कपड़े थे, अत्यधिक आनंदित प्रतीत हो रहा था। वह हंस रहा था। वह खुद से और आस-पास की दुनिया से बहुत संतुष्ट नजर आ रहा था। राजा ने इसका राज जानने के लिए अपने सैनिकों को उसे बुलाने के लिए भेजा। राजा के सैनिक जब उस व्यक्ति के पास गए तो उसने इन लोगों पर कोई ध्यान...
    May 19, 12:05[IST]
  • मुगलकाल की कहानी, जानिए अकबर को कहां और कैसा मिला बीरबल
    पैनी बुद्धि ने दिलाया महत्वपूर्ण ओहदा जब दिल्ली का शहंशाह अकबर था, एक बहुरूपिया बहुत लोकप्रिय था। वह भांति-भांति के रूप धरकर लोगों को चमत्कृत कर देता था। उसकी ख्याति जब अकबर के कानों तक पहुंची तो उन्होंने भी उसके करतब देखने की इच्छा व्यक्त की। जिस स्थान पर बहुरूपिया खेल दिखाता था, एक दिन अकबर अपने लाव-लश्कर के साथ वहीं पहुंच गए। बहुरूपिये ने अनेक वेश धारण किए। अंत में वह बैल का रूप धारण कर आया। वह हूबहू बैल ही लग रहा था। दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। एक छोटा-सा लड़का भी यह खेल देख रहा था। उसने...
    April 26, 12:05[IST]
  • ये 5 कहानियां आपके सोचने और समझने का तरीका बदल सकती हैं
    अकबर को वापस लेना पड़ा विचित्र आदेश एक दिन बादशाह अकबर जब दरबार में आए तो बहुत क्रोध में थे। सभी बादशाह के गर्म मिजाज को भांपकर चुप ही रहे। दरबार समाप्त होने पर बीरबल ने अकबर से गुस्से की वजह जाननी चाही तो वे बोले, मेरा दामाद बहुत दुष्ट है। मुझे अपनी बेटी से मिले एक साल हो गया, किंतु वह उसे भेजता ही नहीं है। बीरबल ने कहा, जहांपनाह! इसमें गुस्से की क्या बात है? मैं आज ही आपकी बेटी को लाने के लिए आदमी भेज देता हूं। अकबर बोले, आदमी तो मैंने भी भेजा था, किंतु दामाद ने उसे खाली हाथ लौटा दिया। वास्तव में...
    April 12, 02:14[IST]
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