
सनातन धर्म की प्रकृति को परब्रह्म का स्वरूप मानने वाली देव संस्कृति में ग्रह देव रूप में पूजनीय है। माना जाता है कि देव स्वरूप होने से हर ग्रह विशेष का अलग-अलग रूपों में शुभ प्रभाव सुख-सफलता लाने वाला होता है। इसके लिए शास्त्रों में विशेष दिनों पर नवग्रह के विशेष मंत्रों के स्मरण का महत्व बताया गया है। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को देवगुरु बृहस्पति के विशेष मंत्र ध्यान के शुभ...
हिन्दू धर्म शास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु को श्री संपन्न भी पुकारा जाता है, क्योंकि उनकी पत्नी के रूप में माता लक्ष्मी पूजनीय हैं। शास्त्रों में देवी लक्ष्मी का ही विद्या, धन, यश, सुख और वैभव से संपन्न स्वरूप ‘श्री’ पुकारा गया है। यही वजह है कि व्यावहारिक तौर पर भी जब किसी जगह या व्यक्ति पर सुख, सफलता बरसती है तो उसे अक्सर 'श्री' से भरपूर या यशस्वी भी पुकारा जाता है। यहीं...
हिन्दू पंचांग के दूसरे माह वैशाख में विष्णु पूजा, भक्ति और उपासना की धर्म परंपराओं से जीवनशैली में संयम और अनुशासन की प्रेरणा मिलती है। इस माह के ही शुक्ल पक्ष का तीसरा दिन यानी तृतीया तिथि, अक्षय तृतीया के रूप में प्रसिद्ध है। यह तिथि दान प्रधान है। मान्यता है कि इस शुभ संयोग में किये गये दान-पुण्य का फल अक्षय माना जाता है। यही कारण है कि घर-परिवार में सुख और शांति के लिए इस...
शांति, मन को ठंडक पहुंचाती है। ठीक उसी तरह जैसे जल को पीने, नहाने या छूने से शरीर को शीतलता और राहत मिलती है। दैनिक जीवन से जुड़ी ऐसी ही एक क्रिया है- स्नान। यह बाहरी तौर पर तो तन को स्वच्छ और ठंडा करने वाली नजर आती है, किंतु असल में यह मानसिक शांति और प्रसन्नता भी देती है। स्नान का संबंध पवित्रता से भी है। स्वच्छता या पवित्रता चाहे वह शरीर, कर्म, विचार, व्यवहार या आचरण की हो,...
ज़िंदगी में किसी भी व्यक्ति के सुख बंटोरने के कई साधन, तरीके और कारण होते हैं। इनमें सांसारिक जीवन के नजरिए से ज्ञान, धन, बल, बुद्धि, स्वभाव, व्यवहार, कर्म, कौशल आदि अहम हैं। सुखों के लिये जरूरी ये गुण और साधन समय के सदुपयोग और मेहनत के बूते साधारण इंसान भी बंटोरकर जीवन को मंगलमय ही नहीं बना सकता, बल्कि आम से खास लोगों की फेहरिस्त में शामिल हो सकता है। शास्त्रों में...
हिन्दू पंचांग के हर माह में दो चतुर्दशियां होती है। चतुर्दशी का स्वामी भगवान शिव को माना गया है। चतुर्दशी पर सुख और शांति की कामना से भगवान शिव का पूजन और व्रत किया जाता है। शिव उपासना की इस परंपरा में शिव की प्रसन्नता के लिए शास्त्रोक्त नियमों के साथ व्यावहारिक संयम भी बताए गए हैं। पुराणों में दिव्य ज्योर्तिलिंग का प्राकट्य भी चतुर्दशी की रात्रि को बताया गया है। इसलिए...
धर्म के नजरिए से माता-पिता की भावनाएं संतान के लिए गहरी और नि:स्वार्थ होती है। हालांकि आज के दौर में कई अवसरों पर माता-पिता और संतान के बीच अपेक्षा या महत्वाकांक्षा के चलते रिश्तों में तनाव व मनमुटाव भी देखा जाता है। लेकिन सच यही है कि माता-पिता और संतान के बीच रिश्तों का अटूट बंधन होता है। यही वजह है कि हर माता-पिता भी पुत्र हो या पुत्री दोनों के सुख, सुविधा और तरक्की की चाहत...
आज कई युवाओं की संघर्ष भरे ज़िंदगी का एक बड़ा कारण लक्ष्य का अभाव भी है। इससे तमाम कोशिशों के बाद भी कई मौकों पर वह नाकामी का सामना करते हैं। हालांकि लक्ष्य न साधने या एकाग्रता भंग होने की वजह कभी-कभी बुरे हालात भी होते हैं लेकिन यह नही भूलना चाहिए कि ऐसे ही बुरे वक्त के थपेड़ों से जूझकर जो मकसद को पा ले, वह चरित्र ही दुनिया में प्रेरणा बन यशस्वी व पूजनीय हो जाता है। हिन्दू...
शास्त्रों के मुताबिक कलियुग में तो श्रीहनुमान का नाम स्मरण ही मंगलकारी, संकटमोचक व विघ्रनाशक माना गया है। श्रीहनुमान अष्ट चिरंजीवियों में एक होने से जाग्रत देवता भी माने जाते हैं। इसलिए विशेष योगों में श्रीहनुमान उपासना सुख-समृद्ध बनाने वाली मानी गई है। इसी कड़ी में हिन्दू पंचांग के चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान का नाम स्मरण ही सभी मनोरथ सिद्धि...